साइबर ठगी के पैसों से खरीदे सोने के सिक्के, खाता लीन होते ही ग्वालियर के सराफा कारोबारी को हुआ खुलासा

साइबर ठगी के पैसों से खरीदे सोने के सिक्के, खाता लीन होते ही ग्वालियर के सराफा कारोबारी को हुआ खुलासा

प्रेषित समय :17:07:23 PM / Sat, Jun 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. साइबर अपराधियों के बदलते तौर-तरीकों का एक हैरान करने वाला मामला ग्वालियर में सामने आया है, जहां एक सराफा कारोबारी को साइबर ठगी की रकम के जरिए चूना लगा दिया गया. शातिर ठग ने पहले किसी अन्य व्यक्ति को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाया और फिर उसी रकम का उपयोग कर ग्वालियर के एक सराफा व्यापारी से लाखों रुपये के सोने के सिक्के खरीद लिए. मामला तब उजागर हुआ जब कारोबारी का बैंक खाता अचानक ‘लीन’ कर दिया गया और बैंक से मिली जानकारी ने उसके पैरों तले जमीन खिसका दी. अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन आरोपी तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है.

मुरार क्षेत्र के सदर बाजार में संचालित एक प्रतिष्ठित सराफा दुकान के संचालक कुणाल जैन ने इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत पुलिस से की है. उनके अनुसार 25 मई की दोपहर करीब तीन बजे एक युवक उनकी दुकान पर आया. उसने अपना नाम जय वर्मा बताया और कहा कि उसे किसी को उपहार देने के लिए सोने के सिक्के खरीदने हैं. युवक ने विभिन्न डिजाइन और वजन के सिक्के देखने के बाद 20 ग्राम वजन के सोने के सिक्के खरीदने का निर्णय लिया. इन सिक्कों की कुल कीमत लगभग 3 लाख 31 हजार रुपये थी.

व्यापारी के अनुसार ग्राहक ने भुगतान नकद देने के बजाय आरटीजीएस के माध्यम से करने की इच्छा जताई. उसने निर्धारित राशि व्यापारी के बैंक ऑफ इंडिया खाते में ट्रांसफर कर दी. बैंक खाते में रकम आने की पुष्टि होने के बाद व्यापारी ने उसे सोने के सिक्के सौंप दिए. उस समय तक सब कुछ सामान्य व्यापारिक लेन-देन की तरह प्रतीत हो रहा था और किसी प्रकार की आशंका नहीं थी.

घटना के दो दिन बाद व्यापारी के मोबाइल पर बैंक से एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें बताया गया कि उनका बैंक खाता ‘लीन’ कर दिया गया है. अचानक खाते पर प्रतिबंध लगने की सूचना से व्यापारी चिंतित हो गया और तत्काल बैंक शाखा पहुंचा. वहां उसे जो जानकारी मिली, उसने पूरे मामले का खुलासा कर दिया. बैंक अधिकारियों ने बताया कि उसके खाते में आई 3.31 लाख रुपये की राशि साइबर ठगी से संबंधित है. किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी कर यह रकम हासिल की गई थी और उसी धनराशि का उपयोग कर सोने के सिक्के खरीदे गए थे.

यह जानकारी मिलते ही व्यापारी को समझ में आया कि वह एक सुनियोजित साइबर अपराध का शिकार बन गया है. उसने तत्काल मुरार थाना पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई. हालांकि व्यापारी का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की और कार्रवाई में अनावश्यक देरी की गई.

जानकारी के अनुसार शिकायत दर्ज होने के लगभग 19 दिन बाद पुलिस ने औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज की. इस देरी को लेकर व्यापारी और स्थानीय व्यापारिक समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है. उनका मानना है कि यदि शिकायत मिलने के तुरंत बाद जांच शुरू की जाती तो आरोपी तक पहुंचने और साइबर अपराधियों के नेटवर्क का पर्दाफाश करने की संभावना अधिक थी.

पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस बैंक खाते से आरटीजीएस के जरिए भुगतान किया गया, वह एक तथाकथित ‘म्यूल अकाउंट’ है. साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों का इस्तेमाल अपराधियों द्वारा अपनी पहचान छिपाने के लिए किया जाता है. इन खातों का वास्तविक संचालन कोई और करता है, जबकि खाताधारक अक्सर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर होता है. यही कारण है कि इस मामले में धन के वास्तविक स्रोत और आरोपी तक पहुंचना कठिन हो गया है.

व्यापारी ने पुलिस को उस व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराया है, जो खुद को जय वर्मा बताकर दुकान पर आया था. जांच एजेंसियां अब उस नंबर की कॉल डिटेल, लोकेशन और बैंकिंग ट्रांजैक्शन का विश्लेषण कर रही हैं. हालांकि साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर फर्जी दस्तावेजों, वर्चुअल नंबरों और कई स्तरों वाले बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी पहचान तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

इस घटना ने व्यापारिक समुदाय के बीच भी चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बैंक खाते में राशि आने की पुष्टि पर्याप्त नहीं मानी जानी चाहिए, विशेषकर तब जब लेन-देन की राशि बड़ी हो. कई बार साइबर अपराधी ठगी के पैसों का उपयोग महंगी वस्तुएं खरीदने में करते हैं और बाद में जब रकम विवादित घोषित होती है तो उसका असर व्यापारी पर पड़ता है. ऐसे मामलों में बैंक खाते सीज हो सकते हैं और व्यापारी को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है. साइबर सेल की मदद भी ली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि भुगतान के लिए इस्तेमाल किया गया खाता किसके नियंत्रण में था और सोने के सिक्के खरीदने वाला व्यक्ति वास्तव में कौन था. जांच एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि मामला किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है.

फिलहाल ग्वालियर का यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि साइबर अपराधी अब केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ठगी से हासिल धन का इस्तेमाल वास्तविक बाजार में महंगी वस्तुओं की खरीदारी के लिए भी कर रहे हैं. ऐसे में व्यापारियों, बैंकों और जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं, जिनसे निपटने के लिए अधिक सतर्कता और तेज कार्रवाई की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-