संजय गुप्ता ने अभिनेता रणवीर सिंह पर लगाए गए Federation of Western India Cine Employees यानी FWICE के बैन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. निर्देशक ने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी बड़े अभिनेता पर प्रतिबंध लगाने का सबसे बड़ा असर उन सैकड़ों मजदूरों और फिल्म कर्मियों पर पड़ता है, जिनकी रोजी-रोटी शूटिंग से जुड़ी होती है. संजय गुप्ता का यह बयान ऐसे समय आया है जब रणवीर सिंह और Excel Entertainment की फिल्म Don 3 को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है.
सोमवार को FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ “नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव” जारी करते हुए उन्हें इंडस्ट्री स्तर पर बैन करने की घोषणा की थी. यह कार्रवाई फिल्म निर्माता और निर्देशक Farhan Akhtar की शिकायत के बाद की गई. फरहान ने आरोप लगाया था कि रणवीर सिंह ने फिल्म की शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले अचानक प्रोजेक्ट छोड़ दिया, जिससे निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान हुआ.
इस पूरे विवाद के बीच संजय गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने लिखा, “जब कोई ए-लिस्ट हीरो शूटिंग करता है तो सेट पर 300 से ज्यादा लोग काम करते हैं. अगर आप उसे बैन करते हैं तो आप उसे नहीं रोक रहे, बल्कि उन कामगारों की रोजी-रोटी छीन रहे हैं. आखिर इसका क्या मतलब है?” संजय गुप्ता का यह बयान तेजी से वायरल हो गया और फिल्म इंडस्ट्री में बैन की वैधता और उसके प्रभाव को लेकर नई बहस छिड़ गई.
दरअसल, FWICE का कहना है कि रणवीर सिंह को मामले में बातचीत के लिए कई बार नोटिस भेजे गए थे, लेकिन अभिनेता की ओर से कोई जवाब नहीं मिला. FWICE अध्यक्ष Ashoke Pandit ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि फरहान अख्तर की शिकायत मिलने के बाद संगठन ने औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया था. इसके बाद रणवीर सिंह को हर 10 दिन में नोटिस भेजे गए और तीन रिमाइंडर भी जारी किए गए, लेकिन अभिनेता की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.
अशोक पंडित के मुताबिक, जब संगठन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का फैसला किया, तब रणवीर सिंह की तरफ से एक ईमेल भेजा गया जिसमें कहा गया कि यह मामला FWICE के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और संगठन को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. FWICE ने अभिनेता के इस रुख को ध्यान में रखते हुए आगे कार्रवाई जारी रखने का फैसला किया.
FWICE का दावा है कि रणवीर सिंह के अचानक फिल्म छोड़ने से निर्माताओं को लगभग 45 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. संगठन के अनुसार, फिल्म की प्री-प्रोडक्शन प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी और सेट, तकनीकी तैयारी, लोकेशन तथा अन्य व्यवस्थाओं पर भारी रकम खर्च की जा चुकी थी. फरहान अख्तर और निर्माता Ritesh Sidhwani ने FWICE के समक्ष कहा कि इतनी बड़ी फिल्म के उन्नत चरण में अभिनेता का हटना पूरी परियोजना को संकट में डाल सकता है.
गौरतलब है कि “डॉन 3” की घोषणा अगस्त 2023 में की गई थी. Amitabh Bachchan और बाद में Shah Rukh Khan द्वारा निभाए गए प्रतिष्ठित “डॉन” किरदार को इस बार रणवीर सिंह निभाने वाले थे. फिल्म का टीजर जारी होने के बाद इसे लेकर दर्शकों में काफी उत्साह देखा गया था. हालांकि अब रणवीर के प्रोजेक्ट से बाहर होने और FWICE की कार्रवाई के बाद फिल्म का भविष्य सवालों में घिर गया है.
उधर, सोशल मीडिया पर भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. कुछ लोग FWICE की कार्रवाई को उचित बता रहे हैं और मानते हैं कि बड़े सितारों को प्रोड्यूसर्स के आर्थिक नुकसान के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए. वहीं दूसरी ओर कई लोग संजय गुप्ता के तर्क से सहमत दिखे और कहा कि किसी अभिनेता को बैन करने का सीधा असर सेट पर काम करने वाले तकनीशियनों, स्पॉट बॉय, लाइटमैन और दैनिक मजदूरी पर निर्भर सैकड़ों कर्मचारियों पर पड़ता है.
फिलहाल रणवीर सिंह की ओर से FWICE के बैन पर कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन इंडस्ट्री में यह विवाद अब केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह कलाकारों की पेशेवर जिम्मेदारी, फिल्म संगठनों के अधिकार और श्रमिकों के हितों के बीच संतुलन को लेकर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

