ग्वालियर. मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. थाटीपुर थाना क्षेत्र की एक 24 वर्षीय युवती ने आरोप लगाया है कि अज्ञात साइबर अपराधी ने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर उसकी फर्जी न्यूड तस्वीरें तैयार कीं, उन्हें सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के माध्यम से प्रसारित किया तथा बदनामी की धमकी देकर एक लाख रुपये की फिरौती मांग ली. मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. घटना ने न केवल पीड़ित परिवार को मानसिक रूप से झकझोर दिया है, बल्कि एआई तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग और साइबर अपराधों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पुलिस के अनुसार पीड़िता ने शिकायत में बताया है कि 21 मई से 10 जून के बीच उसे एक अज्ञात मोबाइल नंबर से लगातार कॉल किए जा रहे थे. शुरुआत में उसने इन कॉलों को सामान्य समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन बाद में कॉल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उसके पास युवती की आपत्तिजनक और निजी तस्वीरें मौजूद हैं. आरोपी ने युवती को डराने और दबाव बनाने के उद्देश्य से व्हाट्सएप पर कुछ तस्वीरें भी भेजीं. इन तस्वीरों को देखकर युवती और उसके परिवार के सदस्य स्तब्ध रह गए.
पीड़िता का कहना है कि तस्वीरें पूरी तरह फर्जी हैं और उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है. उसने पुलिस को बताया कि उसने कभी इस प्रकार की कोई तस्वीर न तो खिंचवाई है और न ही किसी के साथ साझा की है. युवती का आरोप है कि उसकी सामान्य तस्वीरों का उपयोग कर एआई तकनीक के माध्यम से अश्लील और आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार की गईं, जिन्हें असली दिखाने की कोशिश की गई. इन तस्वीरों को देखकर परिवार के लोगों को भी गहरा मानसिक आघात पहुंचा है.
शिकायत के अनुसार आरोपी ने युवती को लगातार धमकियां दीं कि यदि उसने उसकी मांग पूरी नहीं की तो वह इन तस्वीरों को और अधिक लोगों तक पहुंचा देगा. आरोपी ने कथित तौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप ग्रुपों में तस्वीरें प्रसारित करने की बात कहकर युवती पर दबाव बनाया. इसके बदले उसने एक लाख रुपये की फिरौती की मांग की. आरोपी का उद्देश्य आर्थिक लाभ प्राप्त करना और युवती को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना बताया जा रहा है.
घटना के बाद पीड़िता और उसके परिवार ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया. थाटीपुर थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस संबंधित मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल, व्हाट्सएप गतिविधियों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है. साथ ही साइबर विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि तस्वीरें किस तकनीक, सॉफ्टवेयर या प्लेटफॉर्म की सहायता से तैयार की गईं. जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि फर्जी तस्वीरें किन-किन लोगों तक भेजी गईं और क्या आरोपी ने इसी तरह अन्य लोगों को भी निशाना बनाया है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के इस मामले को गंभीरता से लिया गया है. तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी की पहचान करने और उसके स्थान का पता लगाने के प्रयास जारी हैं. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) तथा साइबर अपराध से जुड़ी अन्य कानूनी धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में एआई आधारित फोटो और वीडियो एडिटिंग तकनीकों का तेजी से विस्तार हुआ है. इन तकनीकों की मदद से किसी भी व्यक्ति की तस्वीरों को संशोधित कर उन्हें वास्तविक जैसा दिखाया जा सकता है. यही कारण है कि फर्जी फोटो, डीपफेक वीडियो और डिजिटल मॉर्फिंग के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. अपराधी इन तकनीकों का उपयोग कर लोगों को बदनाम करने, ब्लैकमेल करने और धन उगाही जैसी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को घबराने के बजाय तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए. किसी भी प्रकार की ब्लैकमेलिंग के दबाव में आकर पैसे देना समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि इससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है. साथ ही सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी और तस्वीरें साझा करते समय भी सावधानी बरतना आवश्यक है.
ग्वालियर का यह मामला एक बार फिर यह संकेत देता है कि आधुनिक तकनीक जहां सुविधाएं प्रदान कर रही है, वहीं उसका दुरुपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है. पुलिस अब आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार करने के प्रयास में जुटी हुई है. वहीं पीड़िता और उसका परिवार न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं. इस घटना ने समाज में साइबर सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता की आवश्यकता को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

