नई दिल्ली। फैशन की दुनिया में एक दिलचस्प बदलाव तेजी से देखने को मिल रहा है। जिस पीढ़ी को सोशल मीडिया, बोल्ड ट्रेंड्स, चमकीले रंगों और प्रयोगधर्मी स्टाइल के लिए जाना जाता है, वही जेनरेशन जेड यानी Gen Z अब सादगी और संतुलन की ओर लौटती नजर आ रही है। एक ओर जहां वर्ष 2000 के दशक का लोकप्रिय Y2K फैशन फिर से चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर युवाओं का एक बड़ा वर्ग अब मिनिमलिस्ट फैशन को अपनाने लगा है। सफेद रंग के परिधानों, विंटेज कपड़ों, 90 के दशक से प्रेरित डिजाइनों और उपयोगिता आधारित फैशन की बढ़ती लोकप्रियता ने फैशन उद्योग को नई दिशा दे दी है।
फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल कपड़ों की पसंद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह Gen Z की बदलती जीवनशैली, आर्थिक सोच और सामाजिक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अत्यधिक आकर्षक और दिखावटी फैशन ट्रेंड्स का दबदबा रहा है। बड़े-बड़े लोगो, चमकीले रंगों, महंगे ब्रांड्स और ट्रेंडिंग स्टाइल्स को अपनाना युवाओं के बीच प्रतिष्ठा का विषय माना जाता था। लेकिन अब एक नया रुझान सामने आ रहा है जिसमें कम लेकिन बेहतर, साधारण लेकिन प्रभावशाली और टिकाऊ लेकिन फैशनेबल कपड़ों को प्राथमिकता दी जा रही है।
हाल के महीनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर “मिनिमलिस्ट वार्डरोब”, “क्लीन गर्ल एस्थेटिक”, “क्वाइट लक्जरी” और “अंडरस्टेटेड फैशन” जैसे शब्द तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। इन ट्रेंड्स का मूल विचार यह है कि फैशन केवल ध्यान आकर्षित करने का माध्यम नहीं होना चाहिए, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व और जीवनशैली का सहज विस्तार होना चाहिए। इसी कारण सफेद रंग के ड्रेसेस, साधारण शर्ट्स, न्यूट्रल रंगों के परिधान, क्लासिक डेनिम और कम डिज़ाइन वाले कपड़े युवाओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि Gen Z के बीच विंटेज कपड़ों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। कई युवा अब सेकंड-हैंड स्टोर्स, थ्रिफ्ट शॉप्स और ऑनलाइन रीसेल प्लेटफॉर्म्स से कपड़े खरीदना पसंद कर रहे हैं। उनका मानना है कि पुराने दौर के कपड़ों में एक अलग पहचान और विशिष्टता होती है। इसके अलावा ऐसे कपड़े पर्यावरण के लिए भी अपेक्षाकृत बेहतर माने जाते हैं क्योंकि इससे नए वस्त्रों के उत्पादन की आवश्यकता कम होती है। यही कारण है कि 90 के दशक के जैकेट, ढीली फिटिंग वाली जींस, क्लासिक शर्ट्स और पुराने स्टाइल के एक्सेसरीज फिर से फैशन में लौट आए हैं।
फैशन उद्योग के जानकारों के अनुसार मिनिमलिस्ट फैशन के पीछे आर्थिक कारण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बढ़ती महंगाई और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं के बीच युवा अब ऐसे कपड़ों में निवेश करना चाहते हैं जो लंबे समय तक उपयोग किए जा सकें। पहले जहां हर नए ट्रेंड के साथ कपड़े बदलने की प्रवृत्ति अधिक थी, वहीं अब गुणवत्तापूर्ण और बहुउपयोगी वस्त्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे कपड़े जो विभिन्न अवसरों पर पहने जा सकें और जिन्हें बार-बार बदलने की आवश्यकता न हो, युवाओं के बीच अधिक लोकप्रिय हो रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण भी इस बदलाव का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। Gen Z को जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे मुद्दों के प्रति सबसे जागरूक पीढ़ियों में गिना जाता है। यही वजह है कि वे फास्ट फैशन की बजाय टिकाऊ फैशन को महत्व दे रहे हैं। फैशन उद्योग दुनिया के सबसे बड़े प्रदूषणकारी क्षेत्रों में शामिल माना जाता है और कई युवा इस तथ्य से परिचित हैं। इसलिए वे ऐसे ब्रांड्स और उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि Y2K फैशन की वापसी और मिनिमलिस्ट फैशन का उदय एक साथ देखने को मिल रहा है। पहली नजर में ये दोनों ट्रेंड एक-दूसरे के विपरीत लग सकते हैं, लेकिन फैशन विशेषज्ञों का कहना है कि Gen Z दोनों शैलियों को अपने तरीके से मिला रहा है। उदाहरण के लिए, युवा Y2K युग की कुछ विशेषताओं जैसे लो-राइज जींस या विंटेज एक्सेसरीज को अपनाते हैं, लेकिन उन्हें मिनिमलिस्ट और सादे परिधानों के साथ संयोजित करते हैं। इससे एक नया और संतुलित फैशन स्टेटमेंट तैयार होता है।
फैशन ब्रांड्स भी इस बदलाव को गंभीरता से ले रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियों ने अपने नए कलेक्शन में न्यूट्रल रंगों, सरल डिजाइनों और टिकाऊ कपड़ों पर जोर देना शुरू कर दिया है। बड़े फैशन हाउस अब ऐसे उत्पाद लॉन्च कर रहे हैं जो दिखावे की बजाय गुणवत्ता और उपयोगिता पर आधारित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह प्रवृत्ति और मजबूत हो सकती है।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स भी इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पहले जहां फैशन कंटेंट मुख्य रूप से नए ट्रेंड्स और महंगे उत्पादों पर केंद्रित होता था, वहीं अब “कैप्सूल वार्डरोब”, “10 कपड़ों से 20 लुक” और “सस्टेनेबल फैशन” जैसे विषयों पर वीडियो और पोस्ट बड़ी संख्या में देखे जा रहे हैं। इससे युवाओं को यह संदेश मिल रहा है कि स्टाइलिश दिखने के लिए अत्यधिक खर्च या लगातार नए कपड़े खरीदना जरूरी नहीं है।
समाजशास्त्रियों का मानना है कि यह बदलाव केवल फैशन तक सीमित नहीं है बल्कि युवाओं की सोच में आ रहे व्यापक परिवर्तन का हिस्सा है। Gen Z अब दिखावे की संस्कृति से धीरे-धीरे दूरी बनाते हुए वास्तविकता, उपयोगिता और व्यक्तिगत संतुलन को महत्व देने लगी है। यही कारण है कि फैशन में भी सादगी और गुणवत्ता की ओर लौटने की प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई दे रही है।
कुल मिलाकर, फैशन जगत में Gen Z एक नई परिभाषा गढ़ रही है। यह पीढ़ी साबित कर रही है कि आकर्षक दिखने के लिए हमेशा चटख रंगों, महंगे ब्रांड्स और अत्यधिक प्रयोगों की आवश्यकता नहीं होती। कभी-कभी सादगी, संतुलन और आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा फैशन स्टेटमेंट बन जाते हैं। वर्तमान रुझानों को देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले समय में मिनिमलिस्ट फैशन केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि एक स्थायी जीवनशैली के रूप में उभर सकता है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

