शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में आरोपी कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल 17 जुलाई तक EOW रिमांड पर

शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में आरोपी कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल 17 जुलाई तक EOW रिमांड पर

प्रेषित समय :15:18:11 PM / Thu, Jul 9th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में आरोपी कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को गुरुवार को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उन्हें 17 जुलाई तक आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की रिमांड पर भेज दिया. इस दौरान जांच एजेंसी उनसे विभिन्न मामलों में पूछताछ करेगी.

बचाव पक्ष के अधिवक्ता फैजल रिजवी ने बताया कि रिमांड अवधि पूरी होने के बाद ईओडब्ल्यू आरोपी को दोबारा अदालत में पेश करेगी. रामगोपाल अग्रवाल को बुधवार को ईओडब्ल्यू ने हिरासत में लिया था. वे छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रह चुके हैं और नान (NAN) के अध्यक्ष का भी दायित्व संभाल चुके हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार, वे इन मामलों में आरोपी बनाए जाने के बाद करीब तीन वर्षों से फरार बताए जा रहे थे.

जानकारी के मुताबिक, कस्टम मिलिंग मामले में ईओडब्ल्यू ने पहले रामगोपाल अग्रवाल को समन जारी किया था. इससे पहले उनके बेटे वैभव अग्रवाल से लंबी पूछताछ की गई थी. इसके बाद रामगोपाल अग्रवाल जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित हुए, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया.

ईओडब्ल्यू की जांच के अनुसार, कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन योजना में वर्ष 2015 से 2023 के बीच नियमों के कथित उल्लंघन के जरिए कुछ राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है. जांच एजेंसी का दावा है कि इस मामले में लगभग 127 करोड़ रुपये की अनियमितता हुई है. हालांकि, इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है.

वहीं, कोल लेवी मामले में ईडी और ईओडब्ल्यू का आरोप है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन अवैध वसूली की गई. जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के माध्यम से करीब 540 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली हुई. इस मामले में कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है.

इसके अलावा शराब घोटाला मामले में भी जांच एजेंसियों का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के दौरान सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के जरिए लगभग 3,200 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ. इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच और अदालती प्रक्रिया जारी है. सभी मामलों में आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी होना बाकी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-