20 साल बाद मौत की सजा से बचकर घर लौटा केरल का अब्दुल रहीम, 34 करोड़ की ब्लड मनी ने बचाई जिंदगी

20 साल बाद मौत की सजा से बचकर घर लौटा केरल का अब्दुल रहीम, 34 करोड़ की ब्लड मनी ने बचाई जिंदगी

प्रेषित समय :19:41:19 PM / Thu, May 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कोझिकोड. करीब 20 साल तक सऊदी अरब की जेल में बंद रहने और मौत की सजा का सामना करने के बाद केरल के रहने वाले अब्दुल रहीम आखिरकार अपने वतन लौट आए. गुरुवार को जैसे ही वह कोझिकोड के करीपुर एयरपोर्ट पहुंचे, वहां मौजूद लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. लंबे इंतजार, संघर्ष और भावनाओं से भरे इस पल ने हर किसी को भावुक कर दिया. रहीम की रिहाई और स्वदेश वापसी उस समय संभव हो सकी, जब उनके लिए करीब 34 करोड़ रुपये यानी 1.5 करोड़ सऊदी रियाल की “ब्लड मनी” जुटाई गई.

करीपुर एयरपोर्ट पर अब्दुल रहीम के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. परिवार के सदस्य, स्थानीय निवासी, सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया प्रतिनिधि उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों से इंतजार कर रहे थे. एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही रहीम भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे. लंबे समय बाद अपने देश और अपने लोगों के बीच लौटने का एहसास उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था.

प्रसिद्ध उद्योगपति Bobby Chemmanur ने भी एयरपोर्ट पहुंचकर रहीम का स्वागत किया और उन्हें गले लगाया. इस दौरान रहीम ने लोगों की ओर हाथ उठाकर अभिवादन किया और अंगूठा दिखाकर अपनी खुशी जाहिर की. उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि वह उन सभी लोगों के आभारी हैं, जिन्होंने उन्हें बचाने और घर वापस लाने में मदद की.

एयरपोर्ट से निकलने के बाद रहीम अपने घर पहुंचे, जहां उनकी मां, रिश्तेदारों, दोस्तों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ पहले से मौजूद थी. जैसे ही वह घर के दरवाजे पर पहुंचे, उनकी मां उन्हें देखकर खुद को रोक नहीं सकीं. दोनों एक-दूसरे से लिपटकर रो पड़े. यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया. रहीम बार-बार अपनी मां को गले लगाते और उनका माथा चूमते नजर आए. करीब दो दशक बाद मां-बेटे का यह मिलन पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया.

रहीम की वापसी ऐसे समय हुई है जब बकरीद का माहौल भी बना हुआ है. स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार के बीच उनकी घर वापसी ने खुशी को दोगुना कर दिया है. इलाके में लोगों ने मिठाइयां बांटीं और रहीम के सुरक्षित लौटने पर खुशी जाहिर की.

दरअसल अब्दुल रहीम करीब 20 साल पहले रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए थे. वर्ष 2006 में उन्हें वहां एक विशेष जरूरतों वाले सऊदी बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इसी दौरान एक घटना हुई, जिसमें उस बच्चे की मौत हो गई. आरोप लगा कि रहीम की लापरवाही के कारण बच्चे की जान गई. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और मामला अदालत तक पहुंचा.

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2018 में सऊदी अदालत ने रहीम को मौत की सजा सुनाई. उस समय पीड़ित परिवार ने उन्हें माफी देने से इनकार कर दिया था. सऊदी कानून के अनुसार ऐसे मामलों में पीड़ित परिवार यदि चाहे तो “ब्लड मनी” लेकर आरोपी को माफ कर सकता है. रहीम के सामने भी यही आखिरी विकल्प बचा था. अदालत ने उनके लिए भारी रकम तय की थी और भुगतान की अंतिम तारीख 18 अप्रैल 2024 निर्धारित की गई थी.

रहीम के परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना लगभग असंभव था. लेकिन जैसे-जैसे यह मामला सामने आया, केरल के लोगों ने उनकी मदद के लिए एकजुट होना शुरू कर दिया. सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, प्रवासी भारतीयों और आम लोगों ने मिलकर क्राउडफंडिंग अभियान चलाया. धीरे-धीरे करोड़ों रुपये जमा होने लगे और आखिरकार करीब 34 करोड़ रुपये की पूरी राशि इकट्ठा कर ली गई.

इस अभियान ने पूरे केरल में मानवता और एकजुटता की मिसाल पेश की. छोटे-छोटे दान से लेकर बड़े योगदान तक, हजारों लोगों ने रहीम की जिंदगी बचाने के लिए मदद की. कई लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान चलाया, जबकि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों ने भी आर्थिक सहायता भेजी. आखिरकार यह रकम सऊदी अधिकारियों और पीड़ित परिवार को सौंपी गई, जिसके बाद रहीम की फांसी टल गई और उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ.

रिहाई के बाद कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने में भी कुछ समय लगा. इसके बाद गुरुवार को वह आखिरकार अपने घर लौट सके. रहीम ने कहा कि उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी थी कि एक दिन वह अपनी मां से दोबारा मिल पाएंगे. उन्होंने कहा कि जेल में बिताए गए 20 साल बेहद कठिन थे, लेकिन लोगों के समर्थन ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा.

स्थानीय लोगों का कहना है कि रहीम की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की वापसी की नहीं, बल्कि इंसानियत, उम्मीद और सामूहिक प्रयास की कहानी है. जिस तरह पूरे समाज ने मिलकर उनकी मदद की, उसने यह साबित कर दिया कि मुश्किल समय में एकजुटता कितनी बड़ी ताकत बन सकती है.

अब रहीम अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं और सामान्य जिंदगी की ओर लौटने की कोशिश करेंगे. हालांकि दो दशक जेल में बिताने के बाद उनके सामने नई जिंदगी की चुनौतियां भी होंगी, लेकिन फिलहाल उनके और उनके परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी यही है कि वह जिंदा अपने घर लौट आए हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-