अधिक मास की परम एकादशी 11 जून को दुर्लभ संयोग में मिलेगा भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद

अधिक मास की परम एकादशी 11 जून को दुर्लभ संयोग में मिलेगा भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद

प्रेषित समय :21:38:16 PM / Sun, May 31st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ज्येष्ठ अधिक मास में आने वाली परम एकादशी को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और दुर्लभ व्रत माना जाता है. यह एकादशी सामान्य वर्षों में नहीं आती, बल्कि लगभग तीन वर्ष में एक बार अधिक मास पड़ने पर ही इसका संयोग बनता है. वर्ष 2026 में परम एकादशी का व्रत 11 जून, गुरुवार को रखा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने पर दरिद्रता, कष्ट और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 11 जून 2026 को रात्रि 12 बजकर 57 मिनट से प्रारंभ होगी और उसी दिन रात 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर परम एकादशी व्रत 11 जून को ही किया जाएगा. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:02 बजे से 4:42 बजे तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 7:18 बजे से 7:38 बजे तक रहेगा. व्रत का पारण 12 जून 2026 को सुबह 5:23 बजे से 8:10 बजे के बीच करना शुभ माना गया है.

धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इसके स्वामी स्वयं भगवान विष्णु माने जाते हैं. यही कारण है कि इस मास में आने वाली परम एकादशी का महत्व अन्य सभी एकादशियों से कई गुना अधिक बताया गया है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार धन के देवता कुबेर ने भी परम एकादशी का व्रत किया था, जिसके फलस्वरूप उन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष बनाया गया.

धार्मिक विद्वानों के अनुसार परम एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को दशमी तिथि से ही सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए. एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ और संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लेना चाहिए. पूजा के दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पीले पुष्प, धूप, दीप, फल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन रात्रि जागरण करने और विष्णु सहस्रनाम या व्रत कथा का पाठ करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. अगले दिन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. माना जाता है कि जो श्रद्धालु श्रद्धा और नियमपूर्वक परम एकादशी का व्रत करते हैं, उनके जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

इस वर्ष अधिक मास लगने के कारण पूरे साल में एकादशियों की संख्या 24 से बढ़कर 26 हो गई है. इनमें कृष्ण पक्ष की परम एकादशी और शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी को सबसे विशेष और दुर्लभ माना गया है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह व्रत विशेष रूप से आर्थिक संकट, मानसिक तनाव और पारिवारिक परेशानियों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है. इसलिए श्रद्धालुओं में इस व्रत को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-