- प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8302755688)
जो श्रद्धालु रविवार का व्रत करते हैं, उन्हें देवी कूष्मांडा और सूर्यदेव की पूजा-आराधना करनी चाहिए.
दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्.
जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्.
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहि दुःख शोक निवारिणीम्.
परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
* देवी दुर्गा के नौ रूप हैं, जिनकी नवरात्रि में आराधना की जाती है.
* देवी दुर्गा का चौथा स्वरूप कूष्मांडा है.
* देवी कूष्मांडा, सिंह पर सवार हैं और सूर्यलोक में निवास करती हैं, जो क्षमता किसी भी अन्य देवी-देवता में नहीं है, इसलिए जब कोई कारक ग्रह अस्त हो जाए तो देवी कूष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.
* देवी कूष्मांडा अष्टभुजा धारी हैं और अस्त्र-शस्त्र के साथ माता के एक हाथ में अमृत कलश भी है.
* देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है.
* देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना से सूर्य ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है.
* जिन श्रद्धालुओं की सूर्य की दशा-अन्तरदशा चल रही हो उन्हें भी देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.
* सम्मान, सफलता आदि की कामना रखनेवाले श्रद्धालुओं को देवी कूष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.
* जिन श्रद्धालुओं के पिता से मतभेद हों वे संकल्प लेकर देवी कूष्मांडा की आराधना करें, विवाद से राहत मिलेगी.
सूर्योपासना से प्राप्त होती है... जीवन शक्ति!
* पंचदेवों में से एकमात्र प्रत्यक्ष देव सूर्य की पूजा-अर्चना से जीवन शक्ति प्राप्त होती है, जीवन ऊर्जावान बनता है क्योंकि शेष सारे ग्रह सूर्यदेव से ही ऊर्जा प्राप्त करते हैं.
* विभिन्न राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से प्रसिद्धि/प्रतिष्ठा प्राप्त होने के साथ साथ विविध लाभ भी होते हैं.
* मेष राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से संतान सुख और ज्ञान सुख प्राप्त होता है.
* वृष राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से घर/वाहन आदि भौतिक सुख प्राप्त होते हैं.
* मिथुन राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से पदोन्नति/पराक्रम की प्राप्ति होती है.
* कर्क राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से धन संचय का लाभ मिलता है.
* सिंह राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से संपूर्ण सुख की प्राप्ति होती है.
* कन्या राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से विदेश जाने के और वहां प्रसिद्धि प्राप्त करने के अवसर प्राप्त होते हैं तथा व्यय नियंत्रण का लाभ मिलता है.
* तुला राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से धनलाभ होता है.
* वृश्चिक राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से उत्तम रोजगार के अवसर मिलते हैं, कर्मक्षेत्र में सम्मान मिलता है.
* धनु राशि/लग्न वालों का सूर्योपासना से भाग्योदय होता है तथा धर्मलाभ मिलता है.
* मकर राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से सर्वकष्टों से मुक्ति मिलती है.
* कुंभ राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से पारिवारिक सुख-शांति प्राप्त होती है.
* मीन राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से ऋण, रोग और शत्रु से मुक्ति मिलती है.
॥आरती श्री सूर्यदेव॥
जय कश्यप-नन्दन,ॐ जय अदिति नन्दन.
त्रिभुवन - तिमिर - निकन्दन,भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
सप्त-अश्वरथ राजित,एक चक्रधारी.
दु:खहारी, सुखकारी,मानस-मल-हारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
सुर - मुनि - भूसुर - वन्दित,विमल विभवशाली.
अघ-दल-दलन दिवाकर,दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
सकल - सुकर्म - प्रसविता,सविता शुभकारी.
विश्व-विलोचन मोचन,भव-बन्धन भारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
कमल-समूह विकासक,नाशक त्रय तापा.
सेवत साहज हरतअति मनसिज-संतापा॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
नेत्र-व्याधि हर सुरवर,भू-पीड़ा-हारी.
वृष्टि विमोचन संतत,परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
सूर्यदेव करुणाकर,अब करुणा कीजै.
हर अज्ञान-मोह सब,तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
श्री गौमाता धर्म-कर्म पंचांग, चौघड़िया - 31 मई 2026
शक सम्वत 1948, विक्रम सम्वत 2083, अमान्त महीना ज्येष्ठ (अधिक), पूर्णिमान्त महीना ज्येष्ठ (अधिक), वार रविवार, पक्ष शुक्ल, तिथि पूर्णिमा - 02:14 पी एम तक, नक्षत्र अनुराधा - 04:12 पी एम तक, योग सिद्ध, करण बव - 02:14 पी एम तक, द्वितीय करण बालव - 03:25 ए एम (1 जून 2026) तक, सूर्य राशि वृषभ, चन्द्र राशि वृश्चिक, राहुकाल 05:33 पी एम से 07:16 पी एम, अभिजित मुहूर्त 11:57 ए एम से 12:52 पी एम
राशिफल- 31 मई 2026
* वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ राशिवालों के लिए उत्तम समय, शेष राशियों के लिए सामान्य दिन, मेष राशि में जन्मे लोगो के लिए अष्टम चन्द्र, सतर्क रहें, शिवोपासना करें!
* दिन का चौघड़िया
उद्वेग - 05:33 से 07:16
चर - 07:16 से 08:59
लाभ - 08:59 से 10:42
अमृत - 10:42 से 12:25
काल - 12:25 से 02:08
शुभ - 02:08 से 03:50
रोग - 03:50 से 05:33
उद्वेग - 05:33 से 07:16
* रात्रि का चौघड़िया
शुभ - 07:16 से 08:33
अमृत - 08:33 से 09:50
चर - 09:50 से 11:07
रोग - 11:07 से 12:25
काल - 12:25 से 01:42
लाभ - 01:42 से 02:59
उद्वेग - 02:59 से 04:16
शुभ - 04:16 से 05:33
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
आज का दिन- 31 मई 2026, रविवार व्रत - देवी कूष्मांडा और सूर्यदेव की पूजा-आराधना करें!
प्रेषित समय :21:27:52 PM / Sat, May 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

