आज का दिन- 1 जुलाई 2026, अन्वधान और इष्टिः भौतिक सुख और अध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करनेवाला पर्व!

आज का दिन- 1 जुलाई 2026, अन्वधान और इष्टिः भौतिक सुख और अध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करनेवाला पर्व!

प्रेषित समय :21:29:05 PM / Tue, Jun 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026....
* नवरात्रि का (1) दिन - 15  जुलाई 2026, बुधवार, प्रतिपदा, घटस्थापना, शैलपुत्री पूजा
* नवरात्रि का (2) दिन - 16 जुलाई 2026, गुरुवार, द्वितीया, ब्रह्मचारिणी पूजा
* नवरात्रि का (3) दिन - 17 जुलाई 2026, शुक्रवार, तृतीया, चन्द्रघण्टा पूजा, कूष्माण्डा पूजा
* नवरात्रि का (4) दिन - 18 जुलाई 2026, शनिवार, पञ्चमी, स्कन्दमाता पूजा
* नवरात्रि का (5) दिन - 19 जुलाई 2026, रविवार, षष्ठी, कात्यायनी पूजा
* नवरात्रि का (6) दिन - 20 जुलाई 2026, सोमवार, सप्तमी, कालरात्रि पूजा
* नवरात्रि का (7) दिन - 21 जुलाई 2026, मंगलवार, अष्टमी, दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजा
* नवरात्रि का (8) दिन - 22 जुलाई 2026 बुधवार, नवमी, सिद्धिदात्री पूजा
* नवरात्रि का (9) दिन - 23 जुलाई 2026, गुरुवार, नवमी, नवरात्रि पारण
* दिन का चौघड़िया (1  जुलाई 2026)
लाभ - 05:49 से 07:31
अमृत - 07:31 से 09:13
काल - 09:13 से 10:54
शुभ - 10:54 से 12:36
रोग - 12:36 से 02:18
उद्वेग - 02:18 से 04:00
चर - 04:00 से 05:41
लाभ - 05:41 से 07:23
* रात्रि का चौघड़िया
उद्वेग - 07:23 से 08:41
शुभ - 08:41 से 10:00
अमृत - 10:00 से 11:18
चर - 11:18 से 12:36
रोग - 12:36 से 01:55
काल - 01:55 से 03:13
लाभ - 03:13 से 04:31
उद्वेग - 04:31 से 05:50 
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-