इलाज में लापरवाही पर हाई कोर्ट सख्त, बंदी को एक जुलाई से पहले एम्स भोपाल भेजने के आदेश

इलाज में लापरवाही पर हाई कोर्ट सख्त, बंदी को एक जुलाई से पहले एम्स भोपाल भेजने के आदेश

प्रेषित समय :16:34:38 PM / Fri, Jun 26th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक प्रकरण में निरुद्ध जबलपुर निवासी एक बंदी के मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण में कथित लापरवाही को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल जेल प्रशासन के प्रति कड़ा रुख अपनाया है. न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित बंदी को हर हाल में एक जुलाई 2026 से पहले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल ले जाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परीक्षण कराया जाए. साथ ही इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं. मामले की अगली सुनवाई सात जुलाई को निर्धारित की गई है.

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी बंदी के उपचार में सुरक्षा व्यवस्था या पुलिस बल की कमी को आधार बनाकर देरी नहीं की जा सकती. अदालत ने स्पष्ट किया कि बंदी को समय पर उचित चिकित्सा उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.

सुनवाई के दौरान बंदी की ओर से अधिवक्ता मनोज चतुर्वेदी ने पक्ष रखते हुए न्यायालय को बताया कि उनके मुवक्किल की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है. पूर्व में हाई कोर्ट के निर्देश पर उसे एम्स भोपाल ले जाया गया था, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विस्तृत परीक्षण के बाद पुनः जांच के लिए बुलाया था. इसके बावजूद जेल प्रशासन ने पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए दोबारा अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया पूरी नहीं की, जिससे आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण समय पर नहीं हो सका.

इस पर न्यायालय ने जेल प्रशासन के रवैये को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया कि आवश्यक पुलिस बल की तत्काल व्यवस्था की जाए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर बंदी का विशेषज्ञ चिकित्सकों से परीक्षण सुनिश्चित कराया जाए. अदालत ने कहा कि प्रशासनिक कारणों से किसी व्यक्ति के उपचार में विलंब होना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता.

मामले में बंदी ने अपने खराब स्वास्थ्य और समुचित उपचार नहीं मिलने का हवाला देते हुए जमानत की अपील भी दायर की है. न्यायालय फिलहाल उसके स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं को प्राथमिकता देते हुए पहले चिकित्सकीय परीक्षण की प्रक्रिया पूरी कराने पर जोर दे रहा है, ताकि विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुनवाई की जा सके.

सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से अधिवक्ता आशीष मिश्रा ने पक्ष रखा. अदालत ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि एक जुलाई तक एम्स भोपाल में चिकित्सकीय परीक्षण कराकर उसकी अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए. हाई कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि यदि न्यायालय के आदेशों के पालन में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है. फिलहाल पूरे मामले पर अगली सुनवाई सात जुलाई 2026 को होगी, जहां अनुपालन रिपोर्ट और चिकित्सकीय परीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-