घर में गणेश मूर्ति की सही दिशा क्या है, जानिए वास्तु शास्त्र के महत्वपूर्ण नियम

घर में गणेश मूर्ति की सही दिशा क्या है, जानिए वास्तु शास्त्र के महत्वपूर्ण नियम

प्रेषित समय :17:32:51 PM / Sat, Jun 20th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण और पूजन से की जाती है. यही कारण है कि अधिकांश हिंदू परिवारों के पूजा घर में गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर अवश्य स्थापित रहती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी की कृपा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है. हालांकि वास्तु शास्त्र में गणेश जी की मूर्ति स्थापना को लेकर कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मूर्ति सही दिशा और उचित स्थान पर स्थापित की जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जबकि गलत स्थान पर स्थापना करने से वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है.

वास्तु शास्त्र के अनुसार भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करने के लिए सबसे शुभ स्थान घर का ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा माना गया है. यह दिशा देवताओं की दिशा कही जाती है और पूजा-पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है. वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि घर का पूजा घर भी इसी दिशा में होना चाहिए. गणेश जी की मूर्ति को इस प्रकार स्थापित करना चाहिए कि पूजा करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे. मान्यता है कि ऐसा करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है.

यदि किसी कारणवश उत्तर-पूर्व दिशा में मूर्ति स्थापित करना संभव न हो तो उत्तर या पश्चिम दिशा में भी गणेश जी की प्रतिमा रखी जा सकती है. हालांकि दक्षिण दिशा में गणेश जी की मूर्ति रखने से बचने की सलाह दी जाती है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार दक्षिण दिशा यमराज और पितरों की दिशा मानी जाती है. इस कारण इस दिशा में देवी-देवताओं की स्थापना को शुभ नहीं माना जाता.

वास्तु शास्त्र में केवल दिशा ही नहीं, बल्कि मूर्ति रखने के स्थान को भी महत्वपूर्ण माना गया है. विशेषज्ञों के अनुसार सीढ़ियों के नीचे कभी भी पूजा स्थान नहीं बनाना चाहिए और न ही वहां गणेश जी अथवा अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां रखनी चाहिए. मान्यता है कि सीढ़ियों के नीचे पूजा स्थल बनाने से वास्तु दोष उत्पन्न होता है और धार्मिक दृष्टि से भी इसे उचित नहीं माना जाता. लगातार लोगों के आने-जाने के कारण उस स्थान की पवित्रता प्रभावित होती है.

इसी प्रकार पूजा घर को शौचालय या स्नानघर की दीवार से सटाकर नहीं बनाना चाहिए. गणेश जी की मूर्ति या अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी ऐसी दीवार के पास नहीं रखनी चाहिए जो सीधे शौचालय या बाथरूम से जुड़ी हो. वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है और घर में मानसिक अशांति का वातावरण बन सकता है.

घर के शयनकक्ष में भी देवी-देवताओं की मूर्तियां रखने से बचने की सलाह दी जाती है. कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार इससे वैवाहिक जीवन में तनाव और मानसिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. इसलिए पूजा घर को हमेशा अलग और पवित्र स्थान पर बनाने की सलाह दी जाती है.

गणेश जी की मूर्ति के स्वरूप को लेकर भी वास्तु शास्त्र में विशेष महत्व बताया गया है. घर में सामान्य रूप से बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की मूर्ति स्थापित करना शुभ माना जाता है. इसे वाममुखी गणेश कहा जाता है. ऐसी प्रतिमा की पूजा अपेक्षाकृत सरल मानी जाती है और सामान्य विधि-विधान से इसकी आराधना की जा सकती है. इसके विपरीत दाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की मूर्ति की पूजा में विशेष नियमों और अनुशासन का पालन आवश्यक माना जाता है. यही कारण है कि इस प्रकार की प्रतिमाएं अधिकतर मंदिरों में स्थापित की जाती हैं.

वास्तु मान्यताओं में गणेश जी की मूर्ति के रंग को भी विशेष महत्व दिया गया है. घर में सुख, शांति और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए सफेद रंग की गणेश प्रतिमा शुभ मानी जाती है. वहीं आर्थिक उन्नति, व्यापार में वृद्धि और परिवार की समृद्धि के लिए सिंदूरी रंग की गणेश प्रतिमा स्थापित करने की सलाह दी जाती है. हालांकि धार्मिक विद्वान यह भी कहते हैं कि श्रद्धा और भक्ति सबसे महत्वपूर्ण है तथा किसी भी पूजा का वास्तविक फल सच्ची आस्था से ही प्राप्त होता है.

कई लोगों के घरों में एक से अधिक गणेश प्रतिमाएं भी देखने को मिलती हैं. वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि घर में एक या दो गणेश प्रतिमाएं रखना उचित है, लेकिन अत्यधिक संख्या में प्रतिमाएं रखने से बचना चाहिए. विशेष रूप से तीन या उससे अधिक प्रतिमाओं को एक ही स्थान पर रखना वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता. यदि दो प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं तो उनका मुख आमने-सामने नहीं होना चाहिए.

धार्मिक मान्यताओं और वास्तु सिद्धांतों के अनुसार गणेश जी की मूर्ति केवल सजावट का साधन नहीं, बल्कि घर की आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है. इसलिए मूर्ति स्थापना के समय दिशा, स्थान, स्वरूप और पूजा व्यवस्था से जुड़े नियमों का ध्यान रखना आवश्यक बताया गया है. सही स्थान पर स्थापित गणेश जी की प्रतिमा परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है. यही कारण है कि वास्तु शास्त्र में गणेश मूर्ति स्थापना के नियमों को विशेष महत्व दिया गया है और लोगों को इनका पालन करने की सलाह दी जाती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-