जबलपुर. एमपी के जबलपुर स्थित बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है. राज्य सरकार द्वारा गठित जस्टिस संजय दिवेदी आयोग के समक्ष शिकायतकर्ताओं ने बयान दर्ज कराते हुए कई नए तथ्य और सवाल उठाए हैं. इनमें हादसे के बाद क्रूज और उसके इंजन को कथित रूप से तोड़े जाने, तकनीकी जांच नहीं होने और आपदा प्रबंधन में संभावित चूक जैसे मुद्दे शामिल हैं.
सामाजिक कार्यकर्ता नीरज मिश्रा, अखिलेश त्रिपाठी और डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने आयोग के समक्ष कहा कि हादसे के बाद बचे हुए क्रूज और उसके इंजन की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए थी. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विश्वभर में बड़े रेल, विमान और जलयान हादसों के बाद तकनीकी जांच कर दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जाता है, लेकिन बरगी हादसे में ऐसा नहीं किया गया. उन्होंने हादसे के बाद क्रूज के क्षतिग्रस्त हिस्सों और इंजन को हटाने या तोडऩे की प्रक्रिया की भी जांच कराने की मांग की. शिकायतकर्ताओं ने आयोग से मांग की कि हादसे के समय जिले में आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाएं.
अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत जिला स्तर पर कलेक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका और उपलब्ध व्यवस्थाओं की समीक्षा आवश्यक है. डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने आयोग को बताया कि बरगी बांध क्षेत्र में संचालन संबंधी कई प्रक्रियाओं के पालन को लेकर सवाल हैं. उन्होंने कहा कि क्रूज के सर्विस सर्टिफिकेट, तकनीकी फिटनेस और संचालन संबंधी दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए. उन्होंने यह भी दावा किया कि क्रूज के रखरखाव और तकनीकी परीक्षण से जुड़े कई पहलुओं की स्वतंत्र जांच आवश्यक है.
एंबुलेंस और आपदा प्रबंधन पर आपत्तियां-
नीरज मिश्रा ने आयोग के समक्ष कहा कि हादसे के दौरान एंबुलेंस तो पहुंची थी, लेकिन उसमें डॉक्टर या पर्याप्त मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था. उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों और आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए.
आयोग ने कहा- जल्द सौंपेंगे रिपोर्ट-
जस्टिस संजय दिवेदी ने बताया कि अधिकांश शिकायतकर्ताओं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. कुछ शेष बयानों के बाद जांच का अगला चरण शुरू होगा. उन्होंने कहा कि आयोग घटनास्थल का निरीक्षण, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और संबंधित पक्षों से पूछताछ कर चुका है. जांच रिपोर्ट में जिम्मेदारियों और संभावित लापरवाही से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया जाएगा. आयोग ने संकेत दिए हैं कि निर्धारित तीन माह की अवधि पूरी होने से पहले ही जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी जाएगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

