SIPRI की रिपोर्ट का बड़ा दावा : भारत ने पहली बार तैनात किए 12 न्यूक्लियर वेपन्स

SIPRI की रिपोर्ट का बड़ा दावा : भारत ने पहली बार तैनात किए 12 न्यूक्लियर वेपन्स

प्रेषित समय :20:06:04 PM / Tue, Jun 9th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारत की परमाणु नीति को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने रणनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत की परमाणु तैयारियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने पहली बार कुछ परमाणु हथियारों को ऐसी स्थिति में रखा है, जिन्हें ऑपरेशनल तैनाती की श्रेणी में माना जा सकता है. यह बदलाव भारत की सुरक्षा रणनीति और न्यूक्लियर डिटरेंस क्षमता को नए दृष्टिकोण से देखने का संकेत देता है.

रिपोर्ट के अनुसार भारत लंबे समय से ऐसी नीति अपनाता रहा है, जिसमें परमाणु हथियार और उन्हें दागने वाले डिलीवरी सिस्टम अलग-अलग स्थानों पर रखे जाते थे. इससे यह सुनिश्चित किया जाता था कि शांति काल में हथियार तत्काल उपयोग की स्थिति में न हों. नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अब इस व्यवस्था में बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक हाल में 12 परमाणु हथियार ऐसे प्लेटफॉर्म्स के साथ जोड़े गए हैं जिन्हें ऑपरेशनल फोर्स का हिस्सा माना जाता है. यही वजह है कि पहली बार भारत के परमाणु जखीरे के एक हिस्से को केवल भंडारित नहीं बल्कि तैनात क्षमता के रूप में देखा जा रहा है.

परमाणु पनडुब्बियों पर बढ़ा फोकस

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत की रणनीतिक तैयारी केवल जमीन तक सीमित नहीं है. भूमिगत मिसाइल साइलो और बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों यानी एसएसबीएन के जरिए परमाणु क्षमता को और मजबूत किया जा रहा है. एसआईपीआरआई का कहना है कि कुछ परमाणु हथियारों की तैनाती नई पनडुब्बियों और अन्य लॉन्च प्लेटफॉर्म्स के साथ की गई है. इसके अलावा समुद्र में डेटरेंस पेट्रोलिंग की गतिविधियां भी बढ़ी हैं. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी गश्त का उद्देश्य संभावित विरोधियों को यह संदेश देना होता है कि जवाबी कार्रवाई की क्षमता हर समय मौजूद है.

रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार होने का अनुमान है. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी अधिक बताई गई है. एसआईपीआरआई का कहना है कि भारत लगातार अपने न्यूक्लियर ट्रायड को मजबूत कर रहा है. न्यूक्लियर ट्रायड का मतलब है कि देश के पास हवा, जमीन और समुद्र तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने की क्षमता मौजूद हो. एयरक्राफ्ट, भूमि आधारित मिसाइलें और परमाणु पनडुब्बियां इस ढांचे का हिस्सा हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मिसाइलों को कैनिस्टर आधारित प्रणाली में रखने और लॉन्च प्लेटफॉर्म्स के साथ जोडऩे की दिशा में भारत आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है.

नो फर्स्ट यूज नीति के साथ आगे की राह

हालांकि रिपोर्ट में बढ़ती तैयारियों का उल्लेख किया गया है, लेकिन भारत की आधिकारिक परमाणु नीति में कोई बदलाव नहीं बताया गया है. भारत अब भी नो फर्स्ट यूज यानी पहले परमाणु हमला न करने की नीति पर कायम है. इस सिद्धांत के तहत भारत परमाणु हथियारों का इस्तेमाल केवल तब करेगा जब उस पर या उसकी सेना पर पहले परमाणु हमला किया जाए. भारत की घोषित रणनीति सीमित लेकिन प्रभावी परमाणु क्षमता बनाए रखने की रही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-