चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित वीडियो विवाद ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है. हाल ही में आम आदमी पार्टी से अलग हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, उनके इस्तीफे की मांग करने और कथित फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है. वहीं आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी है और मुख्यमंत्री की छवि खराब करने के लिए सुनियोजित साजिश रची गई है. दूसरी ओर गुरुग्राम पुलिस की जांच ने इस पूरे विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया है.
राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को कथित वीडियो विवाद से बचाने के लिए फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराई गई. उनका दावा है कि इस मामले से सिख समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच आवश्यक है. उन्होंने कहा कि यदि किसी फॉरेंसिक रिपोर्ट को कथित रूप से प्रभावित किया गया है तो इसकी जांच होनी चाहिए कि इसमें किन अधिकारियों की भूमिका रही, किस स्तर पर यह रिपोर्ट तैयार कराई गई और क्या इसमें सरकारी संसाधनों या धन का दुरुपयोग हुआ. उन्होंने यह भी मांग की कि पंजाब के नए धार्मिक अपमान विरोधी कानून के तहत मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की जाए और इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की जाए.
राघव चड्ढा के आरोप ऐसे समय सामने आए हैं जब गुरुग्राम पुलिस कथित फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट के मामले की जांच कर रही है. पुलिस ने इस संबंध में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है. जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों पर कथित तौर पर फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराने और उसके लिए धन लेने के आरोप हैं. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिनके आधार पर पंजाब पुलिस के कुछ अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है. हालांकि इस मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है.
गुरुग्राम पुलिस का यह भी दावा है कि उसे कुछ सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, जिनमें कथित रूप से पंजाब पुलिस के अधिकारियों की गतिविधियां दर्ज हैं. पुलिस का कहना है कि यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि अभी तक किसी अधिकारी के खिलाफ औपचारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं और जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर रही हैं.
उधर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी है और यह उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल मिलकर उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं और उनके हावभाव तथा व्यक्तित्व से भी उसका कोई मेल नहीं है.
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि फॉरेंसिक जांच में वीडियो के 1,191 फ्रेम की जांच की गई और विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अब उन्हीं फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं पर दबाव बनाकर उनसे बयान दिलवाए जा रहे हैं कि रिपोर्ट कथित रूप से धन लेकर तैयार की गई थी. मुख्यमंत्री का कहना है कि विरोधी दल धर्म के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और जनता सच्चाई को समझती है.
आम आदमी पार्टी ने भी मुख्यमंत्री के समर्थन में कहा है कि वायरल वीडियो कृत्रिम तरीके से तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना है. पार्टी का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा. पार्टी ने विपक्ष पर धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.
इस पूरे विवाद के बीच धार्मिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. विवाद के शुरुआती चरण में अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया था. बाद में सिख समुदाय के सदस्यों से मुख्यमंत्री के सामाजिक बहिष्कार का भी आह्वान किया गया था. इस घटनाक्रम ने मामले को केवल राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे धार्मिक और सामाजिक विमर्श का विषय भी बना दिया.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद पंजाब की राजनीति में आने वाले समय में बड़ा मुद्दा बन सकता है. एक ओर विपक्ष मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बता रही है. ऐसे में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
फिलहाल इस विवाद में कई दावे और प्रतिदावे सामने हैं. एक पक्ष कथित फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट और मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश बता रहा है. गुरुग्राम पुलिस की जांच जारी है और अभी किसी भी आरोप पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है. ऐसे में इस पूरे मामले का कानूनी और राजनीतिक परिणाम आने वाली जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा. तब तक पंजाब की राजनीति में यह विवाद चर्चा के केंद्र में बना रहने की संभावना है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

