500 करोड़ की ठगी के मास्टरमाइंड पर ग्वालियर पुलिस घिरी, गिरफ्तारी के बाद भी नहीं लाई प्रोडक्शन वारंट पर

500 करोड़ की ठगी के मास्टरमाइंड पर ग्वालियर पुलिस घिरी, गिरफ्तारी के बाद भी नहीं लाई प्रोडक्शन वारंट पर

प्रेषित समय :20:01:38 PM / Sun, Jun 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. फैशन टीवी की फ्रेंचाइजी दिलाने और निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर देशभर में करोड़ों रुपये की कथित ठगी करने वाले मास्टरमाइंड काशिफ खान और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के बावजूद ग्वालियर पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है. उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अप्रैल में मुंबई से गिरफ्तार किए गए आरोपियों को अब तक ग्वालियर के मामलों में प्रोडक्शन वारंट पर नहीं लाया गया है. इसे लेकर ठगी के शिकार निवेशकों और पीड़ितों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. पीड़ितों का आरोप है कि गिरफ्तारी की जानकारी होने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने समय पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपियों को लाभ मिलने की आशंका पैदा हो गई है.

जानकारी के अनुसार फैशन टीवी की फ्रेंचाइजी, स्पा, निवेश योजनाओं और विभिन्न व्यावसायिक परियोजनाओं के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर करीब 200 से अधिक निवेशकों से लगभग 500 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले नेटवर्क का सरगना काशिफ खान उर्फ काशिफ सरदार हाशिम खान मलिक बताया जा रहा है. उसके साथ सरदार हाशिम खान मलिक, ऑपरेशन हेड कृष्णा देवी और वित्त नियंत्रक नवीन आहूजा उर्फ नवीन सर को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की रामगढ़ताल थाना पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया था. स्थानीय पुलिस की मदद से एक अप्रैल को आरोपियों को हिरासत में लिया गया और बाद में ट्रांजिट रिमांड पर गोरखपुर लाया गया. तीन अप्रैल को उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया.

गोरखपुर पुलिस के अनुसार यह गिरोह सुनियोजित तरीके से लोगों को बड़े ब्रांडों से जोड़ने का झांसा देकर निवेश कराता था. एसपी सिटी निमिष पाटिल ने आरोप लगाया था कि काशिफ खान खुद को फैशन टीवी इंडिया से जुड़ा वरिष्ठ पदाधिकारी बताकर व्यापारियों और निवेशकों का विश्वास जीतता था. जांच में यह भी सामने आया कि वह लंबे समय से विभिन्न राज्यों में इसी तरह की योजनाओं के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसा रहा था. पुलिस का दावा है कि आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, राजस्थान और अन्य राज्यों में भी कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं.

इस पूरे मामले का ग्वालियर से भी सीधा संबंध है. काशिफ खान, उसकी पत्नी रुक्मणी सिंह हुड्डा और सहयोगी दुष्यंत सिंह के खिलाफ ग्वालियर के थाटीपुर थाने में लाखों रुपये की ठगी का मामला दर्ज है. पीड़ितों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तारी किए जाने के बाद भी ग्वालियर पुलिस ने आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की. इतना ही नहीं, आरोप है कि आरोपियों की अनुपस्थिति में ही न्यायालय में चालान प्रस्तुत कर दिया गया. इस कार्रवाई को लेकर पीड़ितों ने कई बार पुलिस अधिकारियों के समक्ष आपत्ति भी दर्ज कराई है.

पीड़ितों का कहना है कि जब गोरखपुर पुलिस आरोपियों को मुंबई से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर ला सकती है और उनसे पूछताछ के लिए कस्टडी रिमांड की तैयारी कर सकती है, तब ग्वालियर पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाना समझ से परे है. उनका आरोप है कि मामले में देरी से जांच प्रभावित हो सकती है और निवेशकों को न्याय मिलने में और समय लग सकता है.

मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य जांच के दौरान सामने आया. पुलिस द्वारा मंत्रालय कॉर्पोरेट मामलों (एमसीए) के रिकॉर्ड की जांच में कथित रूप से यह जानकारी मिली कि काशिफ खान कभी भी फैशन टीवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का आधिकारिक डायरेक्टर नहीं रहा. इसके बावजूद वह खुद को कंपनी से जुड़ा वरिष्ठ अधिकारी बताकर देशभर में लोगों से करोड़ों रुपये वसूलता रहा. जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी झूठी पहचान के सहारे उसने निवेशकों और व्यापारियों का भरोसा हासिल किया.

जांच में यह भी सामने आया है कि काशिफ खान का नेटवर्क केवल व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं था. सूत्रों के अनुसार वह मनोरंजन जगत और हाई-प्रोफाइल कार्यक्रमों से भी जुड़ा हुआ था. फिल्मी हस्तियों और बड़े आयोजनों से जुड़े नामों का हवाला देकर वह लोगों के बीच अपनी साख मजबूत करता था. इसी प्रभाव का इस्तेमाल कथित तौर पर निवेशकों को प्रभावित करने और योजनाओं में पैसा लगाने के लिए किया जाता था.

गोरखपुर पुलिस की जांच के अनुसार यह सिंडिकेट वर्ष 2014 से सक्रिय था. गिरोह पहले लोगों को फैशन टीवी, औरा थाई स्पा और अन्य बड़े ब्रांडों की फ्रेंचाइजी दिलाने का भरोसा देता था. इसके बाद मोटी रकम लेकर कथित रूप से फर्जी अनुबंध सौंप दिए जाते थे. जांच एजेंसियों का अनुमान है कि अब तक देशभर में दर्जनों पीड़ित सामने आ चुके हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. जीएसटी विभाग द्वारा भी संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि करोड़ों रुपये की कर अनियमितताओं के संबंध में नोटिस और जुर्माने की कार्रवाई भी की गई है.

फिलहाल मामले में 8 जून को इलाहाबाद हाईकोर्ट में आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है. इसको लेकर पीड़ितों की चिंता बढ़ गई है. उनका कहना है कि यदि आरोपियों को जमानत मिल जाती है तो उनके फरार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. पीड़ितों ने आईजी, डीआईजी और एसएसपी सहित वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप कर उनका पैसा वापस दिलाने और आरोपियों को ग्वालियर लाकर पूछताछ कराने की मांग की है.

जब इस संबंध में ग्वालियर जोन के आईजी अरविंद कुमार सक्सेना से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर आरोपियों को ग्वालियर लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले में सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे. हालांकि गिरफ्तारी के बाद बीते समय और अब तक प्रोडक्शन वारंट पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर उठ रहे सवाल फिलहाल बरकरार हैं. ऐसे में ठगी के इस बहुचर्चित मामले में अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की सुनवाई और ग्वालियर पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-