बालिग बेटी के भरण-पोषण से नहीं बच सकते पिता, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बरकरार रखा फैमिली कोर्ट का आदेश

बालिग बेटी के भरण-पोषण से नहीं बच सकते पिता, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बरकरार रखा फैमिली कोर्ट का आदेश

प्रेषित समय :15:04:27 PM / Sat, Jun 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बिलासपुर. बेटियों के अधिकारों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बालिग होने के बाद भी बेटी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से पिता पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकते. हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पहले से भरण-पोषण संबंधी आदेश प्रभावी है, तो केवल बेटी के बालिग होने के आधार पर उसे समाप्त नहीं किया जा सकता.

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकल पीठ ने मनेंद्रगढ़ फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए पिता द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी. अदालत ने बेटी को प्रतिमाह 5,000 रुपये भरण-पोषण देने के निर्देश को बरकरार रखा.

यह मामला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का है. याचिकाकर्ता गोरखनाथ यादव ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी बेटी कु. प्रिया को भरण-पोषण राशि देने का निर्देश दिया गया था. फैमिली कोर्ट ने वर्ष 2016 में 2,000 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण तय किया था, जिसे वर्ष 2023 में बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया.

पिता की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि उनकी बेटी अब बालिग हो चुकी है, इसलिए उसे भरण-पोषण का अधिकार नहीं मिलना चाहिए. साथ ही यह भी कहा गया कि बेटी की मां के पास पर्याप्त कृषि भूमि और आय के स्रोत मौजूद हैं, जिससे उसका पालन-पोषण किया जा सकता है. याचिकाकर्ता ने पारिवारिक विवादों और रिश्तों को लेकर भी कई आपत्तियां उठाईं.

हालांकि, सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि वर्ष 2016 से भरण-पोषण का आदेश लगातार प्रभावी है और पिता ने कभी इसे चुनौती नहीं दी. ऐसे में वर्षों बाद संबंधों या जिम्मेदारी पर सवाल उठाकर दायित्व से बचने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता.

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि संतान के पालन-पोषण की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी पिता की होती है. इसलिए बेटी के हितों को ध्यान में रखते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता.

इस फैसले को बेटियों के अधिकारों और उनके आर्थिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-