बिलासपुर. देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (NEET UG Exam) में हुए कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में धांधली को लेकर छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है. राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलनों की गूंज अब छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भी प्रमुखता से सुनाई दे रही है. इसी कड़ी में ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) के बैनर तले छात्रों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी माँगें रखीं.
संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Education Minister Dharmendra Pradhan) के तत्काल इस्तीफे, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को पूरी तरह भंग करने और आंदोलनकारी छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता को रोकने की कड़ी मांग की है.
दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज का जताया विरोध
AIDSO के बिलासपुर पदाधिकारियों और छात्र नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और NTA के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों को लेकर संसद मार्च (Parliament March) निकाल रहे थे.
संगठन के अनुसार, 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने आंदोलन दबाने के उद्देश्य से प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज किया. AIDSO ने आरोप लगाया कि पुलिस की इस कार्रवाई में छात्र-छात्राओं, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, जो कि लोकतंत्र और छात्र अधिकारों का हनन है.
NTA को भंग करने और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग
प्रदर्शनकारियों ने अपनी प्रमुख मांगों को रेखांकित करते हुए कहा:
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: NEET परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री तुरंत इस्तीफा दें.
NTA पर एक्शन: बार-बार विवादों में घिरने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तुरंत प्रभाव से भंग (Scrap) किया जाए.
पुलिस कार्रवाई पर रोक: प्रदर्शन कर रहे युवाओं और छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं और पुलिस बर्बरता बंद हो.
"न्याय मिलने तक जारी रहेगा देशभर में आंदोलन"
AIDSO के प्रांतीय नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार नीट घोटाले (NEET Scam) में सुधार करने और पारदर्शी जांच कराने के बजाय छात्रों की आवाज को लाठी के दम पर दबाने का प्रयास कर रही है. संगठन ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ और उन्हें न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन केवल बिलासपुर या दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में इसे पूरे देश में और अधिक उग्र एवं व्यापक बनाया जाएगा.

