देवगुरु बृहस्पति के पुष्य नक्षत्र में प्रवेश से बनेगा महाशुभ संयोग, सुख-समृद्धि और सेहत के लिए करें ये 5 उपाय

देवगुरु बृहस्पति के पुष्य नक्षत्र में प्रवेश से बनेगा महाशुभ संयोग, सुख-समृद्धि और सेहत के लिए करें ये 5 उपाय

प्रेषित समय :20:00:26 PM / Wed, Jun 17th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, समृद्धि, संतान, विवाह और भाग्य का कारक ग्रह माना जाता है. 18 जून 2026 को बृहस्पति नक्षत्रों के राजा कहे जाने वाले पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित हैं और इसी दौरान पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर रहे हैं. इस विशेष संयोग से गुरु पुष्य योग का निर्माण होगा, जिसे धन, वैभव, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद फलदायी माना जाता है.

ज्योतिष गणनाओं के अनुसार देवगुरु बृहस्पति 18 जून से 18 अगस्त 2026 तक पुष्य नक्षत्र में रहेंगे. यह अवधि शुभ कार्यों, निवेश, नए व्यवसाय, धार्मिक अनुष्ठानों और जीवन में सकारात्मक बदलावों के लिए विशेष मानी जा रही है. पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है और इसका संबंध समृद्धि, पोषण तथा उन्नति से माना जाता है. ऐसे में गुरु और पुष्य का यह मिलन अनेक राशियों और जातकों के लिए लाभकारी प्रभाव लेकर आ सकता है.

ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि इस अवधि में किए गए कुछ विशेष उपाय व्यक्ति के जीवन में आर्थिक स्थिरता, मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ के मार्ग खोल सकते हैं. सबसे पहला उपाय केसर या हल्दी का तिलक लगाने से जुड़ा है. बृहस्पति का संबंध पीले रंग से माना जाता है. ऐसे में इस अवधि के दौरान माथे और नाभि पर हल्दी या केसर का तिलक लगाने से गुरु ग्रह मजबूत होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मान्यता है कि इससे मान-सम्मान, आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होती है.

दूसरा महत्वपूर्ण उपाय भगवान विष्णु की आराधना से जुड़ा है. गुरु पुष्य योग के दौरान विष्णु सहस्रनाम का पाठ या श्रवण अत्यंत शुभ माना गया है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों का धन कहीं फंसा हुआ हो, आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हों या कर्ज का दबाव हो, उन्हें नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए. इससे आर्थिक बाधाएं दूर होने और नए अवसर मिलने की संभावना बढ़ती है.

तीसरा उपाय दान से संबंधित है. गुरु पुष्य योग में पीले रंग की वस्तुओं जैसे चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, केले या धार्मिक पुस्तकों का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है. मान्यता है कि इस प्रकार का दान व्यक्ति के जीवन में धन-धान्य की वृद्धि करता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने में सहायक होता है.

चौथा उपाय करियर और वैवाहिक जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए बताया गया है. इसके तहत प्रत्येक गुरुवार को हल्दी, चने की दाल और गुड़ मिलाकर केले के वृक्ष की जड़ में अर्पित करने की सलाह दी जाती है. इसके बाद "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्र का जाप करने से नौकरी, व्यवसाय और विवाह से जुड़ी समस्याओं में सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह उपाय गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी माध्यम माना जाता है.

पांचवां उपाय स्वास्थ्य लाभ से जुड़ा हुआ है. जो लोग लंबे समय से शारीरिक समस्याओं या बीमारी से परेशान हैं, उन्हें इस अवधि में प्रत्येक गुरुवार को गाय को भीगी हुई चने की दाल और गुड़ खिलाने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गाय की सेवा और आशीर्वाद से स्वास्थ्य संबंधी कष्टों में राहत मिलती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि गुरु पुष्य योग को खरीदारी, निवेश, नए कार्यों की शुरुआत और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है. इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों का दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है. विशेष रूप से शिक्षा, करियर, विवाह और आर्थिक उन्नति की कामना रखने वाले लोगों के लिए यह समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ज्योतिषीय उपाय आस्था और मान्यताओं पर आधारित होते हैं. किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय के लिए व्यक्ति को अपनी परिस्थितियों और विशेषज्ञ सलाह का भी ध्यान रखना चाहिए. फिर भी धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो 18 जून से शुरू होने वाला गुरु पुष्य योग वर्ष 2026 के महत्वपूर्ण शुभ संयोगों में से एक माना जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में लोग लाभ और सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद कर रहे हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-