आज का दिनः 6 जुलाई 2026, श्रीकृष्ण नामावली से कामयाबी के रास्ते खुल जाते हैं! कांपता है काल जिनसे... वो हैं काल भैरव!

आज का दिनः 6 जुलाई 2026, श्रीकृष्ण नामावली से कामयाबी के रास्ते खुल जाते हैं! कांपता है काल जिनसे... वो हैं काल भैरव!

प्रेषित समय :20:16:59 PM / Sun, Jul 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 6367472963)
* मासिक कृष्ण जन्माष्टमी - 7 जुलाई 2026, मंगलवार
* कालाष्टमी - 7 जुलाई 2026, मंगलवार
* कृष्ण अष्टमी प्रारम्भ - 01:24 पीएम, 7 जुलाई 2026 
* कृष्ण अष्टमी समाप्त - 12:21 पीएम, 8 जुलाई 2026

श्रीकृष्ण के विविध स्वरूपों की नामावली का प्रतिदिन प्रात: स्मरण करने से कामयाबी के रास्ते खुल जाते हैं...
भगवान श्रीकृष्ण चतुर्विंशति नामावलि!
श्री केशवाय नमः.
श्री नारायणाय नमः.
श्री माधवाय नमः.
श्री गोविन्दाय नमः.
श्री विष्णवे नमः.
श्री मधुसूदनाय नमः.
श्री त्रिविक्रमाय नमः.
श्री वामनाय नमः.
श्री श्रीधराय नमः.
श्री हृषीकेशाय नमः.
श्री पद्मनाभाय नमः.
श्री दामोदराय नमः.
श्री संकर्षणाय नमः.
श्री वासुदेवाय नमः.
श्री प्रद्युम्नाय नमः.
श्री अनिरुद्धाय नमः.
श्री पुरुषोत्तमाय नमः.
श्री अधोक्षजाय नमः.
श्री नरसिंहाय नमः.
श्री अच्युताय नमः.
श्री जनार्दनाय नमः.
श्री उपेन्द्राय नमः.
श्री हरये नमः.
श्री कृष्णाय नमः.

कांपता है काल जिनसे... वो हैं काल भैरव!
* जिस दिन भगवान शिव भैरव के रूप में प्रकट हुए थे, उसे कालभैरव जयन्ती कहा जाता है. कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है. इसलिए हर कृष्ण पक्ष की अष्टमी, कालाष्टमी कहलाती है.
* इस दिन काल भैरव का दर्शन-पूजन सर्व मनोकामना पूर्ण करता है. इस दिन प्रातः पवित्र नदी-सरोवर में स्नान के बाद पितरों का श्राद्ध-तर्पण करके भैरव पूजा-व्रत करने से तमाम विघ्न समाप्त हो जाते हैं, दीर्घायु प्राप्त होती है.
* देवी भक्त कालाष्टमी के दिन काल भैरव के साथ-साथ देवी कालिका की पूजा-अर्चना-व्रत भी करते हैं. भैरव पूजा-आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य रक्षा और अकाल मौत से सुरक्षा भी होती है.
* कालभैरव अष्टमी पर भैरव के दर्शन-पूजन मात्र से अशुभ कर्मों से मुक्ति मिलती है, क्रूर ग्रहों के कुप्रभाव से छुटकारा मिलता है.
* भोलेनाथ के भैरव स्वरूप की पूजा, उपासना करने वाले शिवभक्तों को भैरवनाथ की पूजा करके अर्घ्य देना चाहिए.
* रात्रि जागरण करके शिव-पार्वती की कथा और भजन-कीर्तन करना चाहिए. भैरव कथा का श्रवण और आरती करनी चाहिए.
* भगवान भैरवनाथ की प्रसन्नता के लिए उनके वाहन श्वान- कुत्ते को भोजन कराना चाहिए.
* इस दिन प्रातः पवित्र नदी-सरोवर में स्नान करके पितरों का श्राद्ध-तर्पण करके भैरव-पूजा-व्रत करने से सारे विघ्न समाप्त हो जाते हैं.
* अकाल मृत्यु से रक्षा होकर दीर्घायु प्राप्त होती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-