ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की कोशिश पर लगी रोक

ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की कोशिश पर लगी रोक

प्रेषित समय :21:39:26 PM / Tue, Jun 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आव्रजन नीति के मोर्चे पर एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए ट्रंप प्रशासन के उस कार्यकारी आदेश को प्रभावी होने से रोक दिया, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले उन बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता सीमित करने का प्रयास किया गया था, जिनके माता-पिता न तो अमेरिकी नागरिक हैं और न ही ग्रीन कार्ड धारक. सर्वोच्च अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में निहित नागरिकता संबंधी प्रावधानों की अनदेखी नहीं की जा सकती.

ट्रंप ने सत्ता में वापसी के पहले ही दिन अवैध और अस्थायी प्रवासियों पर सख्ती की व्यापक नीति के तहत यह कार्यकारी आदेश जारी किया था. आदेश में कहा गया था कि यदि किसी बच्चे के माता-पिता अमेरिकी नागरिक या स्थायी वैध निवासी नहीं हैं तो केवल अमेरिकी धरती पर जन्म लेने के आधार पर उसे स्वतः नागरिकता नहीं दी जाएगी. इस निर्णय को ट्रंप प्रशासन ने आव्रजन नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम बताया था, जबकि मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसे संविधान के विरुद्ध करार दिया था.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ट्रंप का आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के नागरिकता प्रावधान का सीधा उल्लंघन करता है. इस संशोधन के अनुसार अमेरिका में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति, जो अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन है, जन्म से ही अमेरिकी नागरिक माना जाता है. अदालत ने माना कि इस संवैधानिक व्यवस्था की व्याख्या दशकों से इसी रूप में की जाती रही है और इसमें केवल सीमित अपवाद, जैसे विदेशी राजनयिकों या शत्रु सेना के सदस्यों के बच्चों पर लागू होते हैं.

यह कानूनी लड़ाई न्यू हैम्पशायर में दायर एक सामूहिक याचिका से शुरू हुई थी. इस याचिका में उन परिवारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिनके बच्चों की नागरिकता ट्रंप के आदेश से प्रभावित हो सकती थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यदि यह आदेश लागू होता है तो अमेरिका में जन्म लेने वाले हजारों बच्चों की कानूनी स्थिति अनिश्चित हो जाएगी और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य नागरिक अधिकारों से वंचित होना पड़ सकता है.

सुनवाई के दौरान ट्रंप प्रशासन ने दलील दी कि संविधान में प्रयुक्त "अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन" शब्दों का अर्थ केवल जन्म लेना नहीं है. प्रशासन का कहना था कि नागरिकता केवल उन बच्चों को मिलनी चाहिए जिनके माता-पिता की प्राथमिक निष्ठा अमेरिका के प्रति हो और जो वैध तथा स्थायी रूप से अमेरिका में निवास कर रहे हों. सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अवैध प्रवासियों, अस्थायी वीजा पर रह रहे विद्यार्थियों या कामकाजी लोगों के बच्चों को स्वतः नागरिकता देना संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और निचली अदालत द्वारा लगाई गई रोक को बरकरार रखा. अदालत के इस निर्णय के बाद ट्रंप प्रशासन का कार्यकारी आदेश फिलहाल प्रभावी नहीं हो सकेगा. न्यायालय के फैसले को अमेरिकी संविधान की मूल भावना और जन्मसिद्ध नागरिकता के सिद्धांत की महत्वपूर्ण पुष्टि माना जा रहा है.

यह वर्ष 2026 में ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट से मिला दूसरा बड़ा झटका है. इससे पहले फरवरी में सर्वोच्च अदालत ने ट्रंप सरकार की वैश्विक शुल्क नीति को भी निरस्त कर दिया था. लगातार दो प्रमुख नीतियों पर न्यायिक रोक लगने से ट्रंप प्रशासन की कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ गई हैं.

फैसले से पहले ट्रंप ने संकेत दिए थे कि यदि अदालत उनके विरुद्ध निर्णय देती है तो भी रिपब्लिकन सांसद कांग्रेस के माध्यम से कानून बनाकर जन्मसिद्ध नागरिकता की व्यवस्था में बदलाव का प्रयास कर सकते हैं. हालांकि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसा कानून पारित कराना आसान नहीं माना जा रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल आव्रजन नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिकी संविधान की व्याख्या, नागरिक अधिकारों और न्यायपालिका की स्वतंत्र भूमिका के संदर्भ में भी बेहद महत्वपूर्ण है. अदालत के इस निर्णय से फिलहाल अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता की संवैधानिक व्यवस्था यथावत बनी रहेगी, जबकि ट्रंप प्रशासन के लिए आव्रजन सुधार के एजेंडे को आगे बढ़ाना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-