जबलपुर. छिंदवाड़ा के बहुचर्चित कफ सीरप कांड में 26 मासूम बच्चों की मौत से जुड़े मामले में आरोपित शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को एक बार फिर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने उनकी दूसरी जमानत अर्जी खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पहली जमानत याचिका निरस्त होने के बाद मामले में ऐसा कोई नया तथ्य या बदली हुई परिस्थिति सामने नहीं आई है, जिसके आधार पर जमानत दी जा सके. अदालत ने यह भी कहा कि केवल लंबी न्यायिक अभिरक्षा जमानत का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती.
न्यायमूर्ति के. अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और राज्य शासन की दलीलों पर विचार किया. बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि डॉ. प्रवीण सोनी 5 अक्टूबर 2025 से न्यायिक अभिरक्षा में हैं और मुकदमे के निष्पादन में अभी समय लगेगा. इसलिए उन्हें नियमित जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए. वहीं, राज्य शासन ने इस मांग का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जानी चाहिए.
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने रिकार्ड का परीक्षण किया और पाया कि इसी मामले में पहली जमानत अर्जी 17 फरवरी 2026 को मेरिट के आधार पर विस्तृत आदेश के साथ खारिज की जा चुकी है. अदालत ने कहा कि उस आदेश के बाद परिस्थितियों में कोई ऐसा महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया है, जिससे पूर्व के निर्णय पर पुनर्विचार किया जा सके. इसलिए दूसरी जमानत याचिका स्वीकार करने का कोई औचित्य नहीं बनता.
अभियोजन के अनुसार डॉ. प्रवीण सोनी के विरुद्ध छिंदवाड़ा जिले के परासिया थाना में अपराध क्रमांक 296/2025 दर्ज है. उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के साथ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के प्रावधानों के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि उनके द्वारा लिखे गए कोल्ड्रिफ कफ सीरप के सेवन से 26 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी. इस घटना ने पूरे प्रदेश में व्यापक चिंता पैदा कर दी थी और मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की गई थी.
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान केवल जेल में बिताए गए समय के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती, विशेषकर तब जब मामला बड़ी संख्या में बच्चों की मौत जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा हो और पूर्व में मेरिट पर विस्तृत आदेश पारित किया जा चुका हो.
अदालत के इस फैसले के बाद डॉ. प्रवीण सोनी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा. दूसरी जमानत याचिका खारिज होने से स्पष्ट है कि न्यायालय मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी भी प्रकार की राहत देने के पक्ष में नहीं है. अब इस बहुचर्चित मामले में आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी और अंतिम निर्णय साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर किया जाएगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

