ग्वालियर में उठी समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग, प्रबुद्धजनों ने कहा सभी तक पहुंचे कानून की जानकारी

ग्वालियर में उठी समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग, प्रबुद्धजनों ने कहा सभी तक पहुंचे कानून की जानकारी

प्रेषित समय :18:56:12 PM / Thu, Jun 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर ग्वालियर में आयोजित एक विचार-विमर्श कार्यक्रम में प्रबुद्धजनों ने एक स्वर में इसे समान अधिकार और सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. वक्ताओं का कहना था कि यूसीसी केवल एक कानूनी व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों के बीच समानता, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करने की पहल है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि प्रस्तावित कानून की जानकारी शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव-गांव और समाज के अंतिम व्यक्ति तक इसके प्रारूप और उद्देश्य को पहुंचाया जाए, ताकि लोग तथ्यों के आधार पर अपनी राय बना सकें.

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक अधिकारों की व्यवस्था सुनिश्चित करना है. उनका मत था कि व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद विभिन्न प्रावधानों के कारण कई बार समानता का सिद्धांत प्रभावित होता है. ऐसे में एक समान कानून सामाजिक समरसता और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो सकता है.

चर्चा के दौरान महिलाओं और बच्चों के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया. प्रबुद्धजनों का कहना था कि किसी भी आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं और बच्चों को समान कानूनी संरक्षण मिलना आवश्यक है. उनका मत था कि यदि समान नागरिक संहिता लागू होती है तो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े मामलों में समानता और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा.

वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि यूसीसी को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां और अधूरी जानकारियां मौजूद हैं. इसलिए सरकार को जनजागरूकता अभियान चलाकर इसके प्रावधानों, उद्देश्यों और संभावित प्रभावों की विस्तृत जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचानी चाहिए. उनका कहना था कि किसी भी बड़े कानूनी सुधार की सफलता तभी संभव है, जब समाज उसके बारे में सही जानकारी रखे और उसमें सक्रिय भागीदारी करे.

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि संविधान समानता और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है. समान नागरिक संहिता की अवधारणा भी इन्हीं संवैधानिक मूल्यों से प्रेरित है. वक्ताओं ने कहा कि यदि सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू होता है तो इससे न्याय व्यवस्था अधिक सरल और प्रभावी बन सकती है तथा विभिन्न समुदायों के बीच समान अधिकारों की भावना और मजबूत होगी.

प्रबुद्धजनों ने सरकार से अपील की कि यूसीसी के मसौदे और उसके प्रावधानों को व्यापक जनसंवाद का हिस्सा बनाया जाए. ग्रामीण क्षेत्रों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों के बीच संवाद स्थापित कर लोगों की शंकाओं का समाधान किया जाए, ताकि कानून को लेकर किसी प्रकार का भ्रम न रहे.

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि समान नागरिक संहिता पर व्यापक चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन अंतिम उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय उपलब्ध कराना होना चाहिए. उनका मानना था कि यदि कानून को पारदर्शिता, संवाद और व्यापक जनभागीदारी के साथ लागू किया जाता है तो यह सामाजिक समानता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.