बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी, पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग, आपके खिलाफ एफआईआर है तो पाला बदल लीजिए

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी, पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग, आपके खिलाफ एफआईआर है तो पाला बदल लीजिए

प्रेषित समय :15:09:28 PM / Fri, Jul 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई. बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए बड़ी टिप्पणी की है. अदालत ने टिप्पणी की कि पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) चल रही है. कोर्ट ने सत्ताधारी पार्टी की ओर इशारा करते हुए कहा कि कोई भी राजनीतिक नेता वॉशिंग मशीन में शामिल होकर अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को बंद करवा सकता है.

जस्टिस माधव जामदार, सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी (49) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे. चौधरी ने केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के कारण महाराष्ट्र पुलिस द्वारा उनके खिलाफ जारी किए गए एक्सटर्नमेंट ऑर्डर (राज्य से बाहर निकालने का आदेश) को चुनौती दी थी.

हाई कोर्ट ने और क्या कहा?

क्या सरकार के खिलाफ आवाज उठाना अपराध है या लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा? क्या सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से किसी शख्स को उसके क्षेत्र से बाहर निकाला जा सकता है? ऐसे ही एक मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि केवल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने या नारे लगाने के कारण किसी व्यक्ति को उसके जिले से बाहर नहीं किया जा सकता. दरअसल, एक स्थानीय नेता (सईद अहमद चौधरी) सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे.

पुलिस ने उन्हें 1 साल के लिए जिले से बाहर कर दिया था. इस मामले में कोर्ट ने इस आदेश रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा, नारे लगाना और शांतिपूर्वक विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है. सिर्फ इसी वजह से किसी को सजा नहीं दी जा सकती.

नागरिकों को सरकार का गुलाम बनाया जा रहा

49 साल के सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस माधव जे. जामदार की सिंगल-जज बेंच ने पुलिस से पूछा कि क्या सरकार के फैसलों का विरोध करने पर केस दर्ज करके नागरिकों को सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है और वे विरोध-प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते.सईद ने बताया था कि वह सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के जनरल सेक्रेटरी हैं और उन्हें एक साल के लिए शहर से बाहर निकाल दिया गया था.

जस्टिस जामदार ये जानना चाहते थे कि मुंबई पुलिस ने याचिकाकर्ता के पुराने विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर के आधार पर शहर से बाहर भेजने का आदेश क्यों जारी किया, जिनमें बीजेपी सरकार मुर्दाबाद और अमित शाह मुर्दाबाद जैसे नारे लगाए गए थे. हाल में हुए परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले और याचिकाकर्ता की दलील का जिक्र करते हुए, उन्होंने पूछा कि नागरिक विरोध-प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते या नारे क्यों नहीं लगा सकते?

जस्टिस जामदार ने कहा, विरोध करना नागरिकों का अधिकार है. याचिकाकर्ता ने बस 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद, अमित शाह मुर्दाबाद जैसे नारे लगाए हैं. नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते और ऐसे नारों के लिए शहर से बाहर निकालने के आदेश क्यों?

कोर्ट ने पुलिस को चेताया
पुलिस को चेताते हुए उन्होंने कहा कि वे जनता के सेवक हैं, न कि सरकार के बड़े अधिकारियों के. पिटीशनर चौधरी ने डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस के 3 दिसंबर, 2025 के देश निकाला ऑर्डर को चैलेंज किया था. उन्हें एक साल के लिए देश निकाला दिया गया था.
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-