नई दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर के दाम कम नहीं किए जाने से होटल और रेस्तरां उद्योग में नाराजगी बढ़ गई है. कर्नाटक स्टेट होटल्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से तत्काल व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती करने की मांग की है. संगठन का कहना है कि कुछ ही महीनों में व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत लगभग दोगुनी हो चुकी है, जिससे होटल व्यवसाय पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है. यदि जल्द राहत नहीं मिली तो इसका सीधा असर भोजन की कीमतों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है.
एसोसिएशन के अध्यक्ष जी. के. शेट्टी ने जारी बयान में बताया कि फरवरी महीने में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत करीब 1800 रुपये थी. वितरकों द्वारा मिलने वाली छूट के बाद होटल संचालकों को यह सिलेंडर लगभग 1650 से 1700 रुपये में उपलब्ध हो जाता था. लेकिन पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक गैस आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई, जिसके कारण व्यावसायिक एलपीजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई.
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में होटल और रेस्तरां संचालकों को एक व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर के लिए 3198 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं. कुछ ही महीनों में कीमतों में आई यह वृद्धि होटल उद्योग के लिए गंभीर चुनौती बन गई है. गैस होटल व्यवसाय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में शामिल है और इसकी लागत बढ़ने से संचालन खर्च भी तेजी से बढ़ा है.
एसोसिएशन का कहना है कि अब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें फिर से लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई हैं, जो फरवरी के आसपास के स्तर के बराबर हैं. ऐसे में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर के दाम भी उसी अनुपात में घटाए जाने चाहिए. संगठन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि जुलाई से व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों को फरवरी के स्तर तक लाया जाए, ताकि होटल उद्योग को राहत मिल सके और ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े.
दरअसल, पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ा था. विशेष रूप से ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित हुई. यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का निर्यात भी इसी मार्ग से होता है और भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आयात करता है.
युद्ध के दौरान इस मार्ग पर अनिश्चितता बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया. इसके साथ ही समुद्री बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ गई, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा. भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों को भी इसका प्रभाव झेलना पड़ा. इसी कारण व्यावसायिक एलपीजी सहित कई ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हुई.
हालांकि अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है. समझौते के सार्वजनिक होने के बाद यह संभावना बढ़ी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सकेगी. यदि ऐसा होता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता लौटेगी और कच्चे तेल के साथ गैस की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है.
सूत्रों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट सकता है. इससे भारत जैसे देशों को राहत मिलने की संभावना है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और एलपीजी आयात करता है. यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो घरेलू बाजार में भी व्यावसायिक गैस की कीमतों में कमी की संभावना मजबूत होगी.
युद्ध के दौरान भारत सरकार ने घरेलू ईंधन आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए कई एहतियाती कदम उठाए थे. व्यावसायिक एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई और विभिन्न क्षेत्रों में वितरण पर विशेष निगरानी रखी गई. अब जब अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार के संकेत मिल रहे हैं तो होटल उद्योग का कहना है कि सरकार को भी बाजार की बदली परिस्थितियों के अनुरूप मूल्य निर्धारण की समीक्षा करनी चाहिए.
होटल और रेस्तरां संचालकों का कहना है कि यदि गैस की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो उन्हें भोजन की कीमतों में बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. इसका सीधा असर आम ग्राहकों पर पड़ेगा. उद्योग का मानना है कि व्यावसायिक एलपीजी के दाम कम होने से न केवल होटल कारोबार को राहत मिलेगी, बल्कि महंगाई पर नियंत्रण रखने में भी सहायता मिलेगी. अब होटल उद्योग की निगाहें केंद्र सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि जुलाई में व्यावसायिक गैस उपभोक्ताओं को राहत मिलती है या नहीं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

