स्टीवन स्पीलबर्ग ने एआई को लेकर जताई चिंता कहा रचनात्मकता का अंतिम फैसला मशीन नहीं कर सकती

स्टीवन स्पीलबर्ग ने एआई को लेकर जताई चिंता कहा रचनात्मकता का अंतिम फैसला मशीन नहीं कर सकती

प्रेषित समय :20:35:12 PM / Thu, May 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

हॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्देशक Steven Spielberg ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अपनी स्पष्ट राय रखी है. उन्होंने कहा कि एआई एक उपयोगी तकनीकी उपकरण हो सकता है, लेकिन रचनात्मक कार्यों में उसे अंतिम निर्णय लेने का अधिकार नहीं दिया जा सकता. स्पीलबर्ग का मानना है कि फिल्मों, लेखन और कला जैसे क्षेत्रों में इंसानी संवेदनाएं, अनुभव और आत्मा का कोई विकल्प नहीं हो सकता.

मिशेल ओबामा और क्रेग रॉबिन्सन के पॉडकास्ट “IMO” में बातचीत के दौरान स्पीलबर्ग ने एआई को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं. उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल मेडिकल रिसर्च, लोकेशन खोजने या प्रोडक्शन से जुड़े कुछ तकनीकी कार्यों में मददगार हो सकता है, लेकिन फिल्म निर्माण के रचनात्मक हिस्से में इसकी सीमाएं तय होनी चाहिए.

स्पीलबर्ग ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा आपत्ति तब होती है जब एआई लेखक की जगह लेने लगता है. उन्होंने कहा, “मुझे एआई तब पसंद नहीं आता जब वह किसी लेखक की कुर्सी पर बैठने की कोशिश करता है.” उनका मानना है कि मशीनें इंसानी भावनाओं और आत्मा को कभी पूरी तरह नहीं समझ सकतीं.

दिग्गज निर्देशक ने साफ शब्दों में कहा कि वह मशीनों में संवेदनशीलता या चेतना होने की बात पर विश्वास नहीं करते. उन्होंने कहा, “मैं नहीं मानता कि आत्मा का कोई विकल्प हो सकता है. यह कोई ऐसा एल्गोरिद्म नहीं है जिसे बनाया जा सके.” स्पीलबर्ग ने यह भी कहा कि एक ऐसा कंप्यूटर जो यह दावा करे कि वह इंसानों से ज्यादा महसूस कर सकता है, उनके सोचने और काम करने के तरीके के पूरी तरह खिलाफ है.

उन्होंने कहा कि भविष्य में एआई कई मेहनत वाले काम आसान कर सकता है और फिल्म निर्माण प्रक्रिया में तकनीकी सहायता दे सकता है, लेकिन यह तय नहीं कर सकता कि किसी किरदार का संवाद कैसा होगा, कैमरा कहां लगेगा या सेट का डिजाइन कैसा दिखेगा. उनके अनुसार एआई को केवल एक “टूल” यानी उपकरण की तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि रचनात्मकता का निर्णायक स्रोत बनाया जाना चाहिए.

स्पीलबर्ग ने कहा, “एआई का इस्तेमाल एक टूल की तरह कीजिए, लेकिन उसे किसी भी रचनात्मक फैसले का अंतिम शब्द मत बनने दीजिए. यही वह सीमा है जहां मैं रेखा खींचता हूं.”

हालांकि स्पीलबर्ग जैसे कई फिल्मकार एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जता रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर हॉलीवुड स्टूडियोज तेजी से इस तकनीक को अपनाने में जुटे हुए हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह लागत में कमी और तेज प्रोडक्शन प्रक्रिया मानी जा रही है. कई बड़े स्टूडियो अब एआई आधारित कंटेंट डेवलपमेंट, एनीमेशन और प्रोडक्शन डिजाइन पर काम कर रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक Amazon MGM Studios ने हाल ही में जेनरेटिव एआई की मदद से विकसित की जाने वाली तीन बच्चों की सीरीज को मंजूरी दी है. वहीं Paramount Pictures भी एआई जनरेटेड कंटेंट पर काम करने की संभावनाएं तलाश रहा है. कई स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पहले से ही एनीमेशन और डिजाइनिंग में एआई तकनीक का उपयोग कर रहे हैं.

स्पीलबर्ग अकेले ऐसे फिल्मकार नहीं हैं जिन्होंने एआई को लेकर चिंता जताई हो. Leonardo DiCaprio, Scarlett Johansson और Cate Blanchett समेत कई कलाकार पहले भी कह चुके हैं कि कहानियां सुनाने और कला निर्माण में एआई का अत्यधिक इस्तेमाल रचनात्मकता और कलाकारों के अधिकारों के लिए खतरा बन सकता है.

फिल्म उद्योग में एआई को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है. एक ओर तकनीक को भविष्य का बड़ा साधन माना जा रहा है, तो दूसरी ओर कलाकारों और लेखकों को डर है कि इससे उनकी भूमिका और पहचान प्रभावित हो सकती है. ऐसे समय में स्पीलबर्ग जैसे दिग्गज फिल्मकारों की राय इस बहस को और गंभीर बना रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में मनोरंजन उद्योग को तकनीक और मानवीय रचनात्मकता के बीच संतुलन बनाना होगा. क्योंकि चाहे तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, कला और कहानी कहने की असली ताकत अब भी इंसानी अनुभवों और भावनाओं में ही निहित मानी जाती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-