नई दिल्ली. वैश्विक राइड-हेलिंग कंपनी उबर टेक्नोलॉजीज ने अपने कारोबारी ढांचे में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कस्टमर सर्विस विभाग में लगभग 10 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी कर दी है. कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कार्यप्रणाली को तेजी से अपनाने और संगठनात्मक ढांचे को अधिक चुस्त बनाने की रणनीति पर काम कर रही है. इस फैसले के तहत सबसे अधिक असर कंपनी के कम्युनिटी ऑपरेशंस डिवीजन पर पड़ा है, जो ग्राहकों की सहायता और शिकायतों के समाधान का काम संभालता है. उबर का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियां लागत घटाने, एआई को अपनाने और संचालन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कर्मचारियों की संख्या कम कर रही हैं.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उबर ने इस पुनर्गठन के तहत न केवल कर्मचारियों की संख्या घटाई है, बल्कि रिमोट वर्क कर रहे कर्मचारियों को भी कंपनी के निर्धारित हब कार्यालयों में स्थानांतरित होकर काम करने के लिए कहा है. इसे कंपनी की "रिटर्न-टू-ऑफिस" नीति का हिस्सा माना जा रहा है. उबर का मानना है कि एक ही स्थान पर काम करने से टीमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और एआई आधारित नई तकनीकों को तेजी से लागू किया जा सकेगा.
बताया जा रहा है कि कंपनी ने अपने आंतरिक संदेश में स्वीकार किया है कि मौजूदा संगठनात्मक ढांचा काफी बिखरा हुआ हो गया था, जिसके कारण अगली पीढ़ी की एआई तकनीकों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था. इसी वजह से कंपनी ने अपने संचालन को सरल बनाने और विभिन्न प्रक्रियाओं को स्वचालित करने का फैसला लिया है. उबर का कहना है कि भविष्य में एआई का उपयोग केवल ग्राहक सहायता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी के विभिन्न विभागों में भी इसका दायरा बढ़ाया जाएगा.
यह पहली बार माना जा रहा है कि उबर ने कर्मचारियों की छंटनी को सीधे तौर पर अपनी एआई रणनीति से जोड़ा है. इससे पहले जून 2026 में भी कंपनी ने अपने "पीपल डिवीजन" में लगभग 23 प्रतिशत पद समाप्त किए थे. हालांकि उस समय प्रभावित कर्मचारियों की संख्या कंपनी के कुल वैश्विक कार्यबल का एक प्रतिशत से भी कम थी. उबर के दुनिया भर में लगभग 34 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई के बढ़ते उपयोग के कारण कई ऐसे कार्य, जिन्हें पहले बड़ी संख्या में कर्मचारी मिलकर करते थे, अब स्वचालित प्रणालियों के जरिए कम समय और कम लागत में पूरे किए जा सकते हैं. ग्राहक सहायता सेवाओं में एआई चैटबॉट, वॉयस असिस्टेंट और मशीन लर्निंग आधारित समाधान तेजी से अपनाए जा रहे हैं, जिससे कंपनियां मानव संसाधन पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं.
हालांकि उबर ने यह भी स्पष्ट किया है कि कंपनी पूरी तरह भर्ती पर रोक नहीं लगा रही है. फिलहाल कंपनी के पास 500 से अधिक रिक्त पद उपलब्ध हैं. इनमें विशेष रूप से इंजीनियरिंग, ऑटोनॉमस मोबिलिटी और रोबोटैक्सी परियोजनाओं से जुड़े पद शामिल हैं. इससे संकेत मिलता है कि कंपनी पारंपरिक भूमिकाओं में कर्मचारियों की संख्या घटा रही है, जबकि भविष्य की तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में निवेश जारी रखे हुए है.
उबर पहले भी संकेत दे चुकी थी कि एआई के व्यापक उपयोग से भविष्य में नई भर्तियों की गति धीमी पड़ सकती है. अब ताजा पुनर्गठन ने इस रणनीति को और स्पष्ट कर दिया है. कंपनी का फोकस ऐसे कर्मचारियों पर है जो नई तकनीकों के साथ काम करने में सक्षम हों और डिजिटल परिवर्तन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकें.
उबर का यह कदम वैश्विक टेक उद्योग में चल रही व्यापक छंटनी की लहर का हिस्सा माना जा रहा है. हाल के महीनों में कई बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों ने लागत कम करने और कारोबार को अधिक लाभदायक बनाने के लिए कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है. उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में दुनिया भर में एक लाख से अधिक टेक कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं. अकेले मई महीने में करीब 28,900 कर्मचारियों की छंटनी की गई थी. लेऑफ ट्रैकर Layoffs.fyi के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष अब तक वैश्विक स्तर पर 1,16,739 से अधिक टेक कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी है.
उबर के अलावा मेटा, क्लाउडफ्लेयर, इंट्यूट, पेपाल, सिस्को, क्वोरा, कॉइनबेस और अमेजन जैसी कई प्रमुख कंपनियां भी अपने कार्यबल में कटौती कर चुकी हैं. अधिकांश कंपनियों का तर्क है कि एआई आधारित तकनीकों के विस्तार, लागत अनुकूलन और कारोबारी पुनर्गठन के कारण यह कदम उठाना आवश्यक हो गया है.
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई का प्रभाव रोजगार बाजार पर और अधिक दिखाई देगा. पारंपरिक ग्राहक सहायता, डेटा प्रोसेसिंग और प्रशासनिक कार्यों में मानव श्रम की मांग घट सकती है, जबकि एआई डेवलपमेंट, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा, डेटा इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे. ऐसे में कर्मचारियों के लिए नई तकनीकों के अनुरूप कौशल विकसित करना पहले से अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है.
उबर की ताजा छंटनी यह संकेत देती है कि वैश्विक तकनीकी कंपनियां अब केवल खर्च घटाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने पूरे कारोबारी मॉडल को एआई-केंद्रित बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं. ऐसे में आने वाले समय में टेक उद्योग में रोजगार की प्रकृति और कार्यशैली दोनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

