जीपीटी 5.6 मॉडल की सीमित शुरुआत, अमेरिकी सरकार के अनुरोध पर ओपनएआई ने भरोसेमंद साझेदारों तक रखा दायरा

जीपीटी 5.6 मॉडल की सीमित शुरुआत, अमेरिकी सरकार के अनुरोध पर ओपनएआई ने भरोसेमंद साझेदारों तक रखा दायरा

प्रेषित समय :21:22:22 PM / Sun, Jun 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी ओपनएआई ने अपने नए जीपीटी 5.6 मॉडल श्रृंखला को सीमित स्तर पर जारी करने का फैसला किया है. कंपनी ने बताया कि फिलहाल सोल, टेरा और लूना नामक नए मॉडल केवल चुनिंदा भरोसेमंद साझेदारों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं. यह निर्णय अमेरिकी सरकार के अनुरोध के बाद लिया गया है, ताकि उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडलों के मूल्यांकन के लिए व्यापक नियामकीय ढांचा तैयार किया जा सके. कंपनी का कहना है कि आने वाले कुछ सप्ताह में इन मॉडलों को चरणबद्ध तरीके से चैटजीपीटी, एपीआई और कोडेक्स मंचों पर व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा.

ओपनएआई के अनुसार जीपीटी 5.6 श्रृंखला में तर्क क्षमता, प्रोग्रामिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यों में उल्लेखनीय सुधार किए गए हैं. कंपनी ने इन मॉडलों को सार्वजनिक रूप से जारी करने से पहले अमेरिकी सरकार को उनकी क्षमताओं की जानकारी दी थी. इसके बाद सरकार ने हाल ही में जारी साइबर सुरक्षा संबंधी कार्यकारी आदेश के तहत उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडलों के परीक्षण और मूल्यांकन की रूपरेखा तैयार होने तक सीमित पूर्वावलोकन की सलाह दी. ओपनएआई ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए फिलहाल केवल चुनिंदा साझेदारों को इन मॉडलों तक पहुंच प्रदान की है.

हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह नहीं चाहती कि भविष्य में हर उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल के लिए सरकारी पूर्वावलोकन की अनिवार्यता स्थायी व्यवस्था बन जाए. ओपनएआई का कहना है कि सुरक्षा और नवाचार के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि नई तकनीकों का विकास भी प्रभावित न हो और जिम्मेदार उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सके.

कंपनी ने अपने नए मॉडलों की विशेषताओं की भी जानकारी दी है. सोल को सबसे शक्तिशाली मॉडल बताया गया है, जिसे जटिल वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च स्तरीय विश्लेषण और कठिन प्रोग्रामिंग कार्यों के लिए तैयार किया गया है. इसमें अधिक समय लेकर जटिल समस्याओं पर गहन विचार करने की क्षमता जोड़ी गई है. इसके साथ ही इसमें एक विशेष प्रणाली भी दी गई है, जिसमें कई विशिष्ट उप-प्रणालियां मिलकर जटिल कार्यों को पूरा करती हैं. इससे शोध, कोडिंग और बहु-स्तरीय विश्लेषण जैसे कार्यों में बेहतर परिणाम मिलने का दावा किया गया है.

वहीं टेरा को व्यावसायिक संस्थानों और सॉफ्टवेयर डेवलपरों के लिए संतुलित मॉडल बताया गया है. कंपनी के अनुसार यह पिछले संस्करण के समान प्रदर्शन करते हुए अपेक्षाकृत कम लागत पर उपलब्ध होगा. इसके कारण बड़े स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने वाले संस्थानों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है.

तीसरा मॉडल लूना सबसे तेज और कम लागत वाला संस्करण है. इसे ऐसे उपयोगकर्ताओं और संस्थानों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जिन्हें सीमित खर्च में तेज गति से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाओं की आवश्यकता होती है. कंपनी का कहना है कि कम लागत होने के बावजूद इसकी मूल क्षमताओं से कोई समझौता नहीं किया गया है.

ओपनएआई ने यह भी जानकारी दी कि सोल मॉडल जुलाई से चुनिंदा ग्राहकों के लिए विशेष हार्डवेयर मंच पर उपलब्ध कराया जाएगा, जहां इसकी प्रोसेसिंग गति प्रति सेकंड सैकड़ों टोकन तक पहुंच सकेगी. कंपनी का दावा है कि यह अब तक के सबसे उन्नत और तेज मॉडलों में से एक होगा.

इस बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में नियामकीय निगरानी लगातार बढ़ रही है. हाल ही में एक अन्य अमेरिकी कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनी को भी राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के समाधान के बाद अपने उन्नत मॉडल तक सीमित पहुंच देने की अनुमति मिली है. इससे स्पष्ट है कि अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों के विकास के साथ-साथ उनकी सुरक्षा, जवाबदेही और नियामकीय निगरानी भी वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण विषय बन चुकी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि ओपनएआई का यह कदम नई तकनीकों के विकास और सुरक्षा मानकों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा. यदि आने वाले सप्ताहों में इन मॉडलों का व्यापक उपयोग शुरू होता है तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुसंधान, सॉफ्टवेयर विकास, साइबर सुरक्षा और औद्योगिक अनुप्रयोगों में नए अवसर खुल सकते हैं. साथ ही यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि भविष्य में उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों के विकास और उनके नियमन के बीच किस प्रकार का संतुलन स्थापित किया जाता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-