मुंबई. डीसी यूनिवर्स की बहुप्रतीक्षित सुपरहीरो फिल्म 'सुपरगर्ल' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. फिल्म में अभिनेत्री मिली एलकॉक पहली बार सुपरगर्ल के किरदार में नजर आई हैं और अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचने में सफल भी रही हैं. हालांकि, दमदार अभिनय के बावजूद फिल्म कमजोर पटकथा, साधारण खलनायक और प्रभावहीन एक्शन दृश्यों के कारण अपेक्षित ऊंचाई हासिल नहीं कर पाती. समीक्षकों ने फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार देते हुए इसे मनोरंजक तो बताया है, लेकिन भावनात्मक गहराई और मजबूत कहानी के अभाव को इसकी सबसे बड़ी कमजोरी माना है.
फिल्म की कहानी सुपरमैन की चचेरी बहन कारा जोर-एल यानी सुपरगर्ल के इर्द-गिर्द घूमती है. अपने 23वें जन्मदिन से पहले कारा अपने पालतू कुत्ते क्रिप्टो के साथ अंतरिक्ष की यात्रा करती है. इसी दौरान उसकी मुलाकात रूथी मैरी नॉल नाम की एक किशोरी से होती है, जो अपने परिवार की हत्या का बदला लेना चाहती है. शुरुआत में अनिच्छुक रहने वाली सुपरगर्ल तब इस मिशन का हिस्सा बनती है, जब अंतरिक्ष लुटेरों का सरगना क्रेम उसके प्रिय साथी क्रिप्टो को गंभीर रूप से घायल कर देता है. इसके बाद कहानी बदले, न्याय और क्रिप्टो को बचाने की दौड़ में आगे बढ़ती है.
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत मिली एलकॉक का अभिनय माना गया है. उन्होंने सुपरगर्ल के किरदार में संवेदनशीलता, आत्मविश्वास, दर्द और साहस का प्रभावी मिश्रण प्रस्तुत किया है. दर्शकों को उनके और क्रिप्टो के बीच का भावनात्मक रिश्ता भी पसंद आ सकता है. रूथी की भूमिका निभाने वाली ईव रिडली ने भी अपने अभिनय से कहानी को संतुलन देने का प्रयास किया है. वहीं छायांकन की भी सराहना की गई है. विभिन्न ग्रहों और लाल, पीले तथा हरे सूर्यों की रोशनी के बीच रचे गए दृश्य फिल्म को आकर्षक दृश्यात्मक अनुभव प्रदान करते हैं.
इसके बावजूद फिल्म अपनी मूल कहानी और पटकथा के स्तर पर कमजोर साबित होती है. कहानी में कई मोड़ पहले से अनुमानित लगते हैं और घटनाक्रम में कोई विशेष रोमांच महसूस नहीं होता. सुपरगर्ल जैसी शक्तिशाली नायिका होने के बावजूद फिल्म उसके संघर्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पाती. कई एक्शन दृश्य भ्रमित करने वाले हैं और उनमें वह रोमांच नहीं है, जिसकी उम्मीद सुपरहीरो फिल्मों से की जाती है.
फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष इसका खलनायक क्रेम है. अभिनेता मैथियास शोएनार्ट्स के पास अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सीमित अवसर हैं. उनका किरदार पारंपरिक और एकरूपी महसूस होता है, जिससे नायक और खलनायक के बीच टकराव का प्रभाव कमजोर पड़ जाता है. मजबूत विरोधी पात्र के अभाव में पूरी कहानी का दांव भी हल्का प्रतीत होता है.
फिल्म में अभिनेता जेसन मोमोआ की मौजूदगी भी अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाती. उनकी लोकप्रिय छवि और करिश्माई व्यक्तित्व के बावजूद उनका किरदार दर्शकों पर विशेष असर नहीं डालता. समीक्षकों का मानना है कि उनके जैसे कलाकार का बेहतर उपयोग किया जा सकता था.
कुल मिलाकर 'सुपरगर्ल' एक ऐसी फिल्म है, जो अपनी मुख्य अभिनेत्री मिली एलकॉक के प्रभावशाली अभिनय और कुछ मनोरंजक क्षणों के कारण देखने योग्य बनती है, लेकिन कमजोर लेखन, फीकी कहानी, साधारण खलनायक और असंतोषजनक एक्शन इसे यादगार सुपरहीरो फिल्म बनने से रोक देते हैं. डीसी यूनिवर्स के प्रशंसकों को इसमें कुछ आकर्षण जरूर मिल सकता है, लेकिन जो दर्शक दमदार कहानी और रोमांचक सुपरहीरो अनुभव की उम्मीद लेकर सिनेमाघर जाएंगे, उन्हें यह फिल्म पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाएगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

