श्वेता मेनन के इस्तीफे के बाद 17 सदस्यों ने छोड़ा संगठन, मलयालम फिल्म जगत में मची हलचल

श्वेता मेनन के इस्तीफे के बाद 17 सदस्यों ने छोड़ा संगठन, मलयालम फिल्म जगत में मची हलचल

प्रेषित समय :20:06:39 PM / Mon, Jun 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कोच्चि. मलयालम फिल्म उद्योग के सबसे प्रभावशाली कलाकार संगठन एएमएमए (एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स) में नेतृत्व संकट गहरा गया है. संगठन की अध्यक्ष श्वेता मेनन के इस्तीफे के बाद पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है. श्वेता मेनन के पद छोड़ने के कुछ ही समय बाद कार्यकारिणी समिति के सभी 17 सदस्यों ने भी इस्तीफा दे दिया, जिससे संगठन में अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है. इस घटनाक्रम ने मलयालम फिल्म जगत में व्यापक चर्चा और चिंता का माहौल बना दिया है.

रविवार को कोच्चि में आयोजित एएमएमए की वार्षिक आमसभा के दौरान संगठन के कामकाज, वित्तीय दस्तावेजों और आंतरिक विवादों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली. बैठक के दौरान कई सदस्यों ने वार्षिक रिपोर्ट और लेखा-जोखा को लेकर सवाल उठाए. कुछ सदस्यों का आरोप था कि संगठन के वित्तीय रिकॉर्ड पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं और कई महत्वपूर्ण जानकारियां सदस्यों के सामने प्रस्तुत नहीं की गईं. इसी मुद्दे को लेकर बैठक में कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई.

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब संगठन के एक वर्ग ने मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की पहल की. आरोप लगाया गया कि कार्यकारिणी समिति संगठन के दैनिक कामकाज को प्रभावी ढंग से संचालित करने और लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने में विफल रही है. बढ़ते विरोध और दबाव के बीच अध्यक्ष श्वेता मेनन ने अपना इस्तीफा घोषित कर दिया. उनके इस निर्णय के बाद पूरी कार्यकारिणी समिति ने भी सामूहिक रूप से पद छोड़ने का फैसला कर लिया.

इस्तीफे की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में श्वेता मेनन ने कहा कि उन्होंने केवल अध्यक्ष पद ही नहीं छोड़ा है, बल्कि संगठन की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के कुछ वित्तीय दस्तावेज इसलिए प्रस्तुत नहीं किए जा सके क्योंकि संबंधित अवधि के कोषाध्यक्ष उपलब्ध नहीं थे. उन्होंने दावा किया कि सितंबर के बाद से उनकी समिति द्वारा संचालित खातों में कोई अनियमितता नहीं है, लेकिन पिछली कार्यकारिणी से जुड़े कई मामलों का समाधान नहीं हो पाया था.

श्वेता मेनन ने यह भी आरोप लगाया कि संगठन को फिर से उन लोगों के हाथों में सौंपने की कोशिश की जा रही है, जिन पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं. उन्होंने कहा कि कुछ सदस्यों पर कार्यकारिणी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया गया था. उनके अनुसार यह पूरा घटनाक्रम संगठन के हित में नहीं बल्कि कुछ विशेष समूहों के हितों को ध्यान में रखकर संचालित किया गया.

पूर्व उपाध्यक्ष और अभिनेत्री लक्ष्मीप्रिया ने भी कार्यकारिणी का बचाव करते हुए कहा कि समिति पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह सही नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वित्तीय रिपोर्ट अधूरी रहने का कारण वर्तमान समिति नहीं बल्कि पूर्व प्रशासन द्वारा कुछ खातों को अंतिम रूप नहीं देना था. लक्ष्मीप्रिया ने कहा कि संगठन को स्थिरता और सहयोग की आवश्यकता थी, लेकिन कुछ लोगों ने टकराव का रास्ता चुना.

संकट को देखते हुए एएमएमए के संचालन के लिए एक नौ सदस्यीय अंतरिम समिति गठित की गई है. इस समिति का नेतृत्व अभिनेता और विधायक रमेश पिशारोडी को संयोजक के रूप में सौंपा गया है. अभिनेता और पूर्व मंत्री केबी गणेश कुमार तथा अभिनेता सुरेश कृष्णा सहित कई वरिष्ठ सदस्य इस समिति का हिस्सा बनाए गए हैं. यह अंतरिम समिति अगले चार महीनों तक संगठन के प्रशासनिक कार्यों को संभालेगी और नए चुनावों की प्रक्रिया तय करेगी.

घटनाक्रम के बाद मलयालम फिल्म जगत से मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. वरिष्ठ अभिनेत्री मल्लिका सुकुमारन ने कहा कि भले ही निवर्तमान कार्यकारिणी से कुछ गलतियां हुई हों, लेकिन संगठन को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो फिल्म उद्योग की वास्तविक समस्याओं को समझ सके और सदस्यों की चिंताओं का समाधान कर सके. बाद में उन्होंने भी श्वेता मेनन के समर्थन में संगठन की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.

अभिनेता जगदीश ने कहा कि आमसभा में श्वेता मेनन पर कोई व्यक्तिगत हमला नहीं किया गया था, लेकिन कई सदस्यों ने उनके कार्यकाल से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए थे. वहीं अभिनेता भीमन रेघु ने दावा किया कि अध्यक्ष के तौर पर श्वेता मेनन की कार्यशैली के कारण कई सदस्य संगठन से दूर हो गए थे.

दूसरी ओर अभिनेता बाबूराज ने कहा कि संगठन को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो सभी वर्गों की बात सुन सके और सामूहिक निर्णयों को महत्व दे. वहीं अभिनेता अनूप चंद्रन ने मौजूदा संकट को अनुभव की कमी का परिणाम बताते हुए कहा कि स्थिति को बिना कार्यकारिणी भंग किए भी संभाला जा सकता था.

सोमवार को संकट और गहरा गया जब मल्लिका सुकुमारन तथा लक्ष्मीप्रिया ने भी संगठन की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में मल्लिका सुकुमारन ने कहा कि वह सत्य और न्याय के पक्ष में खड़ी हैं और इसी कारण उन्होंने यह फैसला लिया है. लक्ष्मीप्रिया ने आरोप लगाया कि आमसभा में कुछ सदस्य पहले से तय एजेंडा लेकर पहुंचे थे और बैठक का माहौल जानबूझकर टकरावपूर्ण बनाया गया.

पिछले वर्ष अगस्त में हुए चुनावों में श्वेता मेनन और महासचिव कुकू परमेश्वरन के नेतृत्व वाली टीम को बड़ी उम्मीदों के साथ चुना गया था. पहली बार संगठन के शीर्ष पदों पर महिलाओं का नेतृत्व स्थापित हुआ था और इसे एएमएमए के इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना गया था. फिल्म जगत के कई लोगों को उम्मीद थी कि महिला नेतृत्व संगठन में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और नए दृष्टिकोण का संचार करेगा. हालांकि एक वर्ष के भीतर ही नेतृत्व संकट और सामूहिक इस्तीफों ने उन उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है.

केरल सरकार ने फिलहाल इस मामले को संगठन का आंतरिक विषय बताया है. राज्य के सांस्कृतिक मामलों और सिनेमा मंत्री पी.सी. विष्णुनाध ने कहा कि यह एएमएमए का आंतरिक मामला है और सरकार को इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि संगठन के सदस्य आपसी संवाद के माध्यम से समाधान निकालेंगे.

फिलहाल एएमएमए के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन में विश्वास बहाल करना, आंतरिक मतभेदों को दूर करना और नए नेतृत्व के चुनाव की प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से पूरा करना है. मलयालम फिल्म उद्योग की नजरें अब अंतरिम समिति पर टिकी हैं, जो आने वाले महीनों में संगठन की दिशा और भविष्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-