देवशयनी एकादशी से थम जाएंगे विवाह एक महीने में निपटाने होंगे सभी मांगलिक कार्य

देवशयनी एकादशी से थम जाएंगे विवाह एक महीने में निपटाने होंगे सभी मांगलिक कार्य

प्रेषित समय :19:45:11 PM / Thu, Jun 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

विवाह और अन्य शुभ मांगलिक कार्यों की तैयारी कर रहे परिवारों के लिए अब समय तेजी से निकलता जा रहा है. देवशयनी एकादशी से पहले शुभ कार्यों के लिए केवल लगभग एक महीने का समय शेष है. 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का आरंभ हो जाएगा और इसके बाद अगले चार महीनों तक विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, मुंडन सहित अधिकांश मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, इसलिए शुभ कार्यों का आयोजन नहीं किया जाता. अब विवाह योग्य परिवारों के सामने उपलब्ध सीमित शुभ मुहूर्तों का ही सहारा है.

धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार इस बार चातुर्मास शुरू होने से पहले विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए कुल 17 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं. इनमें बड़ी संख्या में विवाह समारोह, गृह प्रवेश और अन्य पारिवारिक संस्कार संपन्न किए जाएंगे. 25 जुलाई के बाद देव प्रबोधिनी एकादशी, जो इस वर्ष 20 नवंबर को पड़ेगी, उसी दिन से दोबारा विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होगा.

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस वर्ष शुभ मुहूर्त सामान्य वर्षों की तुलना में कम रहे हैं. इसका प्रमुख कारण ज्येष्ठ अधिकमास रहा, जिसके चलते विवाह सहित अनेक मांगलिक कार्यों के लिए उपलब्ध तिथियां सीमित हो गईं. अब पुरुषोत्तम मास समाप्त होने के बाद देवशयनी एकादशी तक का समय ही शुभ कार्यों के लिए अंतिम अवसर माना जा रहा है. यही कारण है कि विवाह स्थल, मैरिज गार्डन, होटल, कैटरिंग, बैंड-बाजा और सजावट से जुड़े कारोबारियों के यहां इन दिनों बुकिंग का दबाव तेजी से बढ़ रहा है.

धार्मिक पंचांग के अनुसार 19 जून से 29 जून तक ज्येष्ठ पूर्णिमा तक लगातार शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं. इसके बाद आषाढ़ मास का आरंभ होगा. आषाढ़ मास धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस माह में जहां एक ओर मांगलिक कार्यों के लिए सीमित अवसर बचेंगे, वहीं दूसरी ओर अनेक प्रमुख व्रत, पर्व और धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो जाएंगे. इसके साथ ही श्रद्धालुओं का ध्यान विवाह समारोहों से हटकर पूजा, उपासना और धार्मिक आयोजनों की ओर केंद्रित होने लगेगा.

आषाढ़ मास का एक प्रमुख धार्मिक आयोजन गुप्त नवरात्र भी है. इस वर्ष 15 जुलाई को विशेष बुध पुष्य नक्षत्र के शुभ संयोग में गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा. तांत्रिक साधना, देवी उपासना और विशेष अनुष्ठानों की दृष्टि से गुप्त नवरात्र का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुष्य नक्षत्र में प्रारंभ होने वाली गुप्त नवरात्र साधकों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है. इसकी पूर्णाहुति भड्डाली नवमी पर होगी.

धर्माचार्यों का कहना है कि देवशयनी एकादशी से पहले आने वाला अंतिम शुभ मुहूर्त विशेष महत्व रखता है. इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है. इस दिन विवाह या अन्य मांगलिक कार्यों के लिए अलग से शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती. ऐसी मान्यता है कि इस तिथि पर किए गए सभी शुभ कार्य स्वयं सिद्ध और मंगलकारी माने जाते हैं. इसी कारण अनेक परिवार अंतिम अवसर का लाभ उठाते हुए इस अवधि में विवाह और अन्य संस्कार संपन्न कराने की योजना बनाते हैं.

चातुर्मास केवल मांगलिक कार्यों पर विराम का समय नहीं होता, बल्कि यह धार्मिक साधना, व्रत, संयम और आध्यात्मिक जीवन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इन चार महीनों में संत-महात्मा एक स्थान पर निवास कर प्रवचन, भागवत कथा, रामायण पाठ, सत्संग और धर्मोपदेश जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं. श्रद्धालु भी इस अवधि में विशेष व्रत, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के माध्यम से आध्यात्मिक साधना में सहभागी बनते हैं.

आषाढ़ मास की पूर्णिमा 29 जुलाई को गुरुपूर्णिमा के रूप में मनाई जाएगी. इसे व्यास पूर्णिमा और कई स्थानों पर भैरव पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस अवसर पर गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत गुरुओं का पूजन किया जाता है. गुरुकुलों, आश्रमों और धार्मिक संस्थानों में गुरु पादुका पूजन, सम्मान समारोह और आध्यात्मिक प्रवचन आयोजित किए जाएंगे. मालवा अंचल की लोक परंपरा में इस दिन कुल परंपरा के अनुसार भैरव पूजा का भी विशेष विधान है.

धार्मिक जानकारों का कहना है कि चातुर्मास भारतीय संस्कृति में आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का पर्व माना जाता है. इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य स्थगित रहते हैं, जबकि पूजा-पाठ, कथा, जप, तप, दान और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व बढ़ जाता है. इसलिए जिन परिवारों ने विवाह या अन्य मांगलिक कार्यक्रमों की योजना बनाई है, उनके लिए देवशयनी एकादशी से पहले उपलब्ध शुभ मुहूर्तों का उपयोग करना ही एकमात्र विकल्प है.

अब जैसे-जैसे 25 जुलाई निकट आ रही है, विवाह समारोहों की तैयारियां तेज हो गई हैं. बाजारों में खरीदारी बढ़ रही है, मैरिज गार्डन और बैंक्वेट हॉल लगभग बुक हो चुके हैं तथा विवाह से जुड़े कारोबार में भी तेजी दिखाई दे रही है. धार्मिक दृष्टि से यह समय शुभ कार्यों का अंतिम चरण माना जा रहा है. इसके बाद चार महीने तक धार्मिक परंपराओं के अनुसार मांगलिक आयोजनों पर विराम रहेगा और देव प्रबोधिनी एकादशी के साथ नवंबर में एक बार फिर शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-