1.50 लाख रुपये के नीचे फिसला सोना, निवेशकों के लिए मौका या अभी और आएगी गिरावट

1.50 लाख रुपये के नीचे फिसला सोना, निवेशकों के लिए मौका या अभी और आएगी गिरावट

प्रेषित समय :22:04:52 PM / Wed, Jun 10th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. बीते कुछ महीनों से लगातार रिकॉर्ड स्तर छू रहा सोना अब दबाव में दिखाई दे रहा है. बुधवार को घरेलू वायदा बाजार में सोने की कीमतें 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गईं. एक ही कारोबारी सत्र में सोने में 3,500 रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. करीब एक माह पहले तक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा सोना अब लगभग 9 प्रतिशत तक टूट चुका है. ऐसे में निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह गिरावट खरीदारी का अवसर है या अभी सोने में और कमजोरी देखने को मिल सकती है.

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर बुधवार को 24 कैरेट सोना 1,47,489 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया. गौरतलब है कि 13 मई 2026 को सोने ने 1,64,500 रुपये प्रति 10 ग्राम का सर्वकालिक उच्च स्तर बनाया था. उस रिकॉर्ड स्तर से अब तक सोना करीब 17,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक नीचे आ चुका है. बाजार में आई इस तेज गिरावट ने उन निवेशकों को भी चौंकाया है, जिन्होंने हाल के दिनों में ऊंचे स्तरों पर खरीदारी की थी.

विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा गिरावट का प्रमुख कारण निवेशकों द्वारा की जा रही मुनाफावसूली है. पिछले महीने आयात शुल्क में बदलाव और अन्य नीतिगत कारणों से घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था. कई निवेशकों ने उस तेजी का लाभ उठाते हुए ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूली शुरू कर दी. इसके परिणामस्वरूप बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया और कीमतों में गिरावट देखने को मिली.

कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि मई महीने में सोने की कीमतों में जो तेज उछाल आया था, उसका बड़ा कारण घरेलू नीतिगत बदलाव और आयात लागत में वृद्धि थी. इसे वैश्विक स्तर पर सोने के लिए किसी नए दीर्घकालिक तेजी के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. अब बाजार का ध्यान फिर से अमेरिकी अर्थव्यवस्था, डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और महंगाई के आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है.

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा तय करने में अमेरिकी महंगाई के आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. निवेशकों को आशंका है कि यदि अमेरिका में महंगाई उम्मीद से अधिक रहती है तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है. ऐसी स्थिति में डॉलर को मजबूती मिल सकती है और सोने जैसी सुरक्षित निवेश परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ सकता है.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी सोने को कमजोर किया है. चूंकि सोना किसी प्रकार का ब्याज नहीं देता, इसलिए जब निवेशकों को बॉन्ड और अन्य निवेश विकल्पों में बेहतर रिटर्न की संभावना दिखाई देती है, तो वे सोने से दूरी बनाने लगते हैं. इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है.

तकनीकी विश्लेषण की बात करें तो विशेषज्ञों के अनुसार सोने के लिए अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर 1,45,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास दिखाई दे रहा है. यदि बिकवाली का दबाव और बढ़ता है तो कीमतें इस स्तर की ओर बढ़ सकती हैं. वहीं दूसरी ओर 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है. जब तक सोना इस स्तर को पार नहीं करता, तब तक बाजार का रुख कमजोर बना रह सकता है.

हालांकि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में आई यह गिरावट लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से अवसर भी साबित हो सकती है. वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीदारी जैसे कारक अभी भी सोने को दीर्घकालिक समर्थन प्रदान कर रहे हैं.

निवेश सलाहकारों का कहना है कि जो निवेशक पहली बार सोने में निवेश करना चाहते हैं, उन्हें एकमुश्त बड़ी राशि लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना चाहिए. सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) या गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी की रणनीति जोखिम को कम कर सकती है. इससे निवेशकों को कीमतों में उतार-चढ़ाव का बेहतर लाभ मिल सकता है.

वहीं जिन निवेशकों के पास पहले से सोना मौजूद है, उनके लिए विशेषज्ञ फिलहाल घबराकर बिकवाली करने की सलाह नहीं दे रहे हैं. उनका मानना है कि सोना अभी भी पोर्टफोलियो में विविधता और जोखिम संतुलन का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है. अल्पकालिक दबाव के बावजूद लंबी अवधि में इसकी उपयोगिता बनी हुई है.

बाजार की नजर अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की आगामी नीति पर टिकी हुई है. यदि आर्थिक आंकड़े अपेक्षा से बेहतर आते हैं तो सोने में और दबाव देखने को मिल सकता है. वहीं यदि वैश्विक अनिश्चितताएं बढ़ती हैं या डॉलर कमजोर होता है तो सोने में फिर से तेजी लौट सकती है.

फिलहाल निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने के बजाय बाजार की दिशा और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाएं. सोने में आई मौजूदा गिरावट ने बाजार में नई बहस जरूर छेड़ दी है, लेकिन यह भी सच है कि इतिहास गवाह है कि लंबी अवधि में सोना हमेशा निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बना रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-