आज का दिन- 26 मई 2026, अधिक माह के शुक्ल पक्ष में आती है उसे पद्मिनी एकादशी कहते हैं!

आज का दिन- 26 मई 2026, अधिक माह के शुक्ल पक्ष में आती है उसे पद्मिनी एकादशी कहते हैं!

प्रेषित समय :22:43:19 PM / Mon, May 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 6367472963)
विष्णुदेव की आराधना के लिए नियमित रूप से किए जाने वाले व्रतों में एकादशी का सर्वाधिक महत्व है.
भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए यह व्रत किया जाता है.
एक वर्ष में कुल चौबीस एकादशी होती है, लेकिन जिस वर्ष अधिक मास होता है उस वर्ष कुल छब्बीस एकादशी होती है.
सभी एकादशी अलग-अलग नामों से जानी जाती है तथा इनका अलग-अलग महत्व भी होता है.
एकादशी व्रत के दिन भोजन नहीं किया जाता है, चाहे तो फलाहार ग्रहण कर सकते हैं.
प्रात: पवित्र स्नान के बाद देव पूजा करनी चाहिए और दिन भर यथा सम्भव- ऊँ नमो नारायणाय, का जाप करना चाहिए.
एकादशी व्रत करने से मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं.
कम-से-कम एक वर्ष पूरा होने पर एकादशी व्रत का उद्यापन करना चाहिए.
जीवन में भोग और मोक्ष की एक साथ प्राप्ति के लिए श्रीविष्णु आराधना श्रेष्ठ है.
अच्युतम केशवम रामनारायणम, कृष्ण दामोदरम् वासुदेवम् हरे.
श्रीधरम् माधवम् गोपिकावल्लभम, जानकी नायकम श्रीरामचन्द्रम् भजे..
श्री सिद्धि विनायक पंचांग, चौघड़िया- 26 मई 2026
शक सम्वत 1948, विक्रम सम्वत 2083, अमान्त महीना ज्येष्ठ (अधिक), पूर्णिमान्त महीना ज्येष्ठ (अधिक), वार मंगलवार, पक्ष शुक्ल, तिथि एकादशी, नक्षत्र हस्त, योग सिद्धि - 03:11 ए एम (27 मई 2026) तक, करण वणिज - 05:42 पी एम तक, द्वितीय करण विष्टि, सूर्य राशि वृषभ, चन्द्र राशि कन्या, राहुकाल 03:51 पी एम से 05:31 पी एम, अभिजित मुहूर्त 12:03 पी एम से 12:56 पी एम

राशिफल- 26 मई 2026
* मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन राशिवालों के लिए उत्तम समय, शेष राशियों के लिए सामान्य दिन, कुम्भ  राशि में जन्मे लोगो के लिए अष्टम चन्द्र, सतर्क रहें, शिवोपासना करें!
* दिन का चौघड़िया
रोग - 05:47 से 07:27
उद्वेग - 07:27 से 09:08
चर - 09:08 से 10:49
लाभ - 10:49 से 12:29
अमृत - 12:29 से 02:10
काल - 02:10 से 03:51
शुभ - 03:51 से 05:31
रोग - 05:31 से 07:12
* रात्रि का चौघड़िया
काल - 07:12 से 08:31
लाभ - 08:31 से 09:51
उद्वेग - 09:51 से 11:10
शुभ - 11:10 से 12:29
अमृत - 12:29 से 01:49
चर - 01:49 से 03:08
रोग - 03:08 से 04:27
काल - 04:27 से 05:46 
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-