कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एजेयूपी (आम जनता उन्नयन पार्टी) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर की कथित विवादित टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि जनप्रतिनिधियों के गैरजिम्मेदाराना और भड़काऊ बयानों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को अपने शब्दों का चयन बेहद जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर में आयोजित एक जनसभा के दौरान की, जहां आगामी विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। उन्होंने बिना नाम लिए हुमायूं कबीर का उल्लेख करते हुए कहा कि अब ऐसी टिप्पणियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जो समाज में तनाव पैदा करें या कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित विधायक को संविधान की मर्यादा का ध्यान रखते हुए सार्वजनिक मंचों पर संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए।
सुवेंदु अधिकारी ने अपने संबोधन में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय कई लोगों को मनमाने बयान देने और राजनीतिक दबाव बनाने की छूट मिल गई थी, लेकिन अब कानून के शासन से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और सभी नागरिकों के लिए शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने रेजीनगर क्षेत्र के मतदाताओं से भी संवाद करते हुए कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी को उपचुनाव में समर्थन मिलता है तो क्षेत्र के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार विकास और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों पर काम कर रही है, जबकि पूर्व में क्षेत्र की राजनीति धार्मिक ध्रुवीकरण और विवादों के इर्द-गिर्द घूमती रही।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और वक्फ कानून जैसे मुद्दों को लेकर पहले राजनीतिक माहौल को जानबूझकर तनावपूर्ण बनाया गया था, जिसका असर आम लोगों को झेलना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब ऐसे किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देगी, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो।
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हुमायूं कबीर के बयानों पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई हो। इससे पहले भी विधानसभा के भीतर उन्होंने कबीर को चेतावनी देते हुए कहा था कि भविष्य में इस प्रकार के बयान देने से पहले कई बार सोचने की आवश्यकता होगी। उस दौरान सरकार ने यह भी जानकारी दी थी कि कथित भड़काऊ भाषणों को लेकर संबंधित पुलिस थानों में आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
उधर हुमायूं कबीर पहले अपने बयानों को राजनीतिक टिप्पणी बताते हुए कह चुके हैं कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय के बीच तनाव पैदा करना नहीं था। हालांकि उनके हालिया बयानों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और आगामी उपचुनाव से पहले यह मुद्दा राज्य की राजनीति में प्रमुख चर्चा का विषय बन गया है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

