देश के एक बड़े हिस्से में इन दिनों आसमान से बरसती आग ने आम जनजीवन को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है. दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार समेत देश के कई राज्य लगातार पैंतालीस डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान में झुलस रहे हैं. लेकिन इस बार की गर्मी केवल बढ़ते पारे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने एक बेहद ही खतरनाक और अदृश्य रूप अख्तियार कर लिया है जिसे मौसम वैज्ञानिक और चिकित्सा विशेषज्ञ 'वेट बल्ब टेम्परेचर' का नाम दे रहे हैं.
हवा में लगातार बढ़ती जा रही नमी और भीषण गर्मी का यह जानलेवा मिश्रण देश के नागरिकों के लिए एक खामोश खतरे के रूप में उभर रहा है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति इंसानी शरीर के प्राकृतिक सिस्टम को पूरी तरह से फेल करने पर आमादा है, जिसके चलते स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात बनते जा रहे हैं. आमतौर पर सूखी गर्मी में इंसान का शरीर पसीना बहाकर खुद को ठंडा कर लेता है, लेकिन जब हवा में उमस की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है तो पसीना सूखना बंद हो जाता है. पसीना न सूखने के कारण शरीर के भीतर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और इंसान का अंदरूनी तापमान तेजी से बढ़ने लगता है, जो अंततः शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाकर मौत का कारण भी बन सकता है.
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, वेट बल्ब तापमान दरअसल पर्यावरण की उस स्थिति को दर्शाता है जहां गर्मी और आर्द्रता मिलकर इंसान की सहनशक्ति की अंतिम सीमा की परीक्षा लेती हैं. इस तापमान को मापने का तरीका सामान्य थर्मामीटर से अलग होता है क्योंकि इसमें हवा की नमी को भी शामिल किया जाता है. जब वेट बल्ब तापमान पैंतीस डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तो एक स्वस्थ से स्वस्थ इंसान भी छह घंटे से अधिक समय तक खुले माहौल में जीवित नहीं रह सकता, चाहे वह छांव में ही क्यों न बैठा हो. वर्तमान में देश के कई हिस्सों में यही स्थिति बनती जा रही है जहां रात के समय भी तापमान में गिरावट दर्ज नहीं की जा रही है. मौसम विभाग ने इस स्थिति को 'वार्म नाइट्स' यानी गर्म रातों की श्रेणी में रखा है. रात के समय भी ठंडक न मिलने के कारण मानव शरीर को दिनभर की गर्मी से उबरने का मौका नहीं मिल पा रहा है, जिससे हीट स्ट्रेस का ग्राफ बहुत तेजी से ऊपर भागा है. कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो चुके महानगरों में यह संकट और भी गहरा गया है क्योंकि गगनचुंबी इमारतें और डामर की सड़कें दिनभर गर्मी को सोखती हैं और रात में उसे वापस छोड़ती हैं, जिससे शहरी इलाकों में 'हीट आइलैंड इफेक्ट' पैदा हो रहा है.
वेट बल्ब हीट आखिर है क्या?
वेट बल्ब तापमान दरअसल ये बताता है कि वातावरण की गर्मी और नमी मिलकर शरीर को कितना प्रभावित कर रही है. ये सामान्य तापमान से अलग इसलिए होता है क्योंकि ये पसीने के सूखने की क्षमता को भी मापता है.
जब हवा में नमी ज्यादा होती है, तो पसीना सूख नहीं पाता और शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकलती. धीरे-धीरे शरीर अंदर ही अंदर गर्म होने लगता है. वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 35°C वेट बल्ब तापमान मानव सहनशक्ति की सीमा के बेहद करीब माना जाता है.
क्यों यह बन रहा है साइलेंट हेल्थ थ्रेट
दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई इलाके लगातार 45°C से ऊपर तापमान झेल रहे हैं. लेकिन असली समस्या सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि बढ़ती नमी और रात के समय भी गर्म माहौल है.
IMD की चेतावनियों के मुताबिक “वार्म नाइट्स” शरीर को आराम नहीं दे रही हैं, जिससे हीट स्ट्रेस का खतरा और बढ़ रहा है. यही कारण है कि यह स्थिति धीरे-धीरे एक खामोश खतरे में बदल रही है.
जब सूखी और नम गर्मी आमने-सामने
विशेषज्ञों का कहना है कि सूखी गर्मी में पसीना आसानी से सूख जाता है, जिससे शरीर कुछ हद तक खुद को ठंडा रख सकता है.
लेकिन अगर तापमान थोड़ा कम भी हो और नमी ज्यादा हो, तो शरीर का 'नेचुरल कूलिंग सिस्टम' बंद होने लगता है. यही स्थिति वेट बल्ब हीट को ज्यादा खतरनाक बना देती है.
शरीर कब देता है खतरे का अलार्म?
इस स्थिति में शरीर तेजी से हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन की ओर बढ़ता है. इसके शुरुआती संकेत कुछ इस तरह हो सकते हैं:
पसीना या तो बहुत ज्यादा या बिल्कुल बंद हो जाना
तेज चक्कर और कमजोरी
दिल की धड़कन तेज होना
उल्टी या मतली
मांसपेशियों में ऐंठन
भ्रम या बेहोशी
अगर व्यक्ति बेहोश हो जाए या लड़खड़ाने लगे, तो यह हीटस्ट्रोक का गंभीर संकेत हो सकता है.
कौन लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं?
डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक है:
छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए
गर्भवती महिलाओं के लिए
हार्ट, अस्थमा और डायबिटीज मरीजों के लिए
बाहर काम करने वाले मजदूरों के लिए
शहरों में कंक्रीट और भीड़ के कारण हीट 'आइलैंड इफेक्ट' स्थिति को और गंभीर बना देता है, जहां रात में भी गर्मी कम नहीं होती.
कैसे करें खुद को इस खतरे से सुरक्षित?
विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ आसान सावधानियां जान बचा सकती हैं:
दोपहर की धूप से बचें
पर्याप्त पानी पीते रहें
हल्के और ढीले कपड़े पहनें
ठंडी जगह या पंखे/AC का उपयोग करें
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
बंद गाड़ियों में किसी को न छोड़ें
जलवायु परिवर्तन से बढ़ता खतरा
वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी नमी वाली खतरनाक गर्मी की घटनाएं बढ़ रही हैं. खासकर तटीय और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में वेट बल्ब कंडीशन अब पहले से ज्यादा सामान्य होती जा रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

