नई दिल्ली. भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुकिंग को लेकर ऐसा खुलासा किया है, जिसने डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था की बड़ी चुनौती को सामने ला दिया है. रेलवे के अनुसार पिछले छह महीनों में आईआरसीटीसी (IRCTC) की ई-टिकटिंग प्रणाली पर टिकट बुक करने के लिए जितने भी ऑनलाइन अनुरोध आए, उनमें आधे से अधिक वास्तविक यात्रियों के नहीं, बल्कि स्वचालित कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (बॉट्स) के थे. रेलवे का कहना है कि ये प्रोग्राम बेहद तेज गति से टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्नत साइबर सुरक्षा प्रणाली ने इन्हें सफलतापूर्वक पहचानकर रोक दिया. रेलवे का दावा है कि इससे वास्तविक यात्रियों को टिकट बुक करने का बेहतर अवसर मिला है.
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए बताया कि पिछले छह महीनों में आईआरसीटीसी के ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म पर औसतन 15.38 अरब बुकिंग अनुरोध प्राप्त हुए. इनमें से 8.88 अरब अनुरोध ऐसे स्वचालित सॉफ्टवेयर से आए, जिन्हें सुरक्षा प्रणाली ने संदिग्ध मानते हुए ब्लॉक कर दिया. यह कुल ऑनलाइन ट्रैफिक का लगभग 57.74 प्रतिशत है. यानी हर 100 ऑनलाइन अनुरोधों में लगभग 58 अनुरोध ऐसे थे, जिन्हें किसी व्यक्ति ने नहीं बल्कि कंप्यूटर आधारित स्वचालित प्रोग्राम ने भेजा था.
रेलवे अधिकारियों के अनुसार ये स्वचालित सॉफ्टवेयर सामान्य यात्रियों की तुलना में कई गुना अधिक गति से टिकट बुक करने का प्रयास करते हैं. इनका उपयोग अक्सर फर्जी खातों, अवैध एजेंटों और टिकटों की कालाबाजारी से जुड़े नेटवर्क द्वारा किया जाता है. यही कारण है कि तत्काल टिकट खुलते ही कई बार कुछ ही सेकंड में सीटें भर जाती हैं और आम यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाता. रेलवे का कहना है कि इन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में साइबर सुरक्षा तंत्र को लगातार मजबूत किया गया है.
लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जून 2026 तक हर महीने ऑनलाइन टिकटिंग प्रणाली पर बॉट्स की सक्रियता 45 प्रतिशत से अधिक रही. अप्रैल, मई और जून में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंच गया. जून 2026 में कुल ऑनलाइन अनुरोधों में 65.95 प्रतिशत हिस्सेदारी स्वचालित सॉफ्टवेयर की रही, जो छह महीनों का सबसे अधिक स्तर है. वहीं मई महीने में टिकट बुकिंग अनुरोधों की संख्या 20.07 अरब तक पहुंच गई, जो इस अवधि का सबसे अधिक मासिक ट्रैफिक था.
रेलवे ने बताया कि ऑनलाइन टिकटों की कालाबाजारी रोकने और वास्तविक यात्रियों को प्राथमिकता देने के लिए तत्काल टिकट प्रणाली में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. अब ऑनलाइन तत्काल टिकट बुक करने के लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है. इसके अलावा आधार आधारित ओटीपी सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे फर्जी आईडी, एजेंटों के दुरुपयोग और स्वचालित बुकिंग सॉफ्टवेयर पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके. रेलवे का कहना है कि इन उपायों से टिकट आवंटन पहले की तुलना में अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी हुआ है.
साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर भी रेलवे ने कई नई तकनीकों को अपनाया है. ई-टिकटिंग प्रणाली को हैकिंग, ब्रूट-फोर्स हमलों और डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस (DDoS) जैसे साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक फायरवॉल, एंटी-बॉट तकनीक, इंट्रूजन प्रिवेंशन सिस्टम और वेब एप्लीकेशन सुरक्षा परतें स्थापित की गई हैं. संदिग्ध गतिविधियां सामने आते ही सिस्टम उन्हें स्वतः ब्लॉक कर देता है, जिससे वास्तविक यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग प्रक्रिया बाधित नहीं होती.
रेलवे मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि टिकटों की अवैध खरीद-फरोख्त पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. वर्ष 2021 से जून 2026 तक रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने देशभर में 22,676 दलालों को गिरफ्तार किया है. इनके खिलाफ रेलवे अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की गई. रेलवे का मानना है कि तकनीकी सुरक्षा और दलालों के खिलाफ अभियान के संयुक्त प्रभाव से टिकटों की कालाबाजारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है.
रेलवे ने अपने डिजिटल ढांचे को सुरक्षित बनाने के लिए नेटवर्क और डेटा सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया है. लगभग 30 जीबीपीएस क्षमता वाली डी-डॉस सुरक्षा प्रणाली ऑनलाइन टिकटिंग नेटवर्क की निगरानी करती है. साथ ही विशेषज्ञ एजेंसियां डीप वेब और डार्क वेब पर भी नजर रखती हैं, ताकि रेलवे के डिजिटल नेटवर्क के खिलाफ किसी भी साइबर खतरे की समय रहते पहचान की जा सके. नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित समर्पित डेटा सेंटर से संचालित ई-टिकटिंग प्रणाली सीसीटीवी निगरानी, सीमित भौतिक प्रवेश और अंतरराष्ट्रीय सूचना सुरक्षा मानकों से सुरक्षित है. इसके अलावा सिस्टम को सीईआरटी-इन (CERT-In) से भी जोड़ा गया है, जहां चौबीसों घंटे साइबर सुरक्षा घटनाओं की निगरानी की जाती है.
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि देश में डिजिटल टिकटिंग का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ साइबर चुनौतियां भी बढ़ी हैं. ऐसे में आधुनिक साइबर सुरक्षा प्रणाली, आधार आधारित सत्यापन, एंटी-बॉट तकनीक और टिकट दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे कदम आम यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं. रेलवे का दावा है कि इन उपायों से ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है तथा भविष्य में नई तकनीकों के जरिए इसे और अधिक मजबूत किया जाएगा.
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