* प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)
* निर्जला एकादशी - 25 जून 2026, बृहस्पतिवार
* पारण का समय - 05:48 एएम से 08:31 एएम, 26 जून 2026
* पारण के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 10:22 पीएम
* एकादशी तिथि प्रारम्भ - 24 जून 2026 को 06:12 पीएम बजे
* एकादशी तिथि समाप्त - 25 जून 2026 को 08:09 पीएम बजे
प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशी होती हैं, जिनमें प्रत्येक का विशेष महत्व है. एकादशी भगवान श्रीविष्णु की पूजा का विशेष अवसर है. यदि वर्ष की चौबीस एकादशी का व्रत संभव नहीं हो तो केवल निर्जला एकादशी के एक व्रत से चौबीस एकादशी का पुण्य प्राप्त हो सकता है.
निर्जला एकादशी सभी एकादशी में सबसे कठिन तपस्या मानी जाती है क्योंकि निर्जला एकादशी में बिना कुछ खाएपिएं पूरे दिन का व्रत/उपवास रखा जाता है. निर्जला एकादशी व्रत को करने से जाने/अनजाने, जो व्रत संकल्प के बावजूद करने से रह गए हैं उनके बंधन से मुक्ति मिलती है. इसीलिए सौ व्रतों का एक व्रत कहलाता है निर्जला एकादशी व्रत!
* दिन का चौघड़िया
शुभ - 05:47 से 07:29
रोग - 07:29 से 09:11
उद्वेग - 09:11 से 10:53
चर - 10:53 से 12:35
लाभ - 12:35 से 02:17
अमृत - 02:17 से 03:59
काल - 03:59 से 05:41
शुभ - 05:41 से 07:22
* रात्रि का चौघड़िया
अमृत - 07:22 से 08:41
चर - 08:41 से 09:59
रोग - 09:59 से 11:17
काल - 11:17 से 12:35
लाभ - 12:35 से 01:53
उद्वेग - 01:53 से 03:11
शुभ - 03:11 से 04:29
अमृत - 04:29 से 05:48
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

