हैदराबाद. अभिनेता राम चरण की बहुप्रतीक्षित तेलुगु फिल्म ‘पेड्डी’ सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद दर्शकों और समीक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया का सामना कर रही है. निर्देशक बुची बाबू सना द्वारा निर्देशित इस फिल्म को सामाजिक संघर्ष, आदिवासी समुदाय के अधिकारों और व्यवस्था के खिलाफ प्रतिरोध की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन समीक्षकों का मानना है कि फिल्म अपने महत्वपूर्ण विषयों के साथ पूरा न्याय नहीं कर पाई.
फिल्म की कहानी पूर्वी घाट के पहाड़ी क्षेत्र में बसे एक आदिवासी समुदाय के इर्द-गिर्द घूमती है. यह समुदाय वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. उनके गांव से होकर रेलवे लाइन गुजरती है, लेकिन वहां कोई स्टेशन नहीं है, जिसके कारण लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. समुदाय के वरिष्ठ सदस्य अप्पालासुरी वर्षों से रेलवे स्टेशन की मांग को लेकर संघर्ष करते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिलती. इसके बाद पेड्डी नामक युवा इस आंदोलन का चेहरा बनकर उभरता है.
फिल्म में प्रतिरोध, पुलिसिया दमन और सामाजिक असमानता जैसे विषयों को प्रमुखता से दिखाने का प्रयास किया गया है. हालांकि समीक्षकों का कहना है कि इन मुद्दों को गहराई से प्रस्तुत करने के बजाय सतही स्तर पर छुआ गया है. आदिवासी समाज की पीड़ा और संघर्ष कई जगह भावनात्मक प्रभाव पैदा करने में असफल दिखाई देते हैं. जिस सामाजिक बदलाव की उम्मीद कहानी से की जाती है, वह पर्दे पर पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता.
राम चरण ने पेड्डी के किरदार में दमदार अभिनय किया है. एक आक्रामक युवा से लेकर परिपक्व खिलाड़ी और संघर्षशील नेता तक के सफर को उन्होंने प्रभावशाली ढंग से निभाने का प्रयास किया है. फिल्म में उनके खेल और कुश्ती से जुड़े दृश्य आकर्षक बन पड़े हैं. विशेष रूप से उनके प्रशिक्षण और प्रतियोगिता वाले हिस्से दर्शकों का ध्यान खींचते हैं. कई समीक्षकों ने राम चरण के प्रदर्शन को फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बताया है.
वहीं अभिनेत्री जान्हवी कपूर के किरदार को लेकर निराशा व्यक्त की गई है. फिल्म में उनकी भूमिका सीमित दिखाई देती है और कहानी पर उनका प्रभाव बेहद कम नजर आता है. समीक्षकों का मानना है कि उनके चरित्र को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया, जिससे फिल्म का भावनात्मक पक्ष कमजोर पड़ गया.
फिल्म में कन्नड़ अभिनेता शिवराजकुमार ने गुरु और मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है. उनका संयमित अभिनय फिल्म के कुछ मजबूत पक्षों में शामिल है. हालांकि पटकथा की कमजोरियां और लंबा रनटाइम फिल्म की गति को प्रभावित करते हैं. करीब 189 मिनट की अवधि वाली यह फिल्म कई स्थानों पर खिंची हुई महसूस होती है.
तकनीकी पक्ष की बात करें तो फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और दृश्यांकन को सराहा गया है. कई फ्रेम दर्शनीय हैं और बड़े पर्दे का अनुभव प्रदान करते हैं. हालांकि प्रोडक्शन डिजाइन और आदिवासी बस्तियों का चित्रण पूरी तरह वास्तविक नहीं लगता. संगीतकार ए.आर. रहमान का संगीत भी इस बार अपेक्षित प्रभाव छोड़ने में असफल माना जा रहा है.
कुल मिलाकर ‘पेड्डी’ एक महत्वाकांक्षी विषय पर बनी फिल्म है, लेकिन मजबूत विचार होने के बावजूद उसकी प्रस्तुति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाती. राम चरण का अभिनय फिल्म को संभालने की कोशिश करता है, लेकिन कमजोर लेखन और सतही प्रस्तुति के कारण यह दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहती है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

