छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला: सब्सिडी के लिए सरपंच का निवास प्रमाण पत्र अमान्य, तहसीलदार का ही मान्य होगा

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला: सब्सिडी के लिए सरपंच का निवास प्रमाण पत्र अमान्य, तहसीलदार का ही मान्य होगा

प्रेषित समय :15:34:14 PM / Tue, Jul 21st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रायपुर. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य की शासकीय योजनाओं और सब्सिडी के संदर्भ में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा जारी किया गया निवास प्रमाण पत्र वैध कानूनी दस्तावेज नहीं माना जाएगा. अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होने का प्रमाण केवल तहसीलदार या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किसी सक्षम अधिकारी (Competent Authority) द्वारा जारी 'मूल निवासी प्रमाण पत्र' (Domicile Certificate) से ही सिद्ध हो सकता है.

न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ ने रायपुर निवासी जसपाल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक आदेश पारित किया.

क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता जसपाल सिंह ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना (State Dairy Entrepreneurship Development Scheme) के तहत 50 प्रतिशत सब्सिडी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था. योजना के तहत उन्होंने बैंक ऑफ महाराष्ट्र से 12 लाख रुपये का लोन लेकर डेयरी फार्म स्थापित भी कर लिया था. हालांकि, आवश्यक दस्तावेजों (विशेषकर वैध मूल निवासी प्रमाण पत्र) की कमी के कारण विभाग द्वारा सब्सिडी राशि स्वीकृत नहीं की गई, जिसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि इस योजना का लाभ केवल छत्तीसगढ़ के स्थायी मूल निवासियों को देने का प्रावधान है. याचिकाकर्ता ने आवेदन पत्र के साथ स्वयं का वैध मूल निवासी प्रमाण पत्र जमा नहीं किया था, बल्कि सरपंच द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र पेश किया था.

सरपंच का प्रमाण पत्र सक्षम अधिकारी का विकल्प नहीं: हाई कोर्ट
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि ग्राम पंचायत सरपंच द्वारा जारी प्रमाण पत्र को सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मूल निवासी प्रमाण पत्र का विकल्प नहीं माना जा सकता. इसे कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

अदालत ने निर्देश दिया कि:

किसी भी सरकारी योजना में पात्रता का निर्धारण तय प्रशासनिक नियमों के अनुसार ही होगा.

याचिकाकर्ता को विभाग के समक्ष तहसीलदार या सक्षम अधिकारी द्वारा जारी वैध मूल निवासी प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया जाता है.

दस्तावेज प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के भीतर पशु चिकित्सा सेवा के संयुक्त संचालक (रायपुर) नियम अनुसार सब्सिडी पर अंतिम निर्णय लें.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-