इसरो में 100 से अधिक वैज्ञानिकों के इस्तीफों की खबरों के बीच केंद्र ने कड़े किए निकास नियम

इसरो में 100 से अधिक वैज्ञानिकों के इस्तीफों की खबरों के बीच केंद्र ने कड़े किए निकास नियम

प्रेषित समय :21:55:17 PM / Thu, Jul 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में हाल के महीनों में बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों के इस्तीफे सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफों पर नियंत्रण के लिए नए कदम उठाए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार करीब 100 से अधिक वैज्ञानिकों द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद अंतरिक्ष विभाग ने इसरो के विभिन्न केंद्रों को निर्देश जारी किए हैं कि गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े ग्रुप 'ए' के वैज्ञानिक एवं तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन तत्काल स्वीकार न किए जाएं।

रिपोर्ट के अनुसार 14 जुलाई को जारी एक आंतरिक ज्ञापन में कहा गया है कि ऐसे सभी मामलों को अब सीधे अंतरिक्ष विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस) के पास भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की रणनीतिक और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाएं अचानक विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की कमी से प्रभावित न हों।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हाल के महीनों में इसरो के विभिन्न केंद्रों से करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया है। हालांकि अंतरिक्ष विभाग ने अब तक आधिकारिक रूप से इस्तीफों की संख्या की पुष्टि नहीं की है। रिपोर्टों के अनुसार बेंगलुरु स्थित यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) से लगभग 80 वैज्ञानिकों और तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) से करीब 20 वैज्ञानिकों ने संगठन छोड़ा है। कुछ सूत्रों का कहना है कि कुल संख्या 120 के आसपास भी हो सकती है।

इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों के इस्तीफों की पुष्टि करते हुए कहा कि किसी भी संगठन में कर्मचारियों का आना-जाना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि सरकार का नया कदम केवल कर्मचारियों को रोकने के लिए नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी है कि महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन अचानक प्रभावित न हों। उनके अनुसार यदि कोई वैज्ञानिक संगठन छोड़ता भी है तो उसकी जिम्मेदारी संभालने के लिए दूसरे अधिकारी तैयार रहते हैं और इसरो पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

गौरतलब है कि इस समय इसरो कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है। इनमें भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की दीर्घकालिक योजना, चंद्रमा और अन्य ग्रहों से जुड़े भविष्य के मिशन तथा विभिन्न उपग्रह प्रक्षेपण कार्यक्रम शामिल हैं। ऐसे समय में अनुभवी वैज्ञानिकों के बड़ी संख्या में संगठन छोड़ने की खबरों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में चर्चा तेज कर दी है।

सरकार का मानना है कि रणनीतिक महत्व की परियोजनाओं में कार्यरत वैज्ञानिकों की अचानक कमी से अनुसंधान, विकास और मिशनों की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है। इसी कारण अब ऐसे मामलों की समीक्षा सीधे अंतरिक्ष विभाग के स्तर पर की जाएगी, ताकि प्रत्येक आवेदन पर परियोजनाओं की आवश्यकता और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जा सके।

हालांकि इसरो ने यह स्पष्ट किया है कि संगठन के सभी मिशन निर्धारित योजना के अनुसार जारी रहेंगे और वैज्ञानिकों के इस्तीफों का प्रभाव महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष कार्यक्रमों की बढ़ती जटिलता और निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के विस्तार के बीच वैज्ञानिकों को बनाए रखना भविष्य में इसरो के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बना रह सकता है।