भारत की पहली निजी ऑर्बिटल रॉकेट उड़ान को तैयार, इस महीने लॉन्च होगा स्काईरूट का विक्रम-1 मिशन आगमन

भारत की पहली निजी ऑर्बिटल रॉकेट उड़ान को तैयार, इस महीने लॉन्च होगा स्काईरूट का विक्रम-1 मिशन आगमन

प्रेषित समय :21:35:50 PM / Thu, Jul 2nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र इस महीने एक नए ऐतिहासिक अध्याय का साक्षी बनने जा रहा है. देश का पहला निजी तौर पर डिजाइन, विकसित और निर्मित ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 अपने पहले परीक्षण मिशन 'मिशन आगमन' के तहत लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है. हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने गुरुवार को घोषणा की कि विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के ऐतिहासिक फर्स्ट लॉन्च पैड (एफएलपी) पर पूरी तरह असेंबल कर दिया गया है. कंपनी ने 12 जुलाई से 4 अगस्त 2026 के बीच लॉन्च विंडो तय की है. इस मिशन को भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है.

स्काईरूट एयरोस्पेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि विक्रम-1 अब पूरी तरह लॉन्च के लिए तैयार है और भारत के ऐतिहासिक फर्स्ट लॉन्च पैड पर स्थापित कर दिया गया है. कंपनी ने इसे भारतीय अंतरिक्ष अभियान के नए युग की शुरुआत बताते हुए लिखा कि एक रॉकेट के साथ एक अरब भारतीयों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं. कंपनी ने इस उपलब्धि के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) का भी आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष मिशनों में आगे बढ़ने का अवसर मिला.

कंपनी के अनुसार यह पहली बार है जब भारत में किसी निजी कंपनी द्वारा पूरी तरह डिजाइन, विकसित और निर्मित ऑर्बिटल रॉकेट को इस ऐतिहासिक लॉन्च पैड पर स्थापित किया गया है. विक्रम-1 को चरणबद्ध तरीके से तैयार किया गया, जिसमें प्रत्येक हिस्से को सावधानीपूर्वक जोड़कर उड़ान के लिए तैयार किया गया. कंपनी का कहना है कि अब लॉन्च की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और मिशन की अंतिम तैयारियां जारी हैं.

विक्रम-1 मिशन केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि भारत में निजी अंतरिक्ष उद्योग की परिपक्वता का प्रतीक माना जा रहा है. अब तक देश में अधिकांश अंतरिक्ष मिशनों का संचालन इसरो द्वारा किया जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा दिया है. इसी नीति के परिणामस्वरूप स्काईरूट जैसी कंपनियां अत्याधुनिक लॉन्च व्हीकल विकसित करने में सफल हुई हैं. यदि विक्रम-1 का यह परीक्षण सफल रहता है तो भारत वैश्विक अंतरिक्ष प्रक्षेपण बाजार में निजी कंपनियों की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाएगा.

स्काईरूट एयरोस्पेस ने मई 2026 में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए भारत का पहला निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप बनने का गौरव प्राप्त किया था, जिसे यूनिकॉर्न का दर्जा मिला. कंपनी ने 60 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश जुटाया और उसका मूल्यांकन 1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इस निवेश दौर का नेतृत्व शुरुआती गूगल निवेशक राम श्रीराम की वेंचर कैपिटल फर्म शेरपालो वेंचर्स और सिंगापुर के संप्रभु निवेश कोष जीआईसी ने संयुक्त रूप से किया. इस निवेश के बाद कंपनी की तकनीकी क्षमता और उत्पादन विस्तार को नई गति मिली.

पिछले वर्ष नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में स्काईरूट एयरोस्पेस के अत्याधुनिक इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया था. इसी दौरान उन्होंने कंपनी के पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का भी अनावरण किया. करीब दो लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला यह आधुनिक परिसर रॉकेटों की डिजाइनिंग, निर्माण, एकीकरण और परीक्षण के लिए विकसित किया गया है. कंपनी का दावा है कि इस सुविधा में हर महीने एक ऑर्बिटल रॉकेट तैयार करने की क्षमता मौजूद है, जिससे भविष्य में व्यावसायिक प्रक्षेपण सेवाओं को भी गति मिलेगी.

स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना पूर्व इसरो वैज्ञानिकों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व छात्रों पवन चंदना और भारत डाका ने की थी. दोनों ने इसरो में लंबे समय तक काम करने के बाद निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में कदम रखा और भारत की पहली निजी रॉकेट कंपनी को वैश्विक पहचान दिलाई. नवंबर 2022 में कंपनी ने अपने सब-ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एस का सफल प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया था. यह पहली बार था जब किसी भारतीय निजी कंपनी ने अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने में सफलता हासिल की थी. उसी सफलता ने विक्रम-1 जैसे बड़े ऑर्बिटल मिशन की नींव रखी.

विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रम-1 की सफल उड़ान भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को नई दिशा देगी. इससे छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों के प्रक्षेपण की लागत कम होगी, निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय कंपनियों को वैश्विक लॉन्च मार्केट में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा. साथ ही इससे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और अनुसंधान के क्षेत्र में रोजगार तथा नवाचार को भी गति मिलने की उम्मीद है.

भारत पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है. चंद्रयान, आदित्य-एल1 और गगनयान जैसे महत्वाकांक्षी मिशनों के बीच अब निजी कंपनियों की भागीदारी देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी कर रही है. ऐसे में विक्रम-1 का यह परीक्षण मिशन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के आत्मनिर्भर अंतरिक्ष अभियान और निजी नवाचार की नई उड़ान के रूप में देखा जा रहा है. पूरे देश की निगाहें अब 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच निर्धारित लॉन्च विंडो पर टिकी हैं, जब विक्रम-1 अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरकर भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने का प्रयास करेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-