जेल में बंद दो उज्बेकिस्तानी युवतियों को हाईकोर्ट की राहत, वतन वापसी का रास्ता साफ

जेल में बंद दो उज्बेकिस्तानी युवतियों को हाईकोर्ट की राहत, वतन वापसी का रास्ता साफ

प्रेषित समय :18:32:34 PM / Thu, Jun 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रायपुर. छत्तीसगढ़ में विदेशी नागरिकों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने उज्बेकिस्तान की दो महिला नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए उनके अपने देश लौटने का रास्ता साफ कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि दोनों महिलाओं के निर्वासन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए, ताकि उन्हें जल्द से जल्द उनके देश उज्बेकिस्तान भेजा जा सके. अदालत के इस आदेश के बाद कई महीनों से हिरासत में रह रही दोनों महिलाओं के भारत प्रवास से जुड़े विवाद का समाधान होने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है.

मामला उज्बेकिस्तान की नागरिक फेरूजा सबिरोवा और दिनोरा सफ्युतदिनोवा से जुड़ा है, जिन्हें वीजा और दस्तावेज संबंधी अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद रायपुर केंद्रीय जेल स्थित डिटेंशन सेंटर में रखा गया था. दोनों महिलाओं की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में अदालत से आग्रह किया गया था कि उन्हें अनावश्यक हिरासत से राहत दी जाए और शीघ्र उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी कराई जाए.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शांतम पाटिल ने अदालत को बताया कि दोनों महिलाएं जनवरी 2026 से विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण हिरासत में हैं. पहले उन्हें प्रशासनिक निगरानी में रखा गया और बाद में रायपुर केंद्रीय जेल के डिटेंशन सेंटर में भेज दिया गया. याचिका में कहा गया कि दोनों महिलाएं अपने देश लौटना चाहती हैं और उनके निर्वासन की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है.

मामले की पृष्ठभूमि मार्च 2026 की एक कार्रवाई से जुड़ी है. जानकारी के अनुसार रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र स्थित एक निजी होटल में पुलिस और संबंधित एजेंसियों द्वारा की गई जांच के दौरान दोनों उज्बेकिस्तानी नागरिकों की पहचान हुई थी. जांच में सामने आया कि दिनोरा सफ्युतदिनोवा का वीजा निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी नवीनीकृत नहीं कराया गया था और वह वीजा अवधि खत्म होने के बावजूद भारत में रह रही थीं. वहीं दूसरी महिला फेरूजा सबिरोवा के पास वैध पासपोर्ट और आवश्यक यात्रा दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए थे. इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने इमिग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट 2025 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया था.

गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजते हुए रायपुर केंद्रीय जेल के डिटेंशन सेंटर में रखा गया. तब से लेकर अब तक दोनों महिलाएं निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने की प्रतीक्षा कर रही थीं. इस बीच उनके पक्ष की ओर से लगातार यह तर्क रखा गया कि वे किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं हैं और केवल दस्तावेजी व वीजा संबंधी उल्लंघन के कारण कार्रवाई का सामना कर रही हैं, इसलिए उन्हें जल्द से जल्द उनके देश भेजा जाना चाहिए.

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मामले ने महत्वपूर्ण मोड़ तब लिया जब उज्बेकिस्तान दूतावास ने भी अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा. दूतावास की ओर से प्रस्तुत पत्र में कहा गया कि दोनों महिलाओं को शीघ्र उनके देश भेजे जाने की प्रक्रिया का समर्थन किया जाता है और आवश्यक दस्तावेज तथा औपचारिकताएं पूरी कराने में दूतावास हर संभव सहयोग करेगा. दूतावास ने अदालत को भरोसा दिलाया कि यात्रा दस्तावेज उपलब्ध कराने और नागरिकों की वापसी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से भी अदालत को बताया गया कि दोनों महिलाओं के निर्वासन की प्रक्रिया पहले से चल रही है और संबंधित विभाग इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं. सरकारी पक्ष ने कहा कि यात्रा दस्तावेज, इमिग्रेशन मंजूरी और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताओं को पूरा करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है तथा सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं.

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ने कहा कि जब राज्य सरकार, केंद्र सरकार और संबंधित दूतावास सभी इस बात पर सहमत हैं कि दोनों महिलाओं को उनके देश भेजा जाना चाहिए और इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तब याचिका में विचारणीय विवाद का कोई महत्वपूर्ण मुद्दा शेष नहीं रह जाता. अदालत ने कहा कि अब प्राथमिकता निर्वासन प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने की होनी चाहिए ताकि दोनों महिलाओं की अपने देश वापसी सुनिश्चित की जा सके.

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए. अदालत के आदेश के बाद अब रायपुर पुलिस, केंद्रीय एजेंसियां, विदेश मंत्रालय और इमिग्रेशन विभाग मिलकर दोनों महिलाओं की वापसी की प्रक्रिया को अंतिम रूप देंगे.

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जाएगा, जहां विदेशी नागरिक दस्तावेजी या वीजा संबंधी उल्लंघनों के कारण हिरासत में हों, लेकिन उनके निर्वासन को लेकर सभी पक्ष सहमत हों. अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब संबंधित देश का दूतावास, केंद्र सरकार और राज्य सरकार किसी व्यक्ति को वापस भेजने की प्रक्रिया पर सहमत हों, तब अनावश्यक विलंब उचित नहीं माना जा सकता.

सूत्रों के अनुसार हाईकोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त होने के बाद संबंधित एजेंसियों ने प्रक्रिया को तेज कर दिया है. यात्रा दस्तावेजों का सत्यापन, इमिग्रेशन मंजूरी और अन्य औपचारिकताओं के पूरा होते ही फेरूजा सबिरोवा और दिनोरा सफ्युतदिनोवा को आधिकारिक रूप से भारत से उज्बेकिस्तान भेज दिया जाएगा. कई महीनों से डिटेंशन सेंटर में रह रही दोनों महिलाओं के लिए यह आदेश बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है.

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर विदेशी नागरिकों के वीजा, दस्तावेज और भारत में प्रवास संबंधी नियमों की महत्ता को रेखांकित किया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि जब किसी विदेशी नागरिक के मामले में कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर सहमति बन जाती है, तब न्यायालय मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए समाधान की दिशा में रास्ता प्रशस्त कर सकता है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासनिक और इमिग्रेशन संबंधी औपचारिकताएं कितनी जल्दी पूरी होती हैं और दोनों महिलाएं कब अपने वतन उज्बेकिस्तान लौट पाती हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-