सलमान खान पहुंचे हाई कोर्ट फिल्म ‘काला हिरण’ पर रोक की मांग, छवि और अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

सलमान खान पहुंचे हाई कोर्ट फिल्म ‘काला हिरण’ पर रोक की मांग, छवि और अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

प्रेषित समय :18:02:45 PM / Fri, Jun 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने प्रस्तावित फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ के निर्माताओं के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. अभिनेता ने आरोप लगाया है कि फिल्म उनके व्यक्तित्व अधिकारों का अवैध रूप से इस्तेमाल कर रही है और इससे उनकी सार्वजनिक छवि, प्रतिष्ठा तथा लंबित न्यायिक मामलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इस मामले ने एक बार फिर मनोरंजन उद्योग में व्यक्तित्व अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रियाओं के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है.

दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में सलमान खान ने कहा है कि प्रस्तावित फिल्म और उससे जुड़े प्रचार-प्रसार की सामग्री वर्ष 1998 के चर्चित काला हिरण शिकार प्रकरण से प्रेरित अथवा उस पर आधारित प्रतीत होती है. अभिनेता का कहना है कि भले ही फिल्म में उनका नाम सीधे तौर पर उपयोग नहीं किया गया है, लेकिन पोस्टर, प्रचार सामग्री और निर्माताओं से जुड़े लोगों के सार्वजनिक बयानों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि फिल्म का केंद्रीय चरित्र उन्हीं से प्रेरित है. ऐसे में दर्शकों के लिए अभिनेता की पहचान करना कठिन नहीं होगा.

याचिका में कहा गया है कि मई 2026 में जारी किए गए फिल्म के पोस्टर में एक ऐसा पात्र दिखाया गया है, जिसकी छवि सलमान खान से मिलती-जुलती प्रतीत होती है. अभिनेता के वकीलों का दावा है कि पोस्टर में दिखाए गए किरदार ने वैसा ही नीले रंग का ब्रेसलेट पहना हुआ है, जो लंबे समय से सलमान खान की पहचान के रूप में जाना जाता है. यह ब्रेसलेट उनके प्रशंसकों और आम जनता के बीच उनकी विशिष्ट छवि का हिस्सा बन चुका है. याचिका के अनुसार इस प्रकार के दृश्य संकेत जानबूझकर अभिनेता की लोकप्रियता और पहचान का लाभ उठाने के उद्देश्य से उपयोग किए गए हैं.

सलमान खान ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि फिल्म में मुख्य पात्र को हथियार के साथ दिखाया गया है, जबकि उन्हें शस्त्र अधिनियम से संबंधित मामले में पहले ही बरी किया जा चुका है. अभिनेता का तर्क है कि इस प्रकार का चित्रण दर्शकों को भ्रमित कर सकता है और उनके बारे में गलत धारणा बना सकता है. उनके अनुसार फिल्म की कहानी उन घटनाओं से प्रेरित लगती है जो अभी भी राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित न्यायिक प्रक्रियाओं का हिस्सा हैं.

अभिनेता ने अदालत को बताया है कि ऐसे मामलों पर आधारित सामग्री का प्रसार न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है और निष्पक्ष सुनवाई के उनके अधिकार पर असर डाल सकता है. याचिका में कहा गया है कि फिल्म से जुड़ी सामग्री सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर सकती है, जिससे लंबित मामलों के संबंध में पूर्वाग्रह पैदा होने की आशंका है.

मामले में फिल्म के निर्माता अमित जानी, जानी फायरफॉक्स फिल्म्स, निर्देशक भारत श्रीनाथ, अक्षय पांडे और परियोजना से जुड़े अन्य लोगों को पक्षकार बनाया गया है. अभिनेता ने अदालत से अंतरिम आदेश जारी कर फिल्म के निर्माण, प्रचार, वितरण, प्रदर्शन, स्ट्रीमिंग और रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है. साथ ही उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि विवाद के अंतिम निपटारे तक फिल्म से जुड़ी किसी भी प्रकार की प्रचार सामग्री, पोस्टर, टीजर या ट्रेलर जारी न किया जाए.

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि निर्माता अमित जानी ने सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से फिल्म को काला हिरण मामले और गैंगस्टर Lawrence Bishnoi से जोड़कर प्रचारित किया है. अभिनेता का कहना है कि इस प्रकार के बयान उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने वाले हैं और फिल्म के प्रति व्यावसायिक रुचि पैदा करने के लिए उनकी लोकप्रियता का उपयोग किया जा रहा है.

सलमान खान ने अदालत को यह भी बताया कि उन्होंने 24 अप्रैल 2026 को फिल्म से जुड़े पक्षों को कानूनी नोटिस भेजकर परियोजना के विकास, निर्माण और प्रचार गतिविधियों को रोकने की मांग की थी. हालांकि उनके अनुसार नोटिस भेजे जाने के बाद भी प्रचार गतिविधियां जारी रहीं, जिसके कारण उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी. अभिनेता ने यह भी आरोप लगाया कि नोटिस मिलने के बाद किए गए कुछ सोशल मीडिया पोस्ट उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले और मानहानिकारक थे.

याचिका में अभिनेता ने अपने व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों का हवाला देते हुए कहा है कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले भी ऐसे अधिकारों को कानूनी संरक्षण प्रदान कर चुका है. उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की पहचान, छवि और सार्वजनिक व्यक्तित्व का व्यावसायिक लाभ के लिए बिना अनुमति उपयोग नहीं किया जा सकता. इसलिए अदालत को हस्तक्षेप कर उनके अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए.

फिलहाल यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है. फिल्म के निर्माताओं की ओर से विस्तृत जवाब आना बाकी है. मनोरंजन जगत और कानूनी विशेषज्ञों की नजरें अब इस मामले पर टिकी हुई हैं, क्योंकि अदालत का फैसला भविष्य में व्यक्तित्व अधिकारों और वास्तविक घटनाओं से प्रेरित फिल्मों के निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी दिशा तय कर सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-