गुमशुदगी जांच में एमपी पुलिस पर हाई कोर्ट सख्त, एएसपी सुजावल जग्गा हटे, अब एसएसपी करेंगे निगरानी

गुमशुदगी जांच में एमपी पुलिस पर हाई कोर्ट सख्त, एएसपी सुजावल जग्गा हटे, अब एसएसपी करेंगे निगरानी

प्रेषित समय :19:13:55 PM / Tue, Jul 21st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने गुमशुदा युवती और एक युवक की तलाश में पुलिस की धीमी और लापरवाह जांच पर कड़ी नाराजगी जताते हुए बड़ा आदेश जारी किया है. न्यायालय ने विशेष जांच दल (एसआईटी) के प्रमुख एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुजावल जग्गा को तत्काल प्रभाव से जांच से अलग करने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि अब पूरे मामले की व्यक्तिगत निगरानी ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) करेंगे और भविष्य में हाई कोर्ट में प्रस्तुत की जाने वाली प्रत्येक स्टेटस रिपोर्ट एसएसपी के शपथपत्र के साथ दाखिल की जाएगी. मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है.

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. अदालत ने कहा कि जिस पिता को अपनी गुमशुदा बेटी के बारे में कोई जानकारी नहीं है, उसी पर बार-बार बेटी का पता बताने का दबाव बनाया जा रहा है. न्यायालय ने इस रवैये को अनुचित बताते हुए कहा कि इस तरह की जांच प्रणाली मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है. अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले को देखते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को राज्य की जांच व्यवस्था की समीक्षा करने की आवश्यकता है.

सरकारी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि गुमशुदा लोगों की लोकेशन संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) को ईमेल भेजा गया था, लेकिन जवाब नहीं मिलने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ सकी. इस पर हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस दो महीने तक केवल ईमेल के उत्तर का इंतजार करती रही, जबकि संबंधित कार्यालय जाकर आवश्यक जानकारी जुटाने का प्रयास भी नहीं किया गया. अदालत ने कहा कि इस तरह की निष्क्रियता गंभीर मामलों की जांच में स्वीकार नहीं की जा सकती.

हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि जांच केवल मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साधनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. यदि मोबाइल फोन बंद हो जाए तो पूरी जांच रुक जाना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है. न्यायालय ने कहा कि तकनीकी संसाधनों के साथ-साथ मैदानी स्तर पर भी सक्रिय खोजबीन की जानी चाहिए, ताकि गुमशुदा व्यक्तियों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके.

सुनवाई के दौरान एएसपी सुजावल जग्गा ने अदालत को बताया कि उन्हें पूरे मामले को समझने में लगभग दो महीने का समय लगा और जांच आगे बढ़ाने के लिए एक और अवसर देने का अनुरोध किया. हालांकि हाई कोर्ट ने उनका अनुरोध अस्वीकार कर दिया. अदालत ने कहा कि राज्य सरकार बेटियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात करती है, लेकिन इस मामले में पुलिस की जांच बेहद धीमी और निराशाजनक रही है. ऐसे मामलों में समय पर और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है.

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अब मामले की जांच एसएसपी की सीधी निगरानी में होगी और जांच की प्रगति से संबंधित प्रत्येक रिपोर्ट शपथपत्र के साथ न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी. अदालत ने 27 जुलाई तक विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. माना जा रहा है कि हाई कोर्ट का यह आदेश गुमशुदगी के मामलों में पुलिस जांच की जवाबदेही तय करने और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-