सहमति से संबंध बनाकर शादी ना करना बलात्कार नहीं, एमपी हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा की रद्द

सहमति से संबंध बनाकर शादी ना करना बलात्कार नहीं, एमपी हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा की रद्द

प्रेषित समय :16:03:21 PM / Fri, Jul 17th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी की सजा रद्द कर दी. न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार वानी की एकल पीठ ने कहा कि यदि दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने हों और बाद में किसी कारणवश शादी नहीं हो पाई हो, तो केवल शादी से इनकार करने के आधार पर आरोपी को बलात्कार या आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता. इसके लिए यह साबित होना आवश्यक है कि शुरुआत से ही आरोपी की नीयत धोखाधड़ी या शारीरिक शोषण की थी.
मामला फरवरी 2020 का है. एक युवती का शव खेत में फंदे से लटका मिला था.

पुलिस जांच और डीएनए रिपोर्ट में सामने आया कि मृतका के गर्भ में बच्चा पल रहा था. अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर युवती से शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से मुकर गया. इससे मानसिक रूप से परेशान होकर युवती ने आत्महत्या कर ली. हालांकि, सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि मृतका के परिजन दोनों के प्रेम संबंध से परिचित थे और उन्हें इस रिश्ते पर कोई आपत्ति नहीं थी.

अदालत ने ये महत्वपूर्ण टिप्पणी की

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी की मंशा शुरू से ही शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने की थी. अदालत ने कहा कि यदि शादी का प्रस्ताव शुरुआत में वास्तविक था, लेकिन बाद की परिस्थितियों के कारण विवाह नहीं हो सका, तो इसे बलात्कार का अपराध नहीं माना जा सकता. पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी ने बाद में शादी से इनकार किया, तो केवल इसी आधार पर उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक उसके ऐसे कृत्य का प्रत्यक्ष संबंध आत्महत्या के लिए उकसावे से साबित न हो.

आरोपी को संदेह का लाभ

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आपराधिक न्याय शास्त्र के स्थापित सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उपलब्ध साक्ष्यों से दो न्यायसंगत संभावनाएं बनती हैं, तो आरोपी के पक्ष में जाने वाली संभावना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा. इसी आधार पर आरोपी को दोषमुक्त करते हुए उसकी सजा रद्द कर दी गई.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-