बजरंगबली के चमत्कारी स्वरूपों का रहस्य किस विग्रह की पूजा से दूर होंगे आपके कौन से संकट

बजरंगबली के चमत्कारी स्वरूपों का रहस्य किस विग्रह की पूजा से दूर होंगे आपके कौन से संकट

प्रेषित समय :21:55:13 PM / Fri, May 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

शास्त्रों और सनातन परंपरा में महाबली श्रीहनुमान जी की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है. हनुमान जी कलयुग के जागृत देवता हैं, जो अपने भक्तों के सभी संकटों को पल भर में दूर कर देते हैं. प्रभु हनुमान जी के अलग-अलग विग्रहों (स्वरूपों) और दिशाओं के मुख की पूजा करने से जीवन में भिन्न-भिन्न प्रकार के शुभ फल प्राप्त होते हैं.

कुंडली के दोषों, शत्रुओं के भय, धन की कमी या मानसिक अशांति को दूर करने के लिए हनुमान जी के किस विग्रह की पूजा करनी चाहिए, इसका विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:

1. पूर्वमुखी हनुमान जी (वानर रूप)
पूर्व की तरफ मुख वाले बजरंगबली को उनके मूल वानर रूप में पूजा जाता है. शास्त्रों में हनुमान जी के इस स्वरूप को बेहद शक्तिशाली और करोड़ों सूर्य के तेज के समान तेजस्वी बताया गया है.

पूजा का फल: पूर्वमुखी हनुमान जी मुख्य रूप से शत्रुओं के नाश के लिए जाने जाते हैं. यदि आपके कार्यक्षेत्र या जीवन में दुश्मन आप पर हावी हो रहे हों, तो इस स्वरूप की पूजा करने से विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है.

2. पश्चिममुखी हनुमान जी (गरुड़ रूप)
पश्चिम दिशा की तरफ मुख वाले हनुमान जी को भगवान विष्णु के वाहन 'गरुड़' का रूप माना जाता है. गरुड़ देव की तरह ही बजरंगबली भी अमर हैं, इसीलिए इन्हें कलयुग का जागृत देव कहा जाता है.

पूजा का फल: हनुमान जी का यह स्वरूप 'संकटमोचन' माना गया है. इनकी आराधना करने से जीवन में अचानक आने वाले बड़े से बड़े संकट, बाधाएं और मानसिक तनाव दूर हो जाते हैं.

3. उत्तरामुखी हनुमान जी (शूकर/वराह रूप)
उत्तर दिशा को वास्तु और शास्त्रों में 'ईशान कोण' यानी देवताओं की पवित्र दिशा माना जाता है, जो हमेशा शुभ और मंगलकारी होती है. उत्तरमुखी हनुमान जी की पूजा शूकर (वराह) रूप में की जाती है.

पूजा का फल: इस दिशा में मुख किए हुए हनुमान जी की पूजा करने से इंसान की आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार होता है. यह स्वरूप भक्तों को धन-दौलत, ऐश्वर्य, मान-प्रतिष्ठा, लंबी आयु और पूरी तरह रोग मुक्त काया प्रदान करता है.

4. दक्षिणामुखी हनुमान जी (नृसिंह रूप)
दक्षिण दिशा के स्वामी यमराज माने जाते हैं और इस दिशा को संकटों व नकारात्मक ऊर्जा की दिशा भी माना जाता है. दक्षिण मुखी हनुमान जी को भगवान विष्णु के उग्र अवतार 'नृसिंह' का रूप माना जाता है.

पूजा का फल: इनकी पूजा करने से जातक के मन से मृत्यु का डर, चिंता और जीवन की बड़ी दिक्कतें समाप्त हो जाती हैं. दक्षिणामुखी हनुमान जी तंत्र-मंत्र और सभी प्रकार की बुरी शक्तियों व तांत्रिक बाधाओं से भक्तों की रक्षा करते हैं.

5. ऊर्ध्वमुख हनुमान जी (हयग्रीव रूप)
ऊर्ध्वमुख का अर्थ है आकाश की ओर मुख. इस स्वरूप में हनुमान जी को घोड़े का रूप यानी 'हयग्रीव' रूप माना गया है. ब्रह्मा जी के कहने पर भगवान ने हयग्रीव दैत्य का संहार करने के लिए यह रूप धारण किया था.

पूजा का फल: इस स्वरूप की नियमित उपासना करने वाले साधकों को समस्त संकटों और गुप्त शत्रुओं से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है.

6. पंचमुखी हनुमान जी
जब पाताल लोक के राजा अहिरावण ने छल से भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जी को बंधक बना लिया था, तब उन्हें मुक्त कराने के लिए हनुमान जी ने यह रूप धरा था. अहिरावण को मारने के लिए पांच दीये एक साथ बुझाने जरूरी थे, इसीलिए हनुमान जी ने पांच मुख धारण किए. इसमें उत्तर में वराह मुख, दक्षिण में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख और पूर्व में हनुमान मुख विराजमान हैं.

पूजा का फल: पंचमुखी हनुमान जी के हर मुख की अपनी अलग शक्ति है. इनकी संयुक्त पूजा करने से तंत्र बाधा, अकाल मृत्यु का भय, गृह क्लेश, नजर दोष और ग्रहों के सभी बुरे प्रभाव तुरंत नष्ट हो जाते हैं.

7. एकादशी हनुमान जी (रुद्र रूप)
यह स्वरूप साक्षात भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है, क्योंकि हनुमान जी शिव जी के ही 11वें रुद्र अवतार हैं. चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती) के दिन कालकारमुख नामक भयंकर 11 मुख वाले राक्षस का वध करने के लिए प्रभु ने यह एकादश मुखी रूप धारण किया था.

पूजा का फल: शास्त्रों के अनुसार एकादशी और पंचमुखी हनुमान जी की पूजा करना संसार के सभी देवी-देवताओं की उपासना करने के समान फलदायी माना गया है. इससे सर्वोच्च आध्यात्मिक और भौतिक सिद्धियां मिलती हैं.

8. वीर हनुमान जी
हनुमान जी के इस स्वरूप में उनके अदम्य बल, साहस, पराक्रम और शौर्य की झलक मिलती है. यह स्वरूप यह संदेश देता है कि जो प्रभु श्रीराम के असंभव काज संवार सकते हैं, वह भक्तों के कष्ट क्यों नहीं हरेंगे.

पूजा का फल: जो भक्त जीवन में बार-बार असफल हो रहे हैं या आत्मविश्वास खो चुके हैं, वे साहस, पराक्रम और अटूट आत्मविश्वास पाने के लिए वीर हनुमान की पूजा करते हैं. इससे कार्यक्षेत्र में आने वाली अड़चनें क्षण भर में दूर हो जाती हैं.

9. भक्त हनुमान जी
इस विग्रह में हनुमान जी हाथ जोड़े हुए भगवान श्रीराम की भक्ति में लीन नजर आते हैं. यह उनका शुद्ध रामभक्त स्वरूप है.

पूजा का फल: भक्त हनुमान की पूजा करने से जातक को हनुमान जी के साथ-साथ भगवान श्रीराम का भी विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. इससे भक्तों के मन में एकाग्रता, मानसिक शांति और सच्ची भक्ति की भावना जागृत होती है.

10. दास हनुमान जी
बजरंगबली का यह स्वरूप प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति, निश्छल सेवा और पूर्ण समर्पण को प्रदर्शित करता है.

पूजा का फल: इस स्वरूप की आराधना करने से भक्तों के भीतर सेवा और समर्पण का भाव पैदा होता है. ऐसे जातक अपने व्यावहारिक जीवन में धर्म कार्य करने और सभी प्रकार के सामाजिक व पारिवारिक रिश्ते-नाते निभाने में निपुणता हासिल करते हैं.

11. सूर्यमुखी हनुमान जी
हनुमान जी के इस स्वरूप का संबंध सीधे उनके गुरु भगवान सूर्य देव से है. सूर्य देव को हनुमान जी का गुरु माना गया है और यह स्वरूप उन्हीं की शक्तियों का प्रतीक है.

पूजा का फल: चूंकि सूर्य देव तेज, ज्ञान और प्रतिष्ठा के कारक हैं, इसलिए सूर्यमुखी हनुमान की पूजा करने से जातक के लिए उच्च शिक्षा, गूढ़ ज्ञान, समाज में मान-सम्मान, प्रसिद्धि और जीवन में लगातार उन्नति के द्वार खुल जाते हैं.

विशेष नोट: भाद्रपद (भादौं) के महीने में हनुमान जी का सिंदूर से अभिषेक करने का विशेष महत्व है. जैसा कि दोहे में कहा गया है कि जो भी भक्त इस महीने प्रेम भाव से हनुमान जी को चोला या सिंदूर अर्पित करता है, उसे बल के साथ-साथ उत्तम बुद्धि और विवेक का वरदान प्राप्त होता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-