12 साल पुराने आदेश की अनदेखी पर हाई कोर्ट सख्त, कलेक्टर का आदेश रद्द कर लगाया 25 हजार का व्यक्तिगत जुर्माना

12 साल पुराने आदेश की अनदेखी पर हाई कोर्ट सख्त, कलेक्टर का आदेश रद्द कर लगाया 25 हजार का व्यक्तिगत जुर्माना

प्रेषित समय :18:53:21 PM / Thu, Jun 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राजस्व मंडल के 12 वर्ष पुराने आदेश के पालन में लगातार हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित कलेक्टर द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर दिया है. न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि जब किसी सक्षम न्यायालय द्वारा राजस्व मंडल के आदेश पर कोई स्थगन नहीं दिया गया है, तब उसके क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब करना कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता. अदालत ने संबंधित अधिकारी पर 25 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना भी लगाया और चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है.

मामला एडवेंचर वाइल्डलाइफ रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता निखिल तिवारी ने अदालत को बताया कि राजस्व मंडल ने 20 मई 2014 को आदेश पारित किया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उसका पालन नहीं किया गया. इस पर पूर्व में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने 7 जुलाई 2025 को संबंधित अधिकारियों को 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे.

याचिकाकर्ता का आरोप था कि हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आदेश का पालन करने के बजाय कलेक्टर ने 27 फरवरी 2026 को एक नया आदेश जारी कर यह स्पष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी कि कहीं इस मामले में कोई अपील अथवा अन्य न्यायिक कार्यवाही लंबित तो नहीं है. याचिकाकर्ता ने इसे केवल आदेश के पालन में अनावश्यक विलंब करने का प्रयास बताते हुए चुनौती दी.

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि राजस्व मंडल के वर्ष 2014 के आदेश पर किसी भी सक्षम न्यायालय से कोई स्थगन आदेश प्रभावी नहीं है. इसके बावजूद आदेश का क्रियान्वयन टालना न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना के समान है. अदालत ने कहा कि जब कोई आदेश विधिक रूप से प्रभावी है और उस पर रोक नहीं है, तब प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक प्रक्रियाएं अपनाकर उसके पालन में देरी नहीं की जा सकती.

एकलपीठ ने कलेक्टर द्वारा 27 फरवरी 2026 को पारित आदेश को अवैध घोषित करते हुए निरस्त कर दिया. साथ ही राजस्व मंडल के 20 मई 2014 के आदेश तथा नायब तहसीलदार द्वारा 6 फरवरी 2026 को पारित आदेश का सात दिनों के भीतर पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

अदालत ने मामले में संबंधित अधिकारी पर 25 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना भी लगाया. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित पक्ष अवमानना याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र होगा और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जा सकती है.

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश प्रशासनिक अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण संदेश है कि न्यायालय और राजस्व मंडल जैसे सक्षम प्राधिकरणों के अंतिम आदेशों का समयबद्ध पालन करना उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है. यदि किसी आदेश पर न्यायालय की ओर से कोई स्थगन नहीं है, तो केवल प्रशासनिक स्तर पर संदेह या अतिरिक्त औपचारिकताओं के आधार पर उसके क्रियान्वयन को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता.

हाई कोर्ट का यह फैसला प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक आदेशों के सम्मान को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है. इससे स्पष्ट संकेत गया है कि वर्षों पुराने आदेशों को लंबित रखने या उनके पालन में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों के प्रति न्यायालय अब सख्त रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-