गंगा दशहरा 25 मई को, हस्त नक्षत्र के दिव्य संयोग में स्नान और दान से धुलेंगे दस बड़े पाप

गंगा दशहरा 25 मई को, हस्त नक्षत्र के दिव्य संयोग में स्नान और दान से धुलेंगे दस बड़े पाप

प्रेषित समय :21:27:50 PM / Sat, May 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में मोक्षदायिनी, पतित पावनी मां गंगा का स्थान सर्वोपरि माना गया है, जिन्हें देवताओं की नदी यानी देव नदी कहकर भी पुकारा जाता है. इसी पावन देव नदी का धरा पर अवतरण दिवस यानी गंगा दशहरा इस वर्ष 25 मई 2026, दिन सोमवार को पूरे देश में बेहद श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को जब हस्त नक्षत्र का दिव्य संयोग बनता है, तब स्वर्ग से मां गंगा का अवतरण मर्त्यलोक यानी पृथ्वी पर हुआ था. नारद पुराण और ब्रह्म पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में इस दिन का विशेष महत्व बताते हुए कहा गया है कि गंगा दशहरा के पावन अवसर पर आदिगंगा में डुबकी लगाने से मनुष्यों के कायिक, वाचिक और मानसिक सहित कुल दस प्रकार के पापों का शमन हो जाता है. यही कारण है कि इस पावन तिथि को सनातन धर्म में 'दशहरा' नाम से संबोधित किया गया है, जो शत-प्रतिशत पुण्य फल प्रदान करने वाली मानी गई है.

शास्त्रीय प्रमाणों और ब्रह्म पुराण के अध्याय 63 के श्लोकों पर दृष्टि डालें तो स्पष्ट कहा गया है कि ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि दस महापापों को समूल नष्ट करने की क्षमता रखती है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस विशिष्ट दिन पर जो श्रद्धालु और साधक अपनी समस्त इंद्रियों को पूर्ण संयम में रखते हुए भगवान श्रीकृष्ण, बलभद्र और माता सुभद्रा के दिव्य स्वरूप का दर्शन करते हैं, वे जीवन-मरण के बंधन और समस्त घोर पापों से मुक्त होकर सीधे विष्णुलोक को प्रस्थान करते हैं. इसके साथ ही, स्कन्दपुराण में इस तिथि को 'संवत्सरमुखी' की संज्ञा दी गई है, जिसका सीधा अर्थ है कि यह पूरे वर्ष के मुख्य और सबसे मंगलकारी दिनों में से एक है. स्कन्दपुराण के निर्देशानुसार, इस पावन दिन पर पवित्र नदियों में स्नान करने और सामर्थ्य अनुसार दान पुण्य करने का विशेष विधान है. यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश मुख्य गंगा नदी तक नहीं पहुंच पाता है, तो वह किसी भी स्थानीय पवित्र नदी, सरोवर या जल स्रोत पर जाकर कुशा, दर्भ और काले तिलों से युक्त जल का अर्घ्य देकर तीर्थ तर्पण कर सकता है. ऐसा करने से मनुष्य अनजाने में हुए महापातकों के समान बड़े से बड़े दस पापों से भी तत्काल मुक्त हो जाता है.

सनातन परंपरा में गंगाजल को मात्र पानी नहीं, बल्कि साक्षात अमृत का स्वरूप माना गया है, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि व्यावहारिक जीवन के संकटों को दूर करने में भी अचूक प्रभाव दिखाता है. ज्योतिषविदों और अध्यात्म के जानकारों के अनुसार, गंगा दशहरा के पावन मौके पर गंगाजल के कुछ बेहद आसान और अचूक उपाय करके लोग अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के नए द्वार खोल सकते हैं. आज के इस आधुनिक और तनावपूर्ण दौर में यदि किसी परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सामंजस्य की कमी है, आए दिन क्लेश होता है या विचारों में मतभेद रहता है, तो उन्हें गंगा दशहरा के दिन से शुरुआत कर प्रतिदिन सुबह के समय पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से घर के भीतर मौजूद तमाम नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं और घर में सकारात्मकता के साथ-साथ परम शांति का माहौल स्थापित होता है.

इसके अतिरिक्त, आर्थिक उन्नति और धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए भी इस दिन एक अचूक प्रयोग बताया गया है. शास्त्रों के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन एक दक्षिणावर्ती शंख में शुद्ध गंगाजल भरकर उससे सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु का पूर्ण विधि-विधान से अभिषेक करना चाहिए. इस विशेष अभिषेक से भगवान जनार्दन अत्यंत प्रसन्न होते हैं और जहाँ भगवान विष्णु का वास या पूजन होता है, वहाँ धन-धान्य की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी स्वयं खिंची चली आती हैं, जिससे साधक के घर में कभी दरिद्रता कदम नहीं रखती. इसी तरह, परिवार में स्थाई सुख, दीर्घायु और समृद्धि की कामना रखने वाले लोगों को प्रतिदिन पीपल के वृक्ष की जड़ों में गंगाजल अर्पित करना चाहिए. चूंकि सनातन मान्यताओं में पीपल के वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु और अन्य समस्त देवताओं का वास माना गया है, इसलिए पीपल पर गंगाजल चढ़ाने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में आ रही तमाम बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं.

व्यापारिक दृष्टिकोण से भी गंगाजल का महत्व अतुलनीय माना गया है. यदि कोई व्यापारी लंबे समय से अपने व्यवसाय में मंदी का सामना कर रहा है, या उसे ऐसा आभास होता है कि किसी ईर्ष्यालु व्यक्ति या प्रतिद्वंद्वी ने उसकी दुकान या प्रतिष्ठान पर कोई तंत्र प्रयोग, टोना-टोटका या बुरी नजर का प्रभाव कर दिया है जिसके कारण चलता हुआ काम अचानक ठप हो गया है, तो उसके लिए गंगा दशहरा का दिन एक महान अवसर है. ऐसे पीड़ित व्यवसायियों को गंगा दशहरा के शुभ मुहूर्त में अपनी पूरी दुकान, गोदाम या दफ्तर के कोने-कोने में पवित्र गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए. शास्त्रों का दावा है कि गंगाजल की एक-एक बूंद में इतनी पवित्रता और शक्ति होती है कि वह बड़े से बड़े तांत्रिक कुप्रभाव, नजर दोष और नकारात्मकता को तत्क्षण भस्म कर देती है. इस उपाय को करने के बाद व्यापारिक स्थल का शुद्धिकरण हो जाता है और रुका हुआ व्यवसाय पुनः पूरी गति से चलने लगता है. कुल मिलाकर, 25 मई को आने वाला यह गंगा दशहरा पर्व देश भर के श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक चेतना, आत्मिक शुद्धि और भौतिक कष्टों के निवारण का एक परम पावन संदेश लेकर आ रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-