बेंगलुरु. सिनेमा में अभिनेत्रियों की प्रस्तुति, ग्लैमर और अश्लीलता के बीच की बहस एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. हाल ही में फिल्म ‘पेड्डी’ को लेकर उठे विवाद के बाद अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा कि किसी कलाकार की गरिमा उसके कपड़ों से नहीं बल्कि प्रस्तुति के उद्देश्य, कहानी की आवश्यकता और व्यक्तिगत चयन से तय होती है. रागिनी का यह बयान ऐसे समय आया है जब फिल्म उद्योग में महिला किरदारों के चित्रण को लेकर लगातार बहस हो रही है.
फिल्म ‘पेड्डी’ में अभिनेत्री जाह्नवी कपूर के किरदार को कथित रूप से अत्यधिक ग्लैमरस और यौनिक रूप में प्रस्तुत किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. विरोध के बाद फिल्म निर्माताओं को कुछ दृश्यों में बदलाव कर दोबारा फिल्म जारी करनी पड़ी. इस पूरे घटनाक्रम ने मुख्यधारा के सिनेमा में महिला पात्रों की भूमिका और उनकी प्रस्तुति पर नए सिरे से चर्चा शुरू कर दी है.
इसी संदर्भ में अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी ने कहा कि किसी भी दृश्य या किरदार को केवल पहनावे के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए. उनके अनुसार ग्लैमर और अश्लीलता के बीच बहुत बारीक अंतर होता है. उन्होंने कहा कि कोई अभिनेत्री बिकिनी पहनकर भी गरिमापूर्ण और प्रभावशाली दिख सकती है, जबकि पूरी तरह ढके हुए कपड़ों में भी किसी किरदार को संवेदनशील या आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है. इसलिए बहस का केंद्र केवल कपड़े नहीं बल्कि प्रस्तुति का उद्देश्य होना चाहिए.
रागिनी ने अपने लंबे फिल्मी करियर का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उन्होंने अभिनय की शुरुआत की थी, तब कलाकारों को अक्सर दो वर्गों में बांट दिया जाता था. एक ओर ग्लैमर प्रधान अभिनेत्रियां होती थीं और दूसरी ओर अभिनय क्षमता के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्रियां. उन्होंने कहा कि उन्होंने भी अपने करियर में कई बार ग्लैमरस भूमिकाएं निभाई हैं, लेकिन हमेशा यह समझा कि सीमाएं कहां निर्धारित करनी हैं. उनके अनुसार हर कलाकार को यह निर्णय स्वयं लेना होता है कि वह किस प्रकार की भूमिका स्वीकार करना चाहता है.
अभिनेत्री ने कहा कि वर्तमान समय का दर्शक पहले की तुलना में अधिक जागरूक और सजग हो गया है. अब दर्शक केवल दृश्य नहीं देखते बल्कि यह भी सवाल करते हैं कि किसी दृश्य या प्रस्तुति की कहानी में क्या आवश्यकता है. यदि कोई दृश्य कथानक को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है तो दर्शक उसे स्वीकार करते हैं, लेकिन यदि वह केवल ध्यान आकर्षित करने के लिए जोड़ा गया हो तो उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
रागिनी द्विवेदी ने फिल्म उद्योग में काम करने वाली अभिनेत्रियों की स्वतंत्रता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि आज कलाकारों के पास पहले की तुलना में अधिक विकल्प और अधिकार हैं. उनके अनुसार “नहीं” कहना किसी भी कलाकार का सबसे बड़ा अधिकार है. यदि कोई कलाकार किसी दृश्य या विषय को लेकर सहज नहीं है तो उसे मना करने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना पर काम शुरू होने से पहले इन मुद्दों पर स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए ताकि बाद में किसी प्रकार का विवाद न हो.
उन्होंने यह भी माना कि ओटीटी मंचों, सामाजिक मीडिया और स्वतंत्र सिनेमा के विस्तार ने कलाकारों को नई संभावनाएं प्रदान की हैं. अब कलाकार केवल बड़े व्यावसायिक सिनेमा पर निर्भर नहीं हैं और अपनी पसंद के अनुसार विषय तथा भूमिकाएं चुन सकते हैं. यही कारण है कि आज महिला कलाकार पहले की अपेक्षा अधिक आत्मविश्वास और स्वतंत्रता के साथ अपने निर्णय ले रही हैं.
इन विचारों के बीच रागिनी द्विवेदी ने अपनी नई फिल्म ‘आर2’ की भी घोषणा की है, जो उनकी चर्चित फिल्म ‘रागिनी आईपीएस’ का सीक्वल होगी. इस फिल्म के माध्यम से वह निर्माता के रूप में भी नई पारी शुरू कर रही हैं. उन्होंने कहा कि दक्षिण भारतीय सिनेमा में नायक केंद्रित फ्रेंचाइजी फिल्मों के अनेक उदाहरण हैं, लेकिन महिला केंद्रित फ्रेंचाइजी अभी भी बहुत कम हैं. उनका मानना है कि उद्योग को ऐसी फिल्मों की आवश्यकता है, जिनमें महिला पात्र कहानी का नेतृत्व करें.
रागिनी ने कहा कि ‘रागिनी आईपीएस’ उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक रही है और अब ‘आर2’ के माध्यम से वह उसकी विरासत को आगे बढ़ाना चाहती हैं. अभिनेत्री के इस बयान ने एक बार फिर सिनेमा में महिलाओं की भूमिका, उनकी स्वतंत्रता और ग्लैमर की बदलती परिभाषा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

