श्योपुर मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं के अभाव पर छात्रों का बवाल, सोशल मीडिया अभियान चलाकर एनएमसी से लगाई गुहार

श्योपुर मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं के अभाव पर छात्रों का बवाल, सोशल मीडिया अभियान चलाकर एनएमसी से लगाई गुहार

प्रेषित समय :15:24:00 PM / Thu, Jun 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

 भोपाल. मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं को लेकर छात्रों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है. आंतरिक परीक्षाओं में खराब परिणाम आने के बाद स्नातक स्तर के विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रशासन और व्यवस्था के खिलाफ सोशल मीडिया अभियान शुरू कर दिया है. छात्रों का आरोप है कि शिक्षकों की भारी कमी, नियमित कक्षाओं का अभाव, व्यावहारिक प्रशिक्षण में लापरवाही और पुस्तकालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उनका भविष्य संकट में पड़ गया है.

पिछले वर्ष शुरू हुए इस मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है. विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने कठिन प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर यहां प्रवेश लिया था, लेकिन कॉलेज में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं. उनका आरोप है कि केवल भवन बना देने से अच्छे चिकित्सक तैयार नहीं किए जा सकते, जब तक पर्याप्त शिक्षक, तकनीकी कर्मचारी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध न हों.

छात्रों ने कॉलेज के अधिष्ठाता और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लिखित शिकायत भी सौंपी है. शिकायत में बताया गया है कि कॉलेज में स्वीकृत 118 शिक्षकीय पदों में से केवल 22 पद ही भरे गए हैं. ऐसे में अधिकांश विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है.

विद्यार्थियों का कहना है कि नियमित कक्षाओं का संचालन नहीं हो रहा है और व्यावहारिक प्रशिक्षण भी बेहद सीमित है. एक छात्र ने आरोप लगाया कि पिछले पांच महीनों में बहुत कम प्रायोगिक कक्षाएं आयोजित की गईं. शरीर रचना विज्ञान की पढ़ाई के लिए आवश्यक शव भी समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए. छात्रों के अनुसार फरवरी में एक पुरुष शव उपलब्ध कराया गया था, जिसका अध्ययन कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है, जबकि महिला शव अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है. उनका कहना है कि चिकित्सा शिक्षा के लिए आवश्यक इस प्रकार के संसाधनों की कमी से उनकी पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है.

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज का पुस्तकालय दिसंबर महीने से बंद पड़ा है. पुस्तकालय में पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री के लिए ग्वालियर जैसे दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. कई छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और महंगी किताबें खरीदना उनके लिए संभव नहीं है. ऐसे में परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए और भी कठिन हो गया है.

कॉलेज परिसर और छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी विद्यार्थियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि छात्रावासों में बार-बार बिजली कटौती होती है, पानी की आपूर्ति नियमित नहीं है और छात्राओं के छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है. इसके अलावा कॉलेज तक पहुंचने वाला मार्ग अभी अधूरा है, जिससे आने-जाने में परेशानी होती है.

कॉलेज से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि श्योपुर शहर और मेडिकल कॉलेज के बीच नदी पर बन रहा पुल अभी तक पूरा नहीं हुआ है. कॉलेज से जुड़ा जिला अस्पताल लगभग दस किलोमीटर दूर स्थित है. ऐसे में मानसून के दौरान संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है, जिससे विद्यार्थियों के नैदानिक प्रशिक्षण और मरीजों से जुड़ी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है.

विवाद बढ़ने के बाद कॉलेज प्रशासन ने भी समस्याओं के अस्तित्व को स्वीकार किया है. कॉलेज के अधिष्ठाता विपेंद्र भदकारिया ने माना कि संस्थान में शिक्षकों और विशेषज्ञ संकाय सदस्यों की कमी जैसी चुनौतियां हैं. उन्होंने कहा कि इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग को अवगत कराया जा चुका है और जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

वहीं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने कहा कि एमबीबीएस प्रथम वर्ष से संबंधित सभी आवश्यक पद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भरे गए हैं. उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है.

श्योपुर मेडिकल कॉलेज में सामने आई यह स्थिति प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है. करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित संस्थान में यदि शिक्षक, पुस्तकालय, प्रयोगात्मक प्रशिक्षण और छात्र सुविधाओं जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य पर पड़ सकता है. छात्रों का कहना है कि वे केवल बेहतर सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग कर रहे हैं ताकि वे भविष्य में सक्षम चिकित्सक बन सकें. अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग छात्रों की शिकायतों पर कितनी जल्दी और प्रभावी कार्रवाई करते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-