बेंगलुरु. कन्नड़ मनोरंजन जगत की चर्चित हस्तियां निवेदिता गौड़ा और किशन बिलागली एक नए विवाद में घिर गई हैं. दोनों के खिलाफ वन विभाग में शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सामाजिक मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और रीलों में असली मोर पंखों से बने परिधानों का उपयोग किया. शिकायत के बाद मामला वन्यजीव संरक्षण कानून के दायरे में पहुंच गया है और पूरे प्रकरण ने मनोरंजन जगत के साथ-साथ सामाजिक मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है.
जानकारी के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कल्लाहल्ली ने बेंगलुरु के काग्गलिपुरा वन क्षेत्र अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की जांच की मांग की है. शिकायत में कहा गया है कि वीडियो में दिखाई देने वाले परिधानों में बड़ी संख्या में मोर पंखों का उपयोग किया गया है, जिससे यह सवाल उठता है कि इतने पंख कहां से प्राप्त किए गए और क्या इसके लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति ली गई थी.
मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित प्रजातियों में शामिल है. कानून के अनुसार बिना अनुमति मोर के अंगों, पंखों अथवा उनसे निर्मित वस्तुओं के संग्रह, व्यापार या प्रदर्शन पर प्रतिबंध है. इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने मामले की विस्तृत जांच की मांग की है.
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सामाजिक मीडिया पर लाखों अनुयायियों वाले प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा इस प्रकार की सामग्री साझा किए जाने से समाज में गलत संदेश जा सकता है. शिकायतकर्ता का तर्क है कि इससे आम लोगों के बीच यह धारणा बन सकती है कि मोर पंखों का उपयोग करना सामान्य और स्वीकार्य है, जिससे भविष्य में अवैध शिकार या तस्करी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है.
वन विभाग से मांग की गई है कि वीडियो और तस्वीरों की तकनीकी जांच कराई जाए तथा वैज्ञानिक परीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि उपयोग किए गए पंख वास्तविक हैं या कृत्रिम. यदि जांच में पंख असली पाए जाते हैं तो संबंधित परिधान जब्त कर पूरे आपूर्ति तंत्र और उससे जुड़े लोगों की भी जांच की जाए.
इस विवाद ने कुछ वर्ष पहले सामने आए चर्चित बाघ नाखून प्रकरण की याद भी ताजा कर दी है. उस मामले में एक अन्य चर्चित हस्ती को बाघ के नाखून से बने लटकन पहनने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उस घटना ने पूरे राज्य में व्यापक चर्चा पैदा की थी और कई स्थानों पर जांच अभियान भी चलाए गए थे.
निवेदिता गौड़ा और किशन बिलागली दोनों ही लोकप्रिय रियलिटी शो के माध्यम से पहचान बना चुके हैं और सामाजिक मीडिया पर उनकी बड़ी लोकप्रियता है. ऐसे में शिकायत दर्ज होने के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया है. हालांकि अभी तक वन विभाग की ओर से किसी निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और जांच प्रारंभिक चरण में है.
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक परीक्षण और तथ्यों की पुष्टि आवश्यक है. दूसरी ओर, सामाजिक संगठनों का मानना है कि कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए. अब सभी की निगाहें वन विभाग की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

